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गीत : सच्ची दोस्ती

एक दूजे के लिए समर्पण, अंतर्मन आनंदित करता। त्याग और अपनेपन से ही, उल्लासों का झरना झरता।

Author नई दिल्ली | December 27, 2015 12:04 AM

वही दोस्ती सच्ची होती,
जिसमें स्वार्थ नहीं होता है।

एक दूजे के लिए समर्पण,
अंतर्मन आनंदित करता।
त्याग और अपनेपन से ही,
उल्लासों का झरना झरता।

मिलता उसको फल वैसा ही,
जैसा बीज स्वयं बोता है।
वही दोस्ती सच्ची होती,
जिसमें स्वार्थ नहीं होता है।

जाति धर्म और ऊंच नीच की,
खड़ी नहीं होतीं दीवारें।
भय की भंवर नहीं मिलती तब,
संग होतीं सुदृढ़ पतवारें।

कृष्ण सरीखे मित्र मिलें जब,
कोई सुदामा ना रोता है।
वही दोस्ती सच्ची होती,
जिसमें स्वार्थ नहीं होता है।

दोस्त हमारा इतना प्यारा

रोज सुबह हम बस्ता लेकर,
संग संग विद्यालय जाते।
दोपहरी का भोजन भी हम,
साथ साथ मिल करके खाते।
देख मित्रता हम दोनों की,
खुश होता विद्यालय सारा।
दोस्त हमारा इतना प्यारा।

मन की खट्टी मीठी बातें,
एक दूसरे से कह लेते।
आएं बाधाएं कैसी भी,
हम दोनों मिल कर सह लेते।

ऐसी अनुपम देख दोस्ती,
हर संकट भी हमसे हारा।
दोस्त हमारा इतना प्यारा।

खेतों की पगडंडी पर हम,
खूब दूर तक दौड़ लगाते।
रिमझिम बारिश में हम दोनों,
कागज की नावें तैराते।

जब मुख पर मुस्कान बिखरती,
मुस्काता परिवार हमारा।
दोस्त हमारा इतना प्यारा।

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