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योग दर्शन: रूस में योग के बढ़ते कदम

रशियन अकादमी ऑफ साइंस मॉस्को द्वारा आयोजित योग विषय को लेकर मेरे वक्तव्य के दौरान मैंने अनुभव किया कि कठोर स्वभाव का समझे जाने वाला और अपने चारों और बड़ी वैचारिक दीवार रखने वाला रूस आज बिल्कुल बदल चुका है। योग के प्रति जनसामान्य में ही नहीं बल्कि वहां के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी अपने जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है।

Author March 24, 2019 1:54 AM
प्रतीकात्मक फोटो

डॉ. वरुण वीर

रशियन अकादमी ऑफ साइंस मॉस्को द्वारा आयोजित योग विषय को लेकर मेरे वक्तव्य के दौरान मैंने अनुभव किया कि कठोर स्वभाव का समझे जाने वाला और अपने चारों और बड़ी वैचारिक दीवार रखने वाला रूस आज बिल्कुल बदल चुका है। योग के प्रति जनसामान्य में ही नहीं बल्कि वहां के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी अपने जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है। मॉस्को शहर में लगभग 70 योग केंद्र कार्यरत हैं, जो योग संस्कृति के प्रचार के साथ-साथ योग के व्यवसाय को फैलाकर हजारों नागरिकों को रोजगार भी उपलब्ध करवा रहे हैं। मैंने जो भी रूस के विषय में सुना या समझा था, आज मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि अमेरिका और यूरोप के देशों की तरह रूसी भी खुले विचारों को अपने जीवन में स्थान देने से हिचक और झिझक नहीं रहे हैं। एक समय में गरीबी व अनेक बंधनों में घिरा रूस आज स्वतंत्र विचारों के साथ विश्व में सामरिक ही नहीं व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भविष्य में विश्व का नेतृत्व करने का साहस लिए हुए दिखता है। रूस ने योग को अपनाकर विश्व में अपनी छवि को बड़ा ही सकारात्मक ढंग से संतुलित बनाया है।

रेड स्क्वायर के सामने खड़े होकर यदि चारों ओर आप अपनी दृष्टि घुमाएं तो एक ओर कई सौ वर्ष पुराना चर्च, जारशाही का राजमहल, उसी के सामने अत्यंत महंगे आधुनिक पांच सितारा होटल, विश्व के सभी बड़े ब्रांड के अत्याधुनिक महंगे शोरूम एवं मॉल दिखेंगे। यह सब नजारा अपने आप में अद्भुत होने के साथ-साथ अविश्वसनीय लगता रहा था। साथ ही साथ वहां अनेक शाकाहारी रेस्तरां देखने को मिले। जो देश, शराब और मांस के बिना अपना भोजन अधूरा मानता था, आज योग के प्रभाव में शाकाहारी होता दिखाई दे रहा है। दिल्ली जैसे शहर में इतने सारे योग केंद्र नहीं मिलेंगे जितने सुव्यवस्थित योग केंद्र मॉस्को में देखने को मिल जाएंगे। हम भारतीयों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए कि योग के कारण हमारी सकारात्मक विनम्र तथा स्वतंत्र विचारों वाली पहचान विश्व में स्थापित हो हुई है।

योग की विभिन्न शैलियां और उनकी उपयोगिता स्पष्ट रूप से मॉस्को में देखने को मिली। योग के विषय को लेकर अनेक प्रकार के सेमिनार तथा समय-समय पर समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में योग का छाया रहना आम बात है। मेरे लिए आश्चर्यजनक बात यह रही कि अकादमिक स्तर पर योग को सुनने व अपनाने वाले बुद्धिजीवियों में भी उत्साह था। केवल व्यायाम के स्तर पर नहीं बल्कि योग एक विश्वास है जो प्राण, मन तथा आत्मा के स्तर पर कैसे कार्य करता है यह समझने में भी वहां के बुद्धिजीवी वर्ग ने जिज्ञासा दिखाई तथा मुझे एक और व्याख्यान के लिए आमंत्रित कर लिया गया। रूस का यह खुलापन आने वाले समय में संपूर्ण विश्व को अपनी और आकर्षित करेगा। विश्व की महाशक्ति रूस, यूरोप से लेकर एशिया तक होने के कारण लगभग समूचे विश्व से जुड़ा हुआ है। मॉस्को में लगभग 70 से अधिक स्थानों पर योग की नियमित कक्षाएं होती हैं, जिसमें हजारों लोग प्रतिदिन योगासन करते हैं। मॉस्को का वातावरण ठंडा होने के कारण हॉट यानी गर्म योग बड़ा प्रसिद्ध है। इस योग की कक्षा 38 डिग्री सेल्सियस पर करवाई जाती है, जिससे अधिक से अधिक पसीना निकले और शरीर में लचीलापन आए। वहीं पर कुल योग, जगन्नाथ, मॉस्को योग सेंटर, शिवानंद योग, पॉवर योग इत्यादि के साथ-साथ इस्कॉन हरे कृष्णा-हरे रामा सेंटर के लोग जगह-जगह दिख जाते हैं जो कि सारे रूसी ही हैं। रूस ने शरीर के स्तर पर विश्व की अन्य धाराओं को अपनाने में कोई संकोच नहीं किया है। यदि शरीर के स्तर से ऊपर उठकर आध्यात्मिकता के स्तर पर रूस योग को अपनाता है तो सकारात्मक दृष्टि से बहुत बड़े परिवर्तन की आशा की जा सकती है। यह आध्यात्मिकता चाहे चर्च के आधार पर ही क्यों न हो। सामरिक स्तर से मजबूत रूस आर्थिक स्तर पर भी मजबूत हो रहा है। यदि इसमें आध्यात्मिक स्तर को भी जोड़ दिया जाए तो यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भविष्य में रूस विश्व का नेतृत्व करने में अग्रणी होगा।
भारत को छोड़कर जिसने भी योग और योग बुद्धि को अपनाया उस समाज व राष्टÑ का उत्थान ही हुआ है। आज वर्तमान में यह दुर्भाग्य है हमारे भारतवर्ष का कि योग हमारी देन तो है लेकिन योग के किसी भी नियम या अंग में हम पूर्णता से लिप्त नहीं हो पा रहे हैं।

सत्तर के दशक में रूस साम्यवादी विचारधारा से सराबोर था। एक प्रोफेसर ने बताया कि जब रूस में साम्यवाद था तब भी उन्होंने दो साल तक चुपचाप योग किया था। हालांकि उस समय योग या योग जैसा कुछ भी अन्य करना संभव नहीं था। ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि योग के कारण रूस में बड़ा परिवर्तन आया है, लेकिन योग को खुलकर अपनाने में रूस की छवि में बड़ा परिवर्तन जरूर आया है। मुख्य रूप से वहां की नौजवान पीढ़ी योग के प्रति आकर्षित है तथा नियमित रूप से अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगासन को रोजाना और साप्ताहिक स्तर पर अपना रही है। योग शिक्षक बनाने के अनेक प्रशिक्षण समय-समय पर अनेक जगह देखने को मिलते हैं। वास्तव में जो भी योग विद्या को अपना लेता है वह लाभान्वित होता ही है।

मन को नियंत्रित करने के कुछ प्राणायाम व ध्यान की क्रिया साइंस अकादमी के प्रोफेसर के साथ करने में मेरा बड़ा ही अच्छा अनुभव रहा। अनुलोम-विलोम, प्राणायाम एवं कुंभक प्राणायाम जो कि मन को तुरंत शांत व स्थिर करने का काम करते हैं। उसके पश्चात ध्यान की क्रिया में कमर को सीधा एवं आंखें बंद करके मन में आने वाले विचारों को दृष्टा भाव से देखने की क्रिया और कल्पना करना कि मेरी बार्इं तरफ एक बक्सा है। जो भी विचार भूतकाल से आएगा उसे उस बक्से में रख देना तथा दार्इं ओर एक बक्सा है। जो भी विचार भविष्य से आएगा उसे दाएं बक्से में रख देना। एक बक्सा मेरे सामने है। जो विचार वर्तमान से आएगा उसे सामने वाले बक्से में रख देना है। कुछ समय तक यह क्रिया करने से विचारों का आना अत्यंत धीरे हो जाता है। अच्छे अभ्यास के बाद विचारों का आना लगभग बंद सा ही हो जाता है। यहीं से शून्य की स्थिति बनने लगती है। सभी प्रोफेसर ने इस क्रिया को बड़े ही ध्यान से किया और इसका लाभ उठाया। योग की अनेक शैलियां जैसे हठयोग, आयंगर योग, शिवानंद योग, हॉट योग, प्राण योग तथा पावर योग इत्यादि मॉस्को में देखने को मिलते हैं। आइसीसीआर ने भी योग को प्रचारित, प्रसारित करने में अहम योगदान दिया है।

अंतरराष्टीय योग दिवस का बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा। हर देश में भारत से योग शिक्षक को दो वर्ष के लिए भेजा गया है। रूस से अलग हुए सभी देशों में भी योग ने स्थान ले लिया है। जिसका यही कारण था कि आज भी वह देश कहीं ना कहीं रूस का अनुसरण करते हैं और उसमें योग के बढ़ते कदम अंतरराष्टÑीय स्तर पर उसके महत्व को दर्शाते हैं। आज का रूस विश्व में अपने खुलेपन के कारण आकर्षण का केंद्र बन रहा है। समूचे विश्व के पर्यटकों के साथ-साथ भारतीय भी बड़ी संख्या में वहां अपने आप को पहले से और अधिक सहज महसूस करते हैं। शाकाहार और योग भारतीयों के लिए सदैव ही आकर्षण तथा सहजता से भरपूर रहा है। योग के कारण आने वाला समय भारत तथा रूसी मैत्री को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य करेगा। ल्ल

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