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जब मेहमान बन कर जाएं

लोगों से मिलना-जुलना, दावत खाना हर किसी को अच्छा लगता है। मगर जब हम किसी के घर मेहमान बन कर जाते हैं, खासकर दावत के लिए जाते हैं, तो कुछ आदतों का ध्यान रखना जरूरी होता है। अक्सर भोजन करते समय कई लोग मेज के सलीके का ध्यान नहीं रखते। वे हड़बड़ी में भोजन करते हैं, फोन पर बातें करते रहते हैं या फटाफट भोजन करके चलने को तत्पर हो उठते हैं। मेजबान ने आपको दावत चाहे अपने घर में दी हो या किसी रेस्तरां वगैरह में, खाने की मेज का अपना शऊर होता है, उसका ध्यान रखा जाना चाहिए। जब आप मेहमान बनें,तो किन बातों का ध्यान रखें, बता रही हैं अनीता सहरावत।

Author February 10, 2019 4:27 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

हम बहुत से लोगों के संपर्क में आते हैं, लेकिन उनमें से कुछ से मुलाकात ताउम्र हमारी यादों में बस जाती है। यह याद अच्छी और बुरी दोनों हो सकती है। अच्छी छवि तक तो बात ठीक है, लेकिन बुरे अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर ऐसी छाप छोड़ सकते हैं कि दुबारा मुलाकात में हम खुद भी दूसरे शख्स का सामना करने से कतराएं। किसी के व्यक्तित्व की कौन-सी चीज सबसे पहले लुभाती है? बेशक उसका आकर्षक दिखना। लेकिन उससे भी ज्यादा मायने रखता है उसका आचार-व्यवहार। भले आप मेहमान हों या मेजबानी का जिम्मा संभाल रहे हों, आपका परोसने और खाने-पीने का तौर-तरीका आपके व्यावहारिक ज्ञान के बारे में बिना बोले बहुत कुछ बयां कर सकता है। कहावत है कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। लेकिन आप अन्न को खाते कैसे हैं?

मेज का सलीका
मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाते हुए मेज पर सलीके से व्यवहार करते हैं या नहीं, यह मेजबानी से ज्यादा मुश्किल काम है। सेना में तो बाकायदा खाने का सलीका सिखाया जाता है। आजकल कई मल्टीनेशनल कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए ऐटीकेट वर्कशॉप्स का आयोजन करती हैं। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके व्यक्तित्व में खाने-पीने के सही तौर-तरीकों और सलीके की क्या जगह है? वैसे तो हमारे यहां हर राज्य मे खानपान के अलग-अलग तौर-तरीके हैं, पर शिष्टाचार की कुछ मूलभूत बातें हर जगह एक ही हैं। आइए सबसे पहले बात करते हैं कि खाने की मेज पर हम कौन-सी छोटी-छोटी गलतियां करते हैं और खाने की मेज पर शिष्टाचार के कौन से साधारण से नियमों की मेजबान को मेहमान से दरकार है।

सबसे पहले जरूरी है कि तयशुदा जगह पर समय पर पहुंचें। इस बात का भी पूरा खयाल रखें कि भोज का आयोजन किस मकसद से किया गया है। उसी हिसाब से कपड़ों या ड्रेस का चुनाव करें। मौसम के मिजाज के मुताबिक ही कपड़े चुनें। मौका आम हो या खास, मेजबान के लिए कुछ तोहफा जरूर लेकर जाएं। हमारी संस्कृति में मेहमान का खाली हाथ आना अशुभ माना जाता है। साथ ही तोहफा एक हाथ से या जल्दबाजी में न थमाएं। कुछ लोग बेसब्र होते हैं, उन्हें अपने तोहफे पर तुरंत प्रतिक्रिया की चाह रहती है। ऐसा करने से बचें। यह शिष्टाचार के खिलाफ है। इसके अलावा मेजबान पहले से ही व्यस्त होता है, ऐसे में उपहार खोल कर फैलाना उचित नहीं। हां, प्रतिक्रिया आप बाद में फोन पर भी ले सकते हैं।

गर्मजोशी से मिलें
मेजबान से मुस्कुराहट और गर्मजोशी के साथ मिलें। अपने करीबी लोगों से बेहिचक गले मिलें। बड़ों को उम्र के हिसाब से सत्कार दें। इसके बाद भले ही आप किसी के घर जाएं या होटल, रेस्तरां मे मिलें, सबसे पहले हाथ जरूर धोकर आएं। साफ-सफाई के नजरिए से जितना जरूरी है, सामान्य शिष्टाचार के नियमों में उतना ही महत्त्वपूर्ण। भले ही आपके हाथ साफ हों, लेकिन मेज पर बैठने से पहले हाथ जरूर धोएं, पोछें। कुछ लोगों की आदत होती है कि वे हाथ धोकर उन्हें झाड़ते हुए टेबल की ओर बढ़ते है और खाने के नैपकिन से ही हाथ सुखाते हैं। यह देखने में बड़ी मामूली-सी बात नजर आती है, लेकिन यह गलत है। खाने के बाद भी हाथ अच्छे से धोएं।

एक और गलती, जो आमतौर पर हम सब करते हैं, आजकल हर कोई काम और बिना काम के भी मोबाइल पर व्यस्त रहता है। खाने की मेज पर यह सबसे अशिष्ट व्यवहार है। हालांकि इसमें हमें स्टाईल और अपनी व्यस्तता का दिखावा महसूस होता है। खाने की मेज पर लोग बातचीत करने और खाना खाने के लिए इकट्ठे होते हैं। अगर आपकी अंगुलियां और नजरें फोन पर गड़ी हैं, तो दूसरे लोगों को महसूस होता है कि आपके लिए लोगों से ज्यादा काम और फोन जरूरी है। कुछ देर के लिए अपने आॅफिस के जरूरी फोन-कॉल, मैसेज बंद करके फोन जेब में रखें। फोन खाने की मेज पर कतई न रखें। इससे मेजबान को तो अच्छा लगेगा ही, आप भी मुलाकात का बेहतर लुत्फ ले पाएंगे।

मेजबान को मौका दें
अगर भोज मेजबान के घर पर है, तो खाना मेजबान को परोसने दें। क्योंकि स्टाटर्स क्या है और मेन मैन्यू में क्या पका है, इसकी जानकारी मेजबान को है, आपको नहीं। मेज पर लगे खाने को हड़बड़ी से न उठाएं। खाना परोसने का इंतजार करें। प्लेट को एक साथ कई चीजों से न भरें। भूख के अनुसार ही खाना लें। मुंह बंद करके धीरे-धीरे छोटे निवालों के साथ खाना खाएं। खाना खाते, चबाते हुए आवाज बिल्कुल न करें। खाना जूठा न छोड़ें। कुछ संस्कृतियों में खाना बचा छोड़ने का चलन है, जबकि हमारे यहां खाने की बर्बादी की सख्त मनाही है। खाना भले ही कितना भी लजीज क्यों न हो, अंगुलियां न चांटें। हाथ पोंछनें के लिए नैपकिन का इस्तेमाल करें। अगर खाना दूसरे सदस्य को पास करना है, तो कभी भी प्लेटों के ऊपर से या लोगों के ऊपर से खाना या बाउल पास न करें। हमेशा अपने उल्टे तरफ से खाना घुमाएं। खाने में जूठे हाथ न दें। अगर आपको ओर खाना लेना है तो मेजबान से कहें। रोटी उठाते हुए कपड़े का इस्तेमाल करें, सीधे जूठे हाथों से रोटी न लपकें। खाना खाने के बाद अपनी चम्मच, कांटे को प्लेट में बिखरा न छोड़ें, बल्कि सलीके से एक तरफ लगा कर रखें। खाने की मेज पर कोहनियां रख कर न बैठें। खाना खाते हुए बीच में रुकते समय अपने हाथ टेबल पर न रखें। इससे हाथ और कपड़े गंदे तो होंगे ही, दूसरों को भी खाने में असुविधा होगी।

दूसरों का इंतजार करें
अगर आपने खाना पहले खत्म कर लिया है तो दूसरे लोगों के खाना खत्म करने का तसल्ली से इंतजार करें। बार-बार घड़ी और दूसरों की प्लेट की तरफ न देखें। इसके अलावा अगर भोज रेस्तरां या होटल में है तो टेबल क्लियर और क्लीनिंग की जिम्मेदारी स्टाफ की है। लेकिन खाना अगर घर पर है, तो अपनी प्लेट खुद ही उठाएं। साथ ही आप मेजबान की मदद कर सकते हैं। इससे मेजबान को भी अच्छा लगेगा एक और बात, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, खाने की तारीफ करना और बेहतरीन भोज के लिए मेजबान को शुक्रिया कहना न भूलें। हां, लेकिन खाना खत्म करने के फौरन बाद ही यह कहना जरूरी है, मेजबान के बर्तन समेटने का इंतजार न करें। उस समय यह कहना अटपटा लगेगा। इसके अलावा खाना खाने के तुरंत बाद विदाई न लें, इससे मेजबान को लगेगा कि आप सिर्फ आमंत्रण निपटाने की जल्दी में हैं। हां, इतना लेट भी न करें कि मेजबान आपकी विदाई के इंतजार में काम खत्म करने लग जाये। शुक्रिया के साथ विदा लें।

 

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