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शख्सियत: कल्पना चावला

हरियाणा में जन्मी कल्पना चावला आज भी लोगों की स्मृति में हैं। हर लड़की कल्पना चावला जैसी बनना चाहती है। कल्पना चावला भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन की विशेषज्ञ थीं।

Author March 17, 2019 2:08 AM
कल्पना चावला

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
कल्पना के पिता की इच्छा थी कि बेटी अध्यापिका या डॉक्टर बने, लेकिन कल्पना की उड़ान कुछ और थी। वे बचपन से ही अंतरिक्ष में उड़ना चाहती थीं। इसलिए हमेशा आसमान में उड़ने की कल्पना में ही वे खोई रहती थीं। उनकी प्राथमिक शिक्षा करनाल में हुई। 1982 में उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनाटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका चली गर्इं। टेक्सास विश्वविद्यालय से पोस्टग्रेजुएट और बाद में कोलोराडो विश्वविद्यालय से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की।

करिअर
अक्सर माना जाता है कि विज्ञान और अनुसंधान का क्षेत्र महिलाओं के लिए ठीक नहीं होता। मगर कल्पना चावला ने दुनिया के उन सभी पैमानों को नकार दिया था, जो एक लड़की के लिए बनाए गए थे। 1988 में वे नासा से जुड़ीं और वहां के ‘अमेस रिसर्च सेंटर’ में उपाध्यक्ष के रूप में काम शुरू किया। उस समय उन्होंने फ्लुइड डायनॉमिक्स के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अनुसंधान किया। इसके बाद कैलिफोर्निया की कंपनी ‘ओवरसेट मेथेड्स इंक’ में उपप्रमुख के रूप में काम किया। उन्हें उड़ान प्रशिक्षक का दर्जा हासिल था। वे ग्लाइडर, हवाई जहाज और व्यावसायिक विमान चालन के लाइसेंस के लिए प्रमाणित प्रशिक्षक थीं। अपने करिअर में उन्होंने कई शोधपत्र लिखे। 1991 में वे अमेरिका की नागरिक बन गर्इं और 1995 में नासा एस्ट्रोनॉट कॉर्प में शामिल हो गर्इं। कल्पना को अंतरिक्ष यात्रियों के पंद्रहवें दल में शामिल किया गया। एक साल के प्रशिक्षण के बाद उन्हें अंतरिक्ष यानों के नियंत्रण की व्यवस्था की जांच में लगाया गया।

पहली उड़ान
उन्होंने पहली उड़ान 1997 में अंतरिक्ष यान कोलंबिया (एसटीएस-87) में भरी थी। इस यात्रा में कल्पना के साथ छह लोग और थे। यही वह उड़ान थी, जिसने कल्पना चावला को भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बना दिया। इस यात्रा में कल्पना ने 376 घंटे और 34 मिनट अंतरिक्ष में बिताए और पृथ्वी के लगभग 252 चक्कर लगाए। यानी एक करोड़ मील की यात्रा। इस यात्रा के दौरान उन्हें स्पार्टन उपग्रह को स्थापित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। पहली यात्रा सफल होने के बाद कल्पना को और जिम्मेदारी वाला काम मिल गया। उन्हें एस्ट्रोनॉट कार्यालय में तकनीकी जिम्मेदारी सौंपी गई।

दूसरी और अंतिम उड़ान
कल्पना ने दूसरी उड़ान 2003 में भरी। यह उनकी अंतिम उड़ान साबित हुई। दूसरी उड़ान में विमान था एसटीएस-107। इस उड़ान दल की जिम्मेदारियों में लघु गुरुत्व प्रयोग शामिल थे। इसके लिए दल ने अस्सी प्रयोग किए, जिनके जरिए पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत तकनीक विकास, अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य तथा सुरक्षा का भी अध्ययन किया गया। इस यात्रा में कल्पना समेत छह और साथी थे। कल्पना और उनकी टीम सभी जरूरी अनुसंधान करके लौट रही थी, तभी अमेरिका के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र पर उतरने से पहले विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में कल्पना समेत सभी छह यात्रियों की मौत हो गई थी।

सम्मान
भारत सरकार ने कल्पना चावला को सम्मान देने के लिए इसरो को निर्देश दिया कि जो भी मौसम संबंधी उपग्रह अंतरिक्ष में जाएंगे उनके नाम कल्पना सैटेलाइट रखा जाएगा। कल्पना के नाम से स्कूली छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति भी शुरू की गई।

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