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जनसत्ता रविवारी सेहत: कोरोनाकाल में गर्भवती महिलाएं, कुछ बातों पर गौर जरूरी

कोरोना महामारी की वजह से उन महिलाओं को खासी परेशानी हो रही है, जो इस दौरान मां बनने जा रही हैं। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि वो कोरोना संक्रमण से कैसे बचें और क्या करें। अगर आपके मन में भी ऐेसे ही कुछ सवाल उठ रहे हैं तो यहां हम उनके समाधान की भरसक कोशिश कर रहे हैं।

Author Published on: May 10, 2020 4:07 AM
जनसत्ता रविवारी सेहत।

घर में साफ-सफाई रखें
हाथ की सफाई के साथ बार-बार इस्तेमाल होने वाली चीजों को स्वच्छ रखें। घर के फर्श, बिजली के स्विचबोर्ड, दरवाजे के हैंडल, मोबाइल फोन और टेबल टॉप को भी हमेशा स्वच्छ बनाए रखें। घर के कामों के लिए उन्हीं घरेलू सहायिकाओं की मदद लें जो घर में ही रहती हैं, बाहर से आने वाली घरेलू सहायिका को मना कर दें।

गैरजरूरी मिलना-जुलना नहीं
गर्भवती होना बीमार होना नहीं है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बेवजह लोगों से मिलना-जुलना न करें। घर से बाहर निकलने से भी बचें।

घबराएं नहीं
अगर आप गर्भावस्था में सर्दी-जुकाम या खांसी से परेशान हैं तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। इस बात को भी याद रखें कि हर खांसी-जुकाम कोविड-19 नहीं है। अगर डॉक्टर आपको कोविड-19 की जांच कराने के लिए कहे तो उससे डरें नहीं और जांच जरूर कराएं।

शिशु पर कोरोना प्रभाव
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अर्चना धवन बजाज का कहना है कि अभी तक जो अध्ययन हुए हैं उसके मुताबिक इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है जिसमें कोरोना विषाणु से ग्रस्त गर्भवती महिला से शिशु में बीमारी पहुंची है। गर्भावस्था के दौरान शिशु के कोविड-19 के संपर्क में आने की संभावना कम होती है। ऐसा कोई भी मामला अब तक सामने नहीं आया है जिसमें कोरोना विषाणु ने गर्भनाल (प्लेसेंटा) को पार कर शिशु को संक्रमित किया हो और शिशु का विकास प्रभावित हुआ हो।

कैसा हो आहार
गर्भवती महिलाएं ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ और विटामिन-सी वाले फल और सब्जियों का सेवन करें। हरी साग-सब्जियां, फलों में नारंगी, संतरा, नींबू और नींबू पानी या ऐसे दूसरे पेय लेते रहें। विटामिन-सी युक्त आहार शरीर में रोग प्रतिरोधकता बढ़ाता है। डॉ अर्चना बताती हैं कि गर्भवती महिलाएं प्राकृतिक रूप में गिलोए और हल्दी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसका काढ़ा भी पी सकती हैं। गर्भ पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है और यह गर्भवती को बीमार होने से बचाता है।

नियमित जांच करवाएं
कोरोना संकट के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपनी नियमित जांच के लिए अस्पताल जाने में डर लग रहा है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि डॉक्टर को दिखाएं या नहीं। डॉ अर्चना कहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को खास परेशानी नहीं है, उन्हें तो हम घर पर रहने की सलाह दे रहे हैं लेकिन उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी) यानी जो महिलाएं व माएं मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एनीमिया, दिल की बीमारी से पीड़ित हैं या लंबे इलाज के बाद मां बन रही हैं उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए। अगर वो जांच के लिए डॉक्टर के पास नहीं जाती हैं तो यह मां और बच्चे की जान को जोखिम में डालने जैसा है, गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण या अंतिम चरण की महिलाएं अपनी नियमित जांच के लिए अस्पताल व डॉक्टर के पास जा सकती हैं। हालांकि थोड़ी बहुत परेशानी हो तो वो फोन पर भी डॉक्टर से बातचीत की जा सकती है।

प्रसव बाद भी एहतियात
इन दिनों अस्पतालों में आगंतुकों की सख्त मनाही है और वहां की साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी अस्पताल की ही होती है। लेकिन जब आप शिशु को लेकर अपने घर आ जाती हैं तो खुद को घर में क्वारंटीन कर लें यानी अपना और शिशु का विशेष ध्यान रखते हुए किसी भी बाहरी को घर में आने-जाने न दें। परिवार के दूसरे लोग घर में साफ-सफाई के नियमों का कड़ाई से पालन करें। घर के बाहर के लोगों को शिशु को पकड़ने न दें, खुद या घर में रहने वाले लोग ही शिशु को पकड़े। अगर आप किसी के पास बैठ रहे हैं तो कोशिश करें कि दोनों के बीच कम से कम दो मीटर की दूरी हो। छींकते या खांसते समय अपनी कोहनी की तरफ मुंह कर लें, मुंह पर मास्क पहन कर रखें और हाथों को लगातार धोते रहें।

शिशु को स्तनपान जरूर कराएं
नवजात व शिशुओं के लिए उनकी मां का दूध ही सबसे पौष्टिक और रोगों से लड़ने की शक्ति देने वाला आहार है। स्तनपान से शिशुओं में किसी भी बीमारी के संक्रमण का खतरा बहुत कम होता है, इसलिए बच्चे को स्तनपान जरूर कराएं। मां को भी चाहिए कि वह पौष्टिक भोजन और तरल पदार्थों को लेने के साथ विटामिन-सी युक्त आहार को नियमित रूप से लें।

जरूरी सावधानियां
’घर में ही रहें। ’सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें। ’हमेशा मास्क पहनें। ’ हर दो घंटे के अंतराल पर 20 सेंकेंड तक रगड़-रगड़ कर हाथ धोएं। ’ बाहर का खाना न खाएं। ’बाहर से आने वाले हर सामान को पहले स्वच्छ करें फिर इस्तेमाल में लाएं। ’फल और सब्जियों को भी स्वच्छ करने के बाद ही इस्तेमाल करें। इसके लिए फल और सब्जियों को पानी में थोड़ी देर डुबा कर रखें, उसके बाद उसे पकाएं और खाएं।

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