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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द भेद

पढ़ें शादाब आलम की कविता

Author Updated: November 25, 2018 4:57 AM

शादाब आलम

नानी और गुड़िया

नानी बोलीं गुड़िया रानी
गुड़िया बोली बोलो नानी।

नानी बोलीं हाथी दौड़ा,
गुड़िया बोली धम्मक-धम्मक।
नानी बोलीं बकरी नाची,
गुड़िया बोली छम्मक-छम्मक।
नानी बोलीं झम-झम-झम-झम
गुड़िया बोली बरसे पानी।

नानी बोलीं मच्छर करते
गुड़िया बोली भुन-भुन-भुन-भुन।
नानी बोलीं भौरे गाते,
गुड़िया बोली गुन-गुन-गुन-गुन।
नानी बोलीं सौ तक गिनती
गुड़िया बोली याद जबानी।

नानी बोलीं तारे चमके,
गुड़िया बोली झिलमिल-झिलमिल।
नानी बोलीं मुन्ना हंसता,
गुड़िया बोली खिलखिल-खिलखिल।
नानी बोलीं हम दोनों हैं,
गुड़िया बोली हिंदुस्तानी।

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

कमनी / कमानी
सुंदर, मनोहर का पर्याय है कमनी। कमनी दरअसल, कमनीय का छोटा रूप है। जबकि कमानी तार या उस लचली वस्तु को कहते हैं, जो इस प्रकार बिठाई गई हो कि दब और उठ जाए। लोहे की झुकी हुई लचीली तीली को कमानी कहते हैं।

बरादरी / बारादरी
समान जाति या समुदाय के लोगों को एक बरादरी या बिरादरी का कहते हैं। जबकि बारादरी का अर्थ है बारहदरी यानी बैठने की वह जगह, जिसके बारह दरवाजे हों। मुगलकाल में जगह-जगह बारादरियां बनाई गई थीं, जहां लोग बैठ कर बातें करते थे।

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