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जानकारी : सौ साल से रोशन बल्ब

बिजली के बल्ब का इस्तेमाल सारी दुनिया में होता है, लेकिन कोई भी कंपनी इनके फ्यूज होने की गारंटी नहीं लेती। वैसे एक बल्ब की औसत उम्र साढ़े सात सौ से एक हजार घंटे तक रोशनी देने की होती है..

Author नई दिल्ली | December 27, 2015 12:06 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।

बिजली के बल्ब का इस्तेमाल सारी दुनिया में होता है, लेकिन कोई भी कंपनी इनके फ्यूज होने की गारंटी नहीं लेती। वैसे एक बल्ब की औसत उम्र साढ़े सात सौ से एक हजार घंटे तक रोशनी देने की होती है। हैवी ड्यूटी बल्ब एक हजार घंटे तक रोशनी दे सकते हैं। मगर अमेरिका के कौलिफोर्निया में एक बल्ब एक सौ चौदह साल से लगातार रोशनी दे रहा है। लिवरमोर शहर के फायर स्टेशन में लगा यह बल्ब जून, 1901 में लगाया गया था। फायर स्टेशन के कर्मचारियों के अनुसार तब से अब तक इस बल्ब को दो बार बंद किया गया है। पहली बार 1976 में, जब इसे दूसरे फायर स्टेशन में लगाया गया था। दूसरी बार 2013 में, जब इसे 93.4 घंटे बंद रखा गया। इतने लंबे समय तक इसके जलते रहने का कारण अमेरिकी वैज्ञानिक भी नहीं ढूंढ़ पाए हैं। लोग यहां आकर कहते हैं कि फायर स्टेशन के कर्मचारियों को यह बल्ब कभी नहीं हटाना चाहिए।

एनापोलिस नेवल एकेडमी के भौतिक विज्ञानी देबोर काट्ज ने इस विषय पर गहरी रिसर्च की और पाया कि इसका कार्बन फिलामेंट अच्छी गुणवत्ता का और आज के बल्ब की तुलना में आठ गुना पतला है। साथ ही इसमें मौजूद फिलामेंट खुद सेमी कंडक्टर है, जो आमतौर पर कार्बन से बनता है।

ब्रिटेन में 230 वोल्ट और 55 वॉट का डीसी ओसराम बल्ब पिछले 103 साल से रोशनी दे रहा है। उसने एक हजार घंटे रोशनी देने के किसी बल्ब की क्षमता को पीछे छोड़ दिया है। टाइटेनिक जहाज डूबने के एक महीने बाद 1912 में यह बल्ब बना था। रोजर डॉयबॉल (74) के अनुसार सफोल्क के लोवस्टोफ स्थित उनके घर के बरामदे में यह बल्ब अभी तक रोशनी दे रहा है। जब पैंतालीस साल पहले वे इस मकान में आए थे तब भी यह वहां लगा था। डॉयबॉल उत्तरी लंदन में वेंबले में बने इस बल्ब से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसके सीरियल नंबर और अन्य ब्योरे के साथ कंपनी ओसराम जीइसी के लंदन स्थित मुख्यालय को लिखा। जवाब में कंपनी ने 1968 में बताया कि इस बल्ब का निर्माण जुलाई 1912 में हुआ था। उन्हें उम्मीद है कि यह बल्ब ऐसे ही जलता रहेगा।

कोव्स में मिसेज रिचर्डसन के मकान में एक बल्ब पिछले सतहत्तर सालों से रोशनी दे रहा है। स्वान एडीसन नामक इस चालीस वॉट के बल्ब को 1938 में रेडिहिल से खरीदा गया था। इस बल्ब का कांच हाथों से मोल्ड किया गया है और इसमें कार्बन फिलामेंट है।

ब्रिटेन ने एक ऐसा बल्ब बनाया है, जो पचास साल तक चल सकता है। साठ वॉट का यह बल्ब फास्टिड ग्लास का बना है और दो इसमें दो लाल डायोड लगे हैं। एक एलइडी एक लाख घंटे चल सकता है। यह अनोखा बल्ब घंटों जलने के बावजूद गरम नहीं होता और इसकी रोशनी को भी कम-ज्यादा किया जा सकता है। फिलामेंट की तरह लाइट एमिटिंग डायोड (एलइडी) का इस्तेमाल कर डच कंपनी जिलिटस ने बीस साल चलने वाला बल्ब डिजाइन किया है।

अमेरिका के कैलिफोर्निया के लास एंजिल्स में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली एक कंपनी ने एक ऐसा बल्ब बनाया है, जिसे अगर रोजाना तीन घंटे तक जलाया जाए तो वह अठारह वर्षों तक रोशनी दे सकता है। इसमें फिलामेंट की जगह चुंबकीय क्वाइल लगाई गई है, इसके फ्यूज होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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