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कहानी: नन्हा सांता क्लॉज

जॉन अंकल को पीयूष अक्सर उदास बैठे देखा करता था। आॅफिस से आने के बाद, अपने घर के बड़े से बगीचे में वह आरामकुर्सी डाले चुपचाप बैठे रहते थे। लोग समझते थे कि वह अपने बगीचे में झूमते-लहराते फूलों को निहारते रहते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

सुमन बाजपेयी

जॉन अंकल को पीयूष अक्सर उदास बैठे देखा करता था। आॅफिस से आने के बाद, अपने घर के बड़े से बगीचे में वह आरामकुर्सी डाले चुपचाप बैठे रहते थे। लोग समझते थे कि वह अपने बगीचे में झूमते-लहराते फूलों को निहारते रहते हैं। लेकिन पीयूष को पता था कि वह फूलों के बीच बैठे हुए भी किसी सोच में डूबे रहते हैं। उदासी थी जो उनके चेहरे पर अक्सर दिखाई देती थी और पीयूष को वह न जाने कैसे नजर आ जाती थी। हालांकि उन्हें बागवानी का बेहद शौक था और जब भी वक्त मिलता वह अपने फूल-पौधों की देखभाल ऐसे प्यार से करते मानो उनके बच्चे हों। उनके घर में कोई बच्चा नहीं था। बस वे दो ही लोग थे। एक जॉन अंकल और मारिया आंटी, जो हमेशा अपने गले में लटके क्रॉस को चूमती नजर आतीं। उनका अधिकांश समय ईश्वर की प्रार्थना में ही गुजरता था। उनके घर का काम करने वाली मार्था बाजार से सारा सामान लाती। सारी खबरें भी वही उन्हें ही देती, वरना वे दोनों तो किसी से मिलते-जुलते ही नहीं थे।

पीयूष जब भी उनके घर जाता, वे दोनों खुश हो जाते। बगीचे के फूलों और अपनी आरामकुर्सी को छोड़ जॉन अंकल उससे बातें करने घर के अंदर आ जाते। वे लोग कभी कैरम खेलते, तो कभी लूडो। मारिया आंटी उसे केक बनाकर खिलातीं। उस पल वह बार-बार अपने क्रॉस तक को चूमना भूल जातीं। अंकल-आंटी दोनों बहुत ही तन्मयता से उसकी छोटी-छोटी बातों को सुनते थे। उसके मम्मी-पापा तो इतने व्यस्त रहते थे कि उसके लिए उनके पास समय तक नहीं था। पीयूष जो मांगता उसे फौरन वे दिला देते थे, इसलिए कभी इस बात को उन्होंने समझा ही नहीं कि उसे उनका समय भी चाहिए। वह अपने मम्मी-पापा के साथ अपनी बातें शेयर करना चाहता है। उसके कमरे को भी उन्होंने खास ढंग से डिजाइन करवाया था और सारी सुविधाएं उसके लिए जुटा रखी थीं। उसकी देखभाल करने के लिए नौकर थे और वह जब चाहे तब ऑर्डर करके अपने लिए कहीं से भी कुछ भी मंगा सकता था। लेकिन अपने आलीशान घर और लेटेस्ट गैजेट्स के बीच जब वह खुद को अकेला पाता तो पड़ोस में रहने वाले जॉन अंकल के घर दौड़ा चला आता, जहां उसे ढेर सारा प्यार मिलता और वे उसके साथ खेलते तो वह खुश हो जाता। उसे एक बात बहुत हैरान करती थी कि ईसाई धर्म के होने के बावजूद वे कभी क्रिसमस नहीं मनाते थे। न कभी क्रिसमस ट्री लाते थे, न ही घर को सजाते थे, जबकि उसके घर में उसके मम्मी-पापा ईसाई न होने के बावजूद क्रिसमस पार्टी देते थे और अपने सारे दोस्तों को बुला मौज-मस्ती करते थे। वे कहते थे इस बहाने दोस्तो के सामने अपनी शान दिखा सकते हैं और उनका सोशल स्टेट्स इस तरह और बढ़ जाता है।

दस साल का पीयूष अब बहुत सारी बातें समझने लगा था। एक दिन मारिया आंटी ने जब अपने बेडरूम से उसे एक किताब उठाकर लाने को कहा था तो उसने वहां एक बच्चे की तस्वीर टंगी देखी थी। उसने जब पूछा था कि वे कौन हैं तो आंटी बात टाल गई थीं और उसे अपने हाथों से पुडिंग खिलाने में उलझा लिया था। मम्मी ने कहा था एक बार कि उनके कोई बच्चा नहीं है तो वह किससे खेलने उनके घर जाता है। क्रिसमस आने ही वाला था और वह चाहता था कि इस त्योहार को अंकल-आंटी के साथ मनाए। मम्मी-पापा उसे हर साल सांता क्लॉज बना देते थे और वह घूम-घूम कर अपने दोस्तो को गिफ्ट देता था। वह समझ नहीं सका था कि ऐसा वे अपना रुतबा जमाने के लिए करते हैं न कि उसकी खुशी के लिए। अब तो उसे यह भी पता था कि मम्मी-पापा जो उपहार उसके तकिए के नीचे रखा करते थे, वह सांता क्लॉज नहीं लाता था। आंटी, इस साल मैं आपके साथ क्रिसमस मनाना चाहता हूं। मम्मी-पापा गोवा जा रहे हैं। कैरम खेलते-खेलते अचानक पीयूष ने कहा। मारिया आंटी किचन से बाहर आते हुए बोलीं, बेटा, हम क्रिसमस सेलीब्रेट नहीं करते।

पर क्यों? आप तो क्रिश्चियन हैं। यह आपका सबसे बड़ा त्योहार होता है। मैंने किताबों में पढ़ा है। ‘माई चाइल्ड, जब से हमारा बेटा गॉड के पास गया है, तब से मारिया ने इसे मनाना छोड़ दिया है। वह घर में उस दिन लाइट्स भी जलाना पसंद नहीं करती। हमारा बेटा, हमारा नन्हा सांता क्लॉज एक फरिश्ते की तरह था और इस त्योहार पर खूब सुंदर सांता बनता था। तभी से हम चर्च में वह दिन बिताते हैं और यीशू से प्रार्थना करते हैं कि वे किसी से उसका बच्चा न छीनें।’ जॉन अंकल ने प्यार से उसे थपथपाते हुए कहा।अंकल, मैं भी आपका बेटा हूं, मैं भी तो आपका सांता हूं, मेरे साथ क्रिसमस नहीं मनाएंगे? मारिया ने कुछ कहना चाहा तो जॉन अंकल ने उसे रोक दिया। वह पीयूष का दिल नहीं तोड़ना चाहते थे। क्रिसमस ट्री को रंग-बिरंगे बल्बों, चमकीले कागजों और उपहारों से सजा वह जब सफेद दाढ़ी लगाए और सांता क्लॉज लाल ड्रेस पहने उनके घर पहुंचा तो उन्हें लगा कि उनका बेटा जैसे वापस आ गया है। मारिया ने उसे सीने से चिपटा लिया।आज तो हम तुम्हें उपहार देंगे। अंकल ने केक का बड़ा सा टुकड़ा उसके मुंह में डालते हुए एक पैकेट थमा दिया। अंकल-आंटी ही नहीं आज सांता क्लॉज बना पीयूष भी बहुत खुश था। उसने उनके साथ मिलकर पूरे घर में कैंडल लगा दीं और हर तरफ रोशनी कर दी।

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