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बेटा अपना रास्ता खुद तय करेगा: आमिर खान

बालीवुड में डूब कर काम करने वाले कलाकार की छवि रखने वाले अभिनेता आमिर खान ने 14 मार्च को अपने पाली हिल बांद्रा स्थित घर में अपना 54वां जन्मदिन मनाया। उनके सात साल के पुत्र आजाद ने उन्हें अपनी पेंटिंग उपहार में दी। उनकी पत्नी किरण राव भी उनके साथ थीं। आमिर खान ने वहां मौजूद अतिथियों के सामने अपनी नई फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढÞा’ की घोषणा की। पेश है इस मौके पर आमिर खान के साथ आरती सक्सेना की बातचीत के प्रमुख अंश:

Author March 24, 2019 2:22 AM
बेटे जुनैद को फिल्मों में उतारने की योजना को लेकर आमिर खान का कहना है कि जुनैद मेरे जैसा ही है। मैं स्वावलंबी रहा और अपने हिसाब से चलता रहा हूं। इसी तरह जुनैद ने कभी मुझसे नहीं कहा कि मैं उसके लिए फिल्में बनाऊं। जुनैद को फिल्मों से ज्यादा थियेटर पंसद है। वह अपना रास्ता खुद तय करेगा।

आरती सक्सेना

’आपकी जिंदगी का मंत्र क्या है?

१मैंने अपनी मां से सीखा था कि अपने फायदे के लिए किसी का नुकसान मत करो, किसी को धोखा मत दो, किसी पर विश्वास करो तो पूरी तरह करो और मौकापरस्त मत बनो क्योंकि मौकापरस्त आदमी को भगवान नहीं बख्शता। मेरी मां मुझसे हमेशा कहा करती थी कि अपनी नीयत और कर्म अच्छे रखो तो भगवान खुद ब खुद तुम्हारी मदद करेगा। मैने मां की कही बातें अपनी जिदंगी पर लागू की हैं।
’अपनी नई फिल्म के बारे में बताएं?
१मैं जो फिल्म शुरू करने जा रहा हूं उसका नाम है ‘लाल सिंह चड्ढÞा’। यह हॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘फॉरेस्ट गम्प’ का रीमेक है। ‘फॉरेस्ट गम्प’ को छह आस्कर मिल चुके हैं। मैंने और वॉयकाम ने मिल कर ‘फॉरेस्ट गम्प’ के अधिकार खरीदे हैं। मुख्य भूमिका मैं निभा रहा हूं, जिसका नाम ‘फॉरेस्ट गम्प’ है। मैं सरदार का किरदार निभा रहा हूं, जिसके लिए मुझे अपना वजन 20 किलो कम करना है। इस फिल्म का निर्देशन ‘सीक्रेट सुपर स्टार’ के निर्देशक अद्वैत चंदन करने वाले हैं। फिल्म का कथांतर मराठी अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने किया है। उन्होंने ‘रंग दे बंसती’ में मेरे साथ काम किया था। फिल्म की शूटिंग छह महीने बाद शुरू होगी। 2020 तक इस फिल्म को रिलीज करने की योजना है।
’आपने चार साल पहले अपनी पत्नी किरण के साथ मिलकर ‘पानी फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। उसपर कितना काम हुआ है?
१‘पानी फाउंडेशन’ के तहत हम महाराष्ट्र के पानी की किल्लत वाले गांव-खेड़े में खुदाई करपानी लाने की योजना पर काम करते हैं। हमारे साथ 50 लोग जुड़े हुए हैं, जो गांव वालों को इसका प्रशिक्षण देते हैं। इसमें हर कोई जुड़ सकता है। 2018 में 20000 लोग जुड़े थे। इस साल यह संख्या 73000 तक पहुंच गई है। कई गांवों में हमारी मेहनत से पानी आ गया है। न सिर्फ पीने का पानी मिल रहा है, बल्कि वहां खेती भी शुरू हो गई है। इस साल एक मई से हमने महा श्रमदान की योजना बनाई है। इससे कोई भी जुड़कर गांव में जाकर काम कर सकता है।
’आपने अपने जन्मदिन पर क्या संकल्प लिया है?
१संकल्प तो नहीं लिया है। यह जरूर तय किया है कि मैं रोजाना मुंबई में शूटिंग करूंगा और शाम को छह से आठ बजे तक अपनी पत्नी और बच्चे के साथ समय बिताऊंगा। दरअसल एक बार किरण ने मुझसे कहा कि मैं अपने परिवार पर ध्यान नहीं दे रहा। किरण ने मुझे एहसास कराया कि मुझे अपने परिवार के लिए दिन में कम से कम दो धंटे का समय तो निकालना ही चाहिए।
’क्या आप अपने बेटे जुनैद को फिल्मों में उतारने की कोई योजना बना रहे हैं?
१जुनैद भी मेरे जैसा ही है। मैं स्वावलंबी रहा और अपने हिसाब से चलता रहा हूं। इसी तरह जुनैद ने कभी मुझसे नहीं कहा कि मैं उसके लिए फिल्में बनाऊं। जुनैद को फिल्मों से ज्यादा थियेटर पंसद है। वह अपना रास्ता खुद तय करेगा।
’आपकी पत्नी किरण फिल्म निर्माता हैं। क्या उन्होंने आपको लेकर फिल्म निर्माण की योजना नहीं बनाई।
१मेरी पत्नी का मानना है कि अगर वह मुझे काम देगी तो उनकी फिल्म कभी पूरी नहीं होगी। उनकी पूरी यूनिट में जितने लोग हैं, उतने लोग तो निजी तौर पर मेरे साथ रहते हैं। मेरी पत्नी छोटे बजट की फिल्में बनाती है, जबकि मैं जहां जाता हूं वहां पर भीड़ पहले से पहुंची रहती है। जब वह ‘धोबीघाट’ फिल्म बना रही थी, तब उन्होंने शुरू में मुझे लेने में आनाकानी की। लेकिन आखिरकार मुझे ही अरुण के किरदार के लिए चुना। ‘धोबीघाट’ की शूटिंग मुंबई के एक भीड़ वाले इलाके में होनी थी। वहां कार नहीं जा सकती थी। मैंने इसके लिए रास्ता निकाला। मैं उस जगह पर रात को तीन बजे पहुंच गया और तीन महीने तक वहीं रहा। जब तक की शूटिंग चली, किसी ने मुझे देखा नहीं। भीड़ जमा नहीं हुई। मैं ‘धोबीघाट’ के लिए जिस घर में रह रहा था, वहां पर एक बड़ा कमरा और बाथरूम था। बड़े कमरे में शूटिंग होती थी और मैं बाथरूम में बैठकें करता था। उस दौरान राजू हिरानी से लेकर अन्य कई दिग्गज फिल्मकार बैठक के लिए पहुंचे थे।
’इस साल ऐतिहासिक फिल्मों का दौर चल रहा है। आपके मुताबिक, ऐतिहासिक फिल्मों में क्या सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आपको मौका मिले तो आप कौन-सा ऐतिहासिक किरदार निभाना चाहेंगे?
१मुझे लगता है जब कोई ऐतिहासिक फिल्म बनती है तो उस पर कई लोगों की नजरें होती हैं। ऐतिहासिक फिल्म बनाते वक्त बारीकी से काम करना चाहिए। शोध पर ध्यान देना चाहिए। अगर मुझे कभी ऐतिहासिक किरदार निभाने का मौका मिला तो मैं शिवाजी महाराज की भूमिका निभाना चाहूंगा। मुझे लगता है मेरी शक्ल शिवाजी महाराज से मिलती भी है।
’क्या आपने अभी तक आई फिल्मों में कोई ऐतिहासिक फिल्म देखी है? आपको कौन-सी ऐतिहासिक फिल्म सबसे ज्यादा पंसद आई है?
१फिल्में छोड़ो, मैं तो ट्रेलर भी नहीं देखता। मुझे फिल्में देखने से ज्यादा पढ़ने का शौक है। मुझे फिल्में देखना उतना पंसद नहीं है, जितना कि किताबें बढ़ने का शौक है।
’आपके ढेर सारे प्रशंसक आपको सलमान और शाहरुख के साथ किसी फिल्म में देखना चाहते हैं। क्या आप तीनों कभी किसी फिल्म में एक साथ नजर आएंगे?
१इस बारे में कुछ सोचा नहीं है। ऐसी कोई कथावस्तु भी सामने नहीं आई, जिसमें मैं, शाहरुख और सलमान एक साथ काम करें। मुझे सलमान और शाहरुख दोनों बेहद पसंद हैं। लेकिन मैं उस तरह की फिल्में करने में सहज नहीं हूं, जैसी फिल्में वे लोग करते हैं। हमारी रुचि अलग-अलग है।

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