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सेहत: भगंदर (एनल फिस्टुला)- निवारण दर्द से छुटकारा मर्ज से

स्वास्थ्य जगत के लिए लंबे समय तक यह बड़ी चुनौती रही कि इस मर्ज के आसान इलाज के लिए क्या करें। दुर्भाग्य से यह एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में कोई खास दिलचस्पी नहीं देखी जाती है।

Jansatta Healthखतरनाक भगंदर (Anal Fistula) मर्ज से आसानी से छुटकारा दिलाने वाले डॉ. पंकज गर्ग।

बीमारियों को लेकर पूरी दुनिया में हर लिहाज से जागरूकता बढ़ी है। लोग जहां अपनी सेहत को लेकर गंभीर होते जा रहे हैं, वहीं कई मुश्किल बीमारियों के अब आसान इलाज उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य जगत की नई खोज और तकनीक ने मनुष्य के जीवन को काफी खुशहाल बना दिया है। बावजूद इन स्थितियों के अब भी ऐसे कई रोग हैं, जिनको लेकर लोग खुलकर बात नहीं करना चाहते हैं। नतीजतन ऐसे रोगियों की स्थिति इलाज के अभाव में दिन-प्रतिदिन बिगड़ती चली जाती है। ऐसा ही एक रोग है भगंदर (एनल फिस्टुला)।

तकलीफदेह बीमारी
भगंदर एक ऐसा रोग है, जिसके इलाज में लापरवाही बरतने पर कालांतर में कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। जैसे गुदा (एनस) में फोड़ा और सूजन, आंतों में विकार या आंत में कैंसर और मलाशय (रेक्टम) का तपेदिक आदि। इन सबमें मरीज को दर्द होता है, जो लगातार रह सकता है। बैठने-उठने में भी परेशानी होती है। मरीज को गुदा के आसपास खुजली हो सकती है। इसके अलावा त्वचा लाल हो जाती है, सूजन होता है और वह फट सकता है और वहां से मवाद या खून रिसने लगता है।

इलाज का रोना
फिस्टुला की परंपरागत सर्जरी को फिस्टुलेक्टॅमी कहा जाता है। सर्जन, सर्जर्री के जरिये भीतरी मार्ग से लेकर बाहरी मार्ग तक की संपूर्ण फिस्टुला को निकाल देते हैं। इसमें आम तौर पर टांके नहीं लगाए जाते हैं और जख्म को धीरे-धीरे और प्राकृतिक तरीके से भरने दिया जाता है।

इस उपचार विधि में दर्द होता है और उपचार के असफल होने की भी आशंका रहती है। परंपरागत उपचार विधि में मल-त्याग में दिक्कत होती है। समझा जा सकता है यह रोग एक तरफ जहां खासा तकलीफदेह है, वहीं इस बात की भी कोई गारंटी नहीं कि इलाज के बाद यह पक्के तौर पर ठीक हो ही जाएगा।

कामयाबी का डॉक्टर
स्वास्थ्य जगत के लिए लंबे समय तक यह बड़ी चुनौती रही कि वह इस मर्ज के आसान इलाज के लिए क्या करें। दुर्भाग्य से यह एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में स्वास्थ्य जगत में भी कोई खास दिलचस्पी नहीं देखी जाती है। हालत यह रही है कि दस से ऊपर बार आपरेशन कराने के बाद भी मरीज इस मर्ज की पीड़ा से मुक्त नहीं हो पाते हैं। ऐसे में एक भारतीय चिकित्सक ने इस बीमारी से जुड़ी मुश्किलों को समझने और उसका वैज्ञानिक हल निकालने की ठानी।

दरअसल, हम बात कर रहे हैं वरिष्ठ कोलो रेक्टल व लैप्रोस्कापिक सर्जन डॉ. पंकज गर्ग की। एम्स, दिल्ली से एमबीबीएस और एमएस की पढ़ाई करने वाले डॉ. गर्ग को आरंभ से यह लगता था कि भगंदर एक ऐसा रोग है, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। लिहाजा, उन्होंने भगंदर के रोगियों के लिए आसान और स्थायी इलाज करने के लिए कार्य करना शुरू किया।

आसान और पुख्ता इलाज
एनल सर्जरी के क्षेत्र में दुनिया के चोटी के चिकित्सकों में शुमार डॉ. पंकज गर्ग ने भगंदर के पांच से ज्यादा शल्य विधि से इलाज का तरीका ढूंढ निकाला है। तारीफ की बात यह कि उन्होंने यह सब बिना किसी सरकारी सहायता के किया है।

उनके द्वारा ईजाद विधियों में आपरेशन करने पर बहुत कम चीरा लगाना पड़ता है और दर्द भी बहुत कम होता है। इस विधि से आपरेशन के बाद लंबे समय की परेशानी से भी मरीजों को मुक्ति मिल जाती है।

अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति
डॉ. गर्ग की इस विधि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी स्वीकृति मिली है। उनके आपरेशन की सफलता दर 95-97 फीसद तक है। इस बारे में उनके शोधपूर्ण आलेख दुनिया के कई सम्मानित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। डॉ. गर्ग के पास एनल फिस्टला व एनल फिशर का इलाज कराने के लिए आज 40 से ज्यादा देशों से मरीज पहुंच रहे हैं।

पंचकूला स्थित गर्ग फिस्टुला रिसर्च इंस्टीट्यूट आज इस रोग के इलाज का एक ऐसा ठिकाना है, जहां से इस रोग के इलाज से निराश हजारों लोगों को ऐसी खुशी मिली है, जिससे उनकी जिंदगी फिर से सामान्य और खुशहाल हो गई है। दिलचस्प यह कि उनसे इलाज कराने वालों में देश-विदेश के सामान्य लोगों के अलावा कई राष्ट्राध्यक्ष और राजनेता और राजनयिक भी शामिल हैं।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें। )