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कहानी : क्रिसमस का उपहार

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक बूढ़ी औरत मारिया अपने दस वर्ष के पोते जॉर्ज के साथ रहती थी। उसने अपने बाग में ढेर सारे फूल जैसे चंपा, जूही, गुलाब,गेंदा, आईरिस, गुलमोहर और आर्किड लगा रखे थे और एक छोटा-सा तालाब भी बनाया था, जिसमें हल्के लाल और सफेद रंग के कमल के फूल खिले रहते थे..

Author नई दिल्ली | December 27, 2015 12:16 AM

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक बूढ़ी औरत मारिया अपने दस वर्ष के पोते जॉर्ज के साथ रहती थी। उसने अपने बाग में ढेर सारे फूल जैसे चंपा, जूही, गुलाब,गेंदा, आईरिस, गुलमोहर और आर्किड लगा रखे थे और एक छोटा-सा तालाब भी बनाया था, जिसमें हल्के लाल और सफेद रंग के कमल के फूल खिले रहते थे।

वह दिन भर बहुत मेहनत से बगीचे की देखभाल करती और सभी फूलों को अपने बच्चों की तरह प्यार करती, जिसकी वजह से उसका बगीचा इन खूबसूरत फूलों से महका करता था। जॉर्ज को भी अपनी दादी की तरह फूलों से बहुत प्यार था और वह घंटों जाकर फूलों से ढेर सारी बातें करता।

जार्ज के मम्मी-पापा बचपन में ही एक कार एक्सीडेंट में गुजर गए थे, इसलिए उसे जब भी उनकी याद आती तो वह बगीचे में जाकर फूलों को प्यार करने लगता और उनके बीच रह कर अपना दुख भूल जाता।
जॉर्ज और उसकी दादी बहुत साधारण तरह से अपना जीवन जी रहे थे, क्योंकि उनके पास आय का कोई साधन नहीं था, सिवा उन बगीचे के फूलों के, जिन्हें वे दोनों रोज सुबह चर्च के पास जाकर बेचा करते थे।
इस बार भी जब सर्दी नजदीक आने लगी तो जॉर्ज ने मरिया से कहा- ‘दादी, मेरा कोट जगह-जगह से फट गया है और मुझे उसमें बहुत ठंड लगती है।’ मारिया की आंखों में आंसू छलक उठे और उसने जॉर्ज से छिप कर अपनी आखें पोंछ ली।

पर जॉर्ज ने दादी को रोते हुए देख लिया था, इसलिए उसने आगे कुछ नहीं कहा, वह जानता था कि दादी के पास कोट खरीदने के पैसे नहीं हैं। इसलिए जॉर्ज चुपचाप जाकर दादी की कमर में हाथ डाल कर लेट गया और नए कोट के बारे में सोचता हुआ न जाने कब सो गया।

थोड़े दिनों बाद सर्दी आ गई और फिर एक दिन जॉर्ज ने देखा कि सारा शहर बहुत खूबसूरत लग रहा है। दुकानों में जगह-जगह झालरें लगी हुई थीं और रंग-बिरंगे रंगीन कागजों के सितारे टंगे हुए थे। केक और पेस्ट्री की खुशबू से सारा बाजार महक रहा था। जॉर्ज रोज की तरह आज फिर उस दुकान के आगे रुक गया, जहां चार दिन पहले एक बहुत खूबसूरत नीले रंग का कोट टंगा था, जो बिलकुल जैसे उसकी ही नाप का बना था। उसके कदम जैसे उस दुकान से आगे नहीं बढ़ रहे थे। दादी ने जब उसका हाथ पकड़ा तो वह उनसे नजरें चुरा कर इधर-उधर देखने लगा। दादी सब समझ गई थी, पर इतना महंगा कोट खरीदने का वह सोच भी नहीं सकती थी, इसलिए उसने आगे बढ़ने के लिए जॉर्ज का हाथ धीमे से अपनी ओर खींचा।

तभी सामने से एक लड़का तेज बाइक चलाते हुए आकर जॉर्ज से टकराया और उसे गिराते हुए खुद भी गिर गया। उस लड़के को तो कुछ नहीं हुआ और वह तुरंत अपनी बाइक उठा कर खड़ा हो गया, पर पथरीली जमीन पर गिरने से जॉर्ज का माथा और हाथ छिल गया और खून बहने लगा। दादी खून देख कर बहुत घबरा गई और रोने लगी। तब तक वहां पर कई लोग इकट्ठा हो गए और उस बाइक वाले लड़के को भला-बुरा कहने लगे।
तब तक भीड़ को चीरता हुआ एक सिपाही भी आ गया और बाइक वाले लड़के पर चिल्लाता हुआ उसे अपने साथ ले जाने लगा। उस लड़के ने जॉर्ज को पलट कर देखा। उस लड़के की आंखों में आंसू छलछला रहे थे और वह बहुत दुखी लग रहा था। यह देख कर जॉर्ज अपनी दादी के हाथ का सहारा लेकर उठा और सिपाही से बोला- ‘उसे मत ले जाइए। उसकी कोई गलती नहीं है। मैं ही उसके सामने आ गया था।’

यह सुनते ही सिपाही ने तुरंत उस लड़के को छोड़ दिया और जॉर्ज के पास आकर गुस्से से बोला- ‘तुम्हारे कारण बेचारा यह लड़का इतने लोगों से डांट सुन रहा है। आइंदा संभल कर चलना सड़क पर।’ जॉर्ज ने यह सुन कर सिर झुका कर हामी भरी और दादी का हाथ पकड़ कर चर्च के सामने जाकर फूल बेचने के लिए बैठ गया। उसकी दादी बार-बार अपने रूमाल से उसका खून पोंछ रही थी। बाइक वाला लड़का दूर खड़ा सब देख रहा था। थोड़ी देर बाद जॉर्ज और उसकी दादी अपने घर की ओर चल दिए। जॉर्ज का पुराना कोट सड़क पर रगड़ खाने से और फट गया था, पर उसने दादी से कुछ नहीं कहा।

क्रिसमस के दिन दादी ने रोज की तरह ताजे फूल एक टोकरी में रखे और जॉर्ज से चर्च चलने के लिए कहा। जॉर्ज ने जब सर्दी में कंपकंपाते हुए अपना बदरंग और फटा हुआ कोट पहना, तो दादी की आंखों से आंसू निकल कर उनके झुर्रीदार चेहरे पर गिर पड़े। पर जॉर्ज ने मुस्कुराते हुए दादी का हाथ कस कर पकड़ लिया जैसे कुछ हुआ ही न हो।

आज क्रिसमस के कारण बाजार में बहुत ज्यादा चहल-पहल थी। चर्च की खूबसूरती देखते ही बनती थी। सभी बच्चे रंग-बिरंगी नई पोशाकों में इधर-उधर चहकते हुए घूम रहे थे। तभी वहां पर बच्चों का सबसे प्यारा दोस्त सांता क्लॉज अपने बड़े से लाल थैले के साथ आया। बच्चे उसे देख कर खुशी से चहक उठे और उसकी तरफ दौड़ पड़े। सांता क्लॉज सभी बच्चों को प्यार कर रहा था और उन्हें टॉफियां दे रहा था। थोड़ी देर में सभी बच्चे खुशी-खुशी वहां से सांता को बाय करके चले गए। सिर्फ जॉर्ज अपनी दादी के साथ बैठा हुआ सांता को टुकुर-टुकुर देख रहा था। सांता धीरे-धीरे चलता हुआ जॉर्ज के सामने जाकर खड़ा हो गया। जॉर्ज ने उसे देख कर मुस्कुरा दिया और एक लाल रंग का सुंदर गुलाब सांता की तरफ बढ़ा दिया।

सांता बड़े प्यार से बोला- ‘पहली बार किसी बच्चे ने सांता को उपहार दिया।’ और यह कहते हुए सांता ने एक पैकेट जॉर्ज की तरफ बढ़ाया और उसके गालों को चूम कर तेजी से वहां से चला गया। जॉर्ज ने वह पैकेट खोला तो उसकी आंखें आश्चर्य से फैल गर्इं।

वह लगातार उस पैकेट को देखता रहा। पैकेट के अंदर से वही नीला कोट झांक रहा था, जो वह सड़क पर खड़ा होकर देखता था। खुशी के मारे वह अपनी दादी से लिपट गया और जोर-जोर से रोने लगा। उसकी दादी भी बार-बार अपने आंसू पोंछते हुए उसे चुप कराने लगी। कुछ दूरी पर बाइक वाला लड़का सांता की ड्रेस पहने हुए उन दोनों को एकटक देख रहा था, जो उसी कोट की दुकान का मालिक था और रोज जॉर्ज को उस कोट को ताकते हुए देखा करता था।

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