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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

शिव मोहन यादव की कविता

Author November 11, 2018 4:45 AM
प्रतीकात्मक फोटो

शिव मोहन यादव

सच्चल वाला फूल

चॉकलेट लेकर के लल्लू,
पहुंच गए स्कूल।
रखा मेज पर बस्ता, बैठे
सरका कर स्टूल।

मैडमजी तो सिखा रही थीं,
वहां बनाना फूल।
चॉकलेट का स्वाद ले रहे,
लल्लू थे मशगूल।

देखा तो मैडम गुस्सार्इं,
उठो- बनाओ फूल।
मस्ती करना आज अभी से,
जाओगे तुम भूल।

लल्लू बोला- छोड़ो मैडम,
क्यों देती हो तूल।
पांच मिनट में लाकर देंगे,
सच्चल वाला फूल।

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

पांगुर / पागुर
जो अंग से विकल हो, पंगु हो उसे पांगुर कहते हैं। पांगुर यानी पंगुल। जबकि पागुर का अर्थ होता है जुगाली करना। जब पशु चारा वगैरह खाने के बाद आराम करने बैठते हैं, तो वे निरंतर जुगाली करते रहते हैं। उसे पागुर करना कहते हैं।

विचल / विजल

जो स्थिर न हो, हिलता-डुलता रहे उसे विचल कहते हैं। अचल यानी स्थिर का विलोम शब्द है विचल। इसी से विचलन, विचलता, विचलित शब्द बने हैं। जबकि विजल का अर्थ होता है जल रहित यानी बिना पानी का।

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