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दाना-पानी: होली के पकवान

होली मीठे और चटपटे व्यंजनों का त्योहार है। आमतौर पर इस दिन शहरों में लोग गुझिया, गुलाब जामुन, पकौड़े, पापड़, दही वड़े जैसे व्यंजन परोसते हैं। पर ग्रामीण इलाकों में बनी-बनाई मिठाइयां और दूसरे व्यंजन सहज उपलब्ध नहीं होते। लोग घर में ही पकवान बनाते हैं। घर में पकवान बनाने का एक फायदा यह होता है कि बाजार में उपलब्ध व्यंजनों की तरह मिलावट की आशंका नहीं रहती है। इसलिए इस होली पर घर में कुछ व्यंजन तैयार करें।

Author March 17, 2019 2:14 AM
प्रतीकात्मक फोटो

मानस मनोहर

गुलगुले पुए
पुए भारतीय समाज में सबसे लोकप्रिय पकवान हैं। गांवों में पुए मिठाई के विकल्प के तौर पर भी बनाए जाते हैं। पुए कई तरह के होते हैं। एक पुआ तो सामान्य रूप से आटे को चीनी या गुड़ घुले पानी से गूंध कर पूड़ी की तरह तेल में तल लिया जाता है। एक पुआ खस्ता होता है, जो बिस्कुट की तरह खाया जा सकता है। मगर होली में आमतौर पर गुलगुला पुआ बनाया जाता है, जिसे उत्तर प्रदेश, बिहार में कटहल की तरकारी के साथ परोसा जाता है। इसी पुए को दूध की राबड़ी में डुबो कर परोसा जाता है, तो उसे मालपुआ कहा जाता है। राजस्थान में इस पुए को जलेबी की तरह चाशनी में डुबो कर परोसा जाता है।
गुलगुले पुए बनाना बहुत आसान है। इसके लिए महीन पिसे आटे का उपयोग किया जाता है। अगर आटा महीन नहीं है तो सामान्य रोटी वाले आटे में आधा मात्रा मैदे की मिला लें। यानी एक कप आटा लिया है, तो एक कप मैदा भी ले लें।
पहले जितनी मात्रा में आटा और मैदा लिया है, उसकी आधी मात्रा चीनी लें और उसे चीनी से डेढ़ गुने पानी में डाल कर भगोने में उबाल लें। इस पानी को ठंडा होने रख दें। इसका उपयोग आटा गूंथने में करेंगे।
अब आटे में दो-तीन छोटी इलाइची के दाने और आधा से एक छोटा चम्मच सौंफ कूट कर डालें। दो-तीन चम्मच घी या रिफाइंड आयल डालें। अब आटे की आधी मात्रा में गुनगुना दूध लें और थोड़ा-थोड़ा करके डालते हुए हाथों से रगड़ते हुए ठीक से मिला लें। फिर चीनी घुला पानी डाल कर फेंटते हुए गाढ़ा घोल तैयार करें। ध्यान रखें कि आटे में गुठली न बने। अब इस सामग्री को ढंक कर रात भर के लिए छोड़ दें।
अगले दिन चौड़े पेंदे की कड़ाही में भरपूर तेल गरम करें। आटे के घोल को चम्मच से फेंट कर फिर से एक सार करें। तेल गरम हो जाए तो आंच मध्यम कर दें। अब एक बड़े चम्मच से घोल लेते हुए कड़ाही में डालते जाएं। एक बार में एक या दो पुए ही तलें। एक बार में घोल बहुत ज्यादा न डालें। इतना ही डालें कि वह अपने आप फैल कर कड़ाही में गोल आकार में फैल जाए। पुओं को मध्यम आंच पर सुनहरा गुलाबी होने तक तलें।
अब एक बर्तन में आधा कप चीनी को आधा कप पानी में उबाल कर चाशनी तैयार करें। पुओं को एक थाली में फैला कर ऊपर से धीरे-धीरे चाशनी डालें। फिर कटे हुए बादाम, पिस्ता और चाहें तो सूखे नारियल का बुरादा बुरक कर सजाएं। अगर आप इसे राबड़ी के साथ परोसना चाहें, तो चीनी की चाशनी की जगह राबड़ी बना कर रख सकते हैं और खाने के लिए परोसते वक्त पुओं पर डाल सकते हैं।

कांजी वड़ा
कांजी वड़ा पेट के लिए बहुत गुणकारी पेय है। यह पेट को ठंडा रखता है। होली के दिन चूंकि बहुत कुछ तला-भुना खाया जाता है, अपच होने की अशंका रहती है। ऐसे में कांजी पी लें, तो यह भोजन पचाने में भी मदद करता है। स्वादिष्ट तो होता ही है। इसका स्वाद खट््टा होता है। इसमें पड़ने वाले मसाले पाचन में बहुत मदद करते हैं। इसे घर में बहुत सहजता से बनाया जा सकता है। राजस्थान में कांजी वड़े का चलन खूब है।
कांजी बनाने के लिए तीन-चार दिन पहले से तैयारी करनी पड़ती है। इसके लिए तीन-चार लीटर पानी लें। उसमें स्वाद के अनुसार नमक, एक छोटा चम्मच हींग, आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और आधा छोटा चम्मच कुटी काली मिर्च डालें। इसमें पड़ने वाली सबसे खास सामग्री है- पीली सरसों। दो से ढाई चम्मच पीली सरसों के दाने लें। आधी सरसों को खरल में मोटा कूट लें। बाकी को साबुत डाल दें। सारी सामग्री को मिला कर मध्यम आंच पर उबाल आने तक गरम कर लें। फिर इस पानी को कांच या मिट्टी के बर्तन में डाल कर ऊपर से कपड़े से बंद कर दें और तीन दिन तक धूप में रखें। मिट्टी के बर्तन में रखने से कांजी का स्वाद बढ़ जाता है। चौथे दिन इसे चख कर देखें, इसका स्वाद खट्टा और चटपटा हो चुका होगा। यानी अब यह परोसने लायक है।
कांजी परोसने के लिए इसमें वड़े भी डाले जाते हैं। कांजी के लिए वड़े बनाने के लिए मूंग दाल को भिगो कर पीस लें और फिर जैसे वड़े बनाते हैं उसी तरह बना लें। कांजी के लिए मंूग दाल के वड़े बनाते समय केवल हल्दी, हींग और नमक का उपयोग करें। उसमें प्याज, मसाले वगैरह न डालें। वड़ों को तलने के बाद एक बड़े कटोरे में पानी लें और फिर उसमें सीधा डालते जाएं। वड़े फूले हुए और नरम हो जाएंगे। जब भी इन्हें कांजी के साथ परोसना हो। पकौड़ों को हथेली पर रखें, उन्हें दबाते हुए पानी निचोड़ लें और कांजी में डाल कर परोसें। ल्ल

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