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स्वामी का निशाना

सफलता को लेकर स्वामी जी ने कहा भी है- एक रास्ता खोजो। उस पर विचार करो। उस विचार को अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो। उसका सपना देखो, उस विचार को जियो। मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, आपके शरीर के प्रत्येक भाग को उस विचार से भर दो और किसी अन्य विचार को जगह मत दो। सफलता का यही रास्ता है।

स्वामी विवेकानंद का कहना है कि जीवन में सफलता के लिए काम के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।

सफलता और स्वीकृति की सबसे पहली शर्त है- प्रतिबद्ध जीवन। इतिहास में ऐसे लोगों की पूरी कतार है जिन्होंने अलग से कोई बड़ा काम नहीं किया बल्कि अपने आचरण को ही उदाहरण बना दिया। ऐसे ही महापुरुष थे स्वामी विवेकानंद। स्वामी जी ने समय-समय पर लोगों को न सिर्फ प्रेरक संदेश दिए बल्कि अपने जीवन की साधारण घटना को भी असाधारण प्रेरणा में बदलने का धैर्य और विवेक दिखाया।

एक बार वे अमेरिका में एक पुल से गुजर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि कुछ लड़के नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बंदूक से निशाना लगा रहे हैं। स्वामी जी शांत मन से यह सब कुछ देर तक देखते रहे। किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था। बाद में स्वामी जी ने खुद बंदूक संभाली और निशाना लगाने लगे। बच्चों के लिए यह सब थोड़ा असामान्य अनुभव तो था पर उन्हें यह जरूर लग रहा था कि यह संन्यासी बस बंदूक पर शौकिया हाथ आजमा रहा है और निशाना तो इनसे भी लगने से रहा। पर हुआ ठीक इसके उलटा। स्वामी जी ने एक के बाद एक बारह सटीक निशाने लगाए। सभी लड़के दंग रह गए और उनसे पूछा, ‘स्वामी जी, आप ये सब कैसे कर लेते हैं?’

उत्सुकता से भरे बच्चों के सवाल पर स्वामी विवेकानंद ने कहा, ‘जो भी काम करो अपना पूरा ध्यान उसी में लगाओ।’ बच्चों को अपनी असफलता का कारण समझ में आ गया और न सिर्फ खेलकूद बल्कि जीवन के लिए भी उन्हें एक अमूल्य सीख मिली।

सफलता को लेकर स्वामी जी ने कहा भी है- एक रास्ता खोजो। उस पर विचार करो। उस विचार को अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो। उसका सपना देखो, उस विचार को जियो। मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, आपके शरीर के प्रत्येक भाग को उस विचार से भर दो और किसी अन्य विचार को जगह मत दो। सफलता का यही रास्ता है।

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