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सबसे सुंदर हाथ

‘सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं, जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें। अच्छे कार्यों से ही हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, मात्र शरीर व आभूषणों से नहीं।’

नई दिल्ली | May 16, 2021 12:33 AM
सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं, जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें।

नैतिक सीख और हिदायत को आगे बढ़ाने में लोक-कथाओं की बड़ी भूमिका रही है। भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में ऐसी कई कथाएं सैकड़ों सालों से सुनी-सुनाई जा रही है, जिनकी कथा तो दिलचस्प है ही, सीख भी अमूल्य है। ऐसी ही एक कथा में कुछ महिलाएं एक नदी के तट पर बैठी थीं। सभी संपन्न और सुंदर थीं। वे नदी के जल में अपनी छाया देख-देख कर अपने सौंदर्य पर खुद ही मुग्ध हो रही थीं। उनमें से एक ने कहा कि उसके हाथ सबसे सुंदर हैं। दूसरी ने कहा कि उसके हाथ ज्यादा खूबसूरत हैं। तीसरी महिला ने भी यही दावा दोहराया। उनमें इस पर बहस छिड़ गई।

तभी एक बुजुर्ग महिला वहां से गुजरी। वो देखने से अत्यंत निर्धन लग रही थी। उन महिलाओं ने उसे देखते ही कह कि व्यर्थ की तकरार छोड़ इस वृद्धा से पूछते हैं कि हममें से किसके हाथ सबसे सुंदर हैं। सबने उसे आवाज दी। जब वो वृद्धा पास आई तो सबने उससे एक साथ पूछा कि हममें से किसके हाथ सबसे सुंदर हैं। बुजुर्ग महिला बोली, ‘मैं बहुत भूखी-प्यासी हूं। पहले कुछ खाने को दो, चैन पड़ने पर ही कुछ बता पाऊंगी।’ यह सुनकर उन महिलाओं को लगा कि जो इतनी दीन है उसे सुंदरता की क्या परख होगी और सबने उसे जाने को कह दिया।

वहां से थोड़ी ही दूरी पर एक मजदूर महिला बैठी थी। वह देखने में सामान्य लेकिन विनम्र थी। उसने वृद्धा को पास बुलाकर प्रेम से बैठाया और अपनी पोटली खोलकर अपने खाने में से आधा खाना उसे दे दिया। फिर नदी से पानी लाकर पिलाया, उस महिला ने उसके हाथ-पैर भी धोए। इससे बुजुर्ग महिला को बड़ा आराम मिला। जाते समय वह उन सुंदर महिलाओं के पास जाकर बोली, ‘सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं, जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें।

अच्छे कार्यों से ही हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, मात्र शरीर व आभूषणों से नहीं।’ वृद्धा का यह कहना उन संपन्न महिलाओं के लिए बड़ी सीख थी। इसके बाद वे सब जीवन में सेवा भाव के साथ कुछ-कुछ करने के लिए प्रेरित हुईं।

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