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सजावट में नए अंदाज और अहसास

हर कोई अपना घर अपने अंदाज में, अपनी रुचि के मुताबिक सजाता या सजाना चाहता है। घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का चुनाव भी अपनी पसंद से करता है। मगर अब घरों की सजावट को लेकर लोगों की रुचि काफी परिष्कृत हुई है।

Author November 19, 2017 06:00 am
हर कोई अपने घर को नया अंदाज, नया अहसास देना चाहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब बाजार में घरेलू साज-सज्जा की विविध सुविधाएं और सामग्री उपलब्ध है।

हर कोई अपना घर अपने अंदाज में, अपनी रुचि के मुताबिक सजाता या सजाना चाहता है। घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का चुनाव भी अपनी पसंद से करता है। मगर अब घरों की सजावट को लेकर लोगों की रुचि काफी परिष्कृत हुई है। हर कोई अपने घर को नया अंदाज, नया अहसास देना चाहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब बाजार में घरेलू साज-सज्जा की विविध सुविधाएं और सामग्री उपलब्ध है। बहुत सारे आंतरिक सज्जाकार आपके घर की सजावट में सहयोग को तत्पर हैं। अपने घर को किस तरह नया अंदाज और अलग अहसास दिलाएं, बता रही हैं सुमन बाजपेयी।

अगर आप अपने घर की आंतरिक साज-सज्जा को एक आत्मीय अहसास देना चाहती हैं और ‘साइज फिट्स फॉर आॅल’, की अवधारणा को नापसंद करती हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है- ‘कस्टमाइज्ड इंटीरियर डेकोर’ यानी पहले से तैयार सजावट सामग्री। आज बाजार में ऐसे अनगिनत सेवा प्रदाता हैं, जो सजावट की वस्तुओं को ग्राहक की रुचि और आवश्यकता के अनुसार तैयार कर देते हैं। पर अगर आपका बजट किसी आंतरिक साज-सज्जाकार पर पैसा खर्च करने जितना नहीं है, तो आप खुद भी कम खर्च में एक डिजाइनर घर बना सकती हैं।  कस्टमाइज्ड आंतरिक साज-सज्जा के बढ़ते चलन की सबसे बड़ी वजह है भारतीय उपभोक्ता की सोच और जीवनशैली में आया बदलाव। उसकी सोच न सिर्फ पहनावे, खाने या जीवन की छोटी से छोटी चीज में झलकने लगी है, बल्कि घर की सजावट को लेकर भी वह अत्यधिक सतर्क हुआ है। घर को खास अंदाज में सजाना अब केवल उच्च वर्ग तक सीमित नहीं रहा है, यह मध्यवर्ग की जीवनशैली का भी हिस्सा बनता जा रहा है। डिजाइनर मधूलिका राय का मानना है कि कस्टमाइज्ड बनावट की लोकप्रियता के पीछे मीडिया की भी अहम भूमिका है। बेहतर जिंदगी जीने के ढंग और सेलेब्रिटीज के घरों को टीवी पर दिखा कर उसने लोगों के मन में वैसा ही घर बनाने की चाह प्रबल कर दी है। लोग किसी टेलीविजन धारावाहिक में दिखने वाली सजावट या थीम को अपने घर में भी लगाने की मांग करने लगे हैं।

आंतरिक इंटीरियर डिजाइनर अंजलि गोयल के अनुसार, ‘कस्टमाइज्ड डिजाइनिंग में डिजाइनर लोगों की आवश्यकताओं, उपयोगिता और जगह को ध्यान में रखते हुए आंतरिक साज-सज्जा, उचित, खूबसूरत और उपयोगी थीम, उपभोक्ता सामग्री और पूरी सजावट के बारे में समाधान सुझाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में रचनात्मकता होने के साथ-साथ तकनीकी पहलुओं का भी इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए तकनीकी रूप से भी आंतरिक साज-सज्जाकार का कुशल होना जरूरी है।’

क्या है कस्टमाइज्ड आंतरिक साज-सज्जा
इंटीरियर डिजाइनर अमिता गोखले कहती हैं कि जब इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की जरूरतों, घर में या हर कमरे, किचन बाथरूम, बालकनी- यानी हर जगह को ध्यान में रखते हुए सजावट की जाती है, तो उसे कस्टामाइज्ड आंतरिक साज-सज्जा कहा जाता है। इस सज्जा में हर चीज जरूरत, रंग, बनावट, कपड़े, मैटीरियल डिजाइनिंग आदि के अनुसार एक-दूसरे से मेल खाती है। चाहे वह सोफा हो, कुशन, दीवार सीलिंग, पर्दे या फिर एक्सेसरीज। अगर आप बाजार जाकर जो भी वहां उपलब्ध होता है, खरीद लेते हैं तो हो सकता है वह आपके कमरों के आकार के अनुसार फिट न बैठे। इसलिए जरूरी है कि ऐसी चीजें लगाई जाएं, जो पूरी सज्जा के साथ तालमेल बनाए रखने के साथ-साथ आपके बजट में भी हों। अगर आपका लिविंग रूम छोटा है और आप बाजार से एक बड़ा सोफा खरीद लाते हैं, तो जाहिर-सी बात है कि आपको चलने में असुविधा होगी। इसलिए छोटे सोफे तैयार किए जाते हैं और उसी आकार में बाकी फर्नीचर भी। फर्नीशिंग की बात करें तो आप जिस रंग के पर्दे लगाते हैं, उसी रंग के बेड कवर, कुशन कवर लगा सकते हैं, जिससे एक तालमेल बना रहता है। पर्दों पर झालरें या लेस लगाना चाहती हैं, तो दीवार के रंग से मेल करके लगाई जा सकती हैं। आपका घर छोटा है तो उसे बड़ा अहसास देने के लिए दीवारों पर वाल पेपर या वाल पेपर पर पेंट करवाया जा सकता है। कोई भी चीज, जो खरीद कर लगाई जाती है, वह जरूरी नहीं कि आपकी सज्जा में फिट बैठे या उसके साथ मेल खाए। अकसर घरों में फ्लोरिंग चिप्स वाली ही होती है, अगर आपके सोफे का रंग नीला है, तो टरक्वाएज टाइलें उसके ऊपर लगवा सकती हैं, उसी तरह की वाल हैंगिग टांग सकती हैं। इस तरह एक संपूर्ण अहसास आ जाता है और प्रयोग करने वाले को किसी तरह की असुविधा नहीं होती।

स्टाइलिश भी अलग भी
घर की सज्जा में कस्टमाइज्ड अवधारणा को अपनाने से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हर ग्राहक अपनी निजी पसंद के अनुसार एक अलग डिजाइन और स्टाइल र्निमित कर सकता है। अंजलि गोयल के अनुसार ‘कस्टमाइज्ड आंतरिक साज-सज्जा विभिन्न डिजाइन तत्त्वों का प्रयोग करते हुए और उन्हें उस जगह का उपयोग करने वाले व्यक्ति की आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाते हुए तैयार की जा सकती है। ऐसा आभास देना बहुत आवश्यक होता है, जिससे उसमें रहने वाले व्यक्ति की निजी छाप उस पर दिखाई दे। इस तरह की डिजाइनिंग से पूरे घर को ही बदला जा सकता है। फर्नीचर इसमें बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप किस तरह से एक मेज या कुर्सी को डिजाइन करते और रखते हैं, उससे पूरी जगह का लुक ही बदल जाता है। न केवल फर्नीचर, बल्कि उसमें लगी दूसरी चीजें, रंग-रोगन या फैब्रिक भी रंग संयोजन और थीम (फ्लोरिंग और सीलिंग का) से मेल खाता होना चाहिए। अगर चमड़े की अपहोल्स्ट्री के साथ उपयोग किया गया ठोस लकड़ी से बना फर्नीचर एक ऊष्मा प्रदान करता है, तो शीशों का उपयोग एक आलीशान अहसास और परिष्कृत रुचि का परिचायक होता है। इस तरह की डिजाइनिंग में विकल्पों की कमी नहीं है, आप चाहें तो बहुत मार्डन लुक दे सकते हैं या पारंपरिक ढंग की रचना कर सकते हैं। इन दिनों फ्यूजन लुक ज्यादा पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह हर कमरे को एक खास अंदाज दिया जा सकता है।’

कम बजट में मनचाही सज्जा
आम लोगों के मन में यही धारणा है कि अपनी पसंद और उपयोगिता के हिसाब से घर सजाने का अर्थ है, बहुत सारे पैसे का निवेश। यह बात कुछ समय पहले तक शायद सही मानी जाती थी, पर आज ऐसा नहीं है। इसकी वजह है बाजार में हर डिजाइन और मैटीरियल में चीजों का उपलब्ध होना। आप सोफा या बेड खरीदना चाहते हैं, तो बहुत महंगी लकड़ी का न लेकर कम दाम की लकड़ी का ले सकते हैं। उसी तरह फैब्रिक या किचन एक्सेसरीज या सजावट की एक्सेसरीज भी इतने प्रकार की आपको मिल जाएंगी कि वे आपके छोटे से फ्लैट या अपार्टमेंट के हिसाब से एकदम उपयुक्त और बजट में होंगी। आवश्यकता है तो सिर्फ बहुत सारी जानकारी और खोज करने की। दूसरे क्या सोचते हैं, इस पर ध्यान न देते हुए अपनी पसंद और आवश्यकताओं पर ध्यान दें और जिएं एक सुविधाजनक जिंदगी। ०

 

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