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जनसत्ता रविवारी: दाना-पानी – स्वाद भी परंपरा भी

शहरी जीवन में हमने अपनी पारंपरिक आहार शैली जानबूझ कर या जिदवश त्याग दी है। इसी का नतीजा है कि हमारा पाचन-तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जीवन-शैली संबंधी अनेक बीमारियां हमें घेरने लगी हैं। विषाणुओं के हमले सहने की क्षमता कमजोर हुई है। आयुर्वेद में आहार-विहार जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण माना गया है। कब क्या और कितना खाना है, कैसे पकाना है आदि पर ध्यान दिया जाए, तो बहुत सारी बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। जानना जरूरी है कि इस मौसम में मनुष्य का पाचनतंत्र बाकी मौसमों की अपेक्षा काफी मंद रहता है। इसलिए इसमें हल्का भोजन करने या उपवास की सलाह दी गई है। इस बार कुछ ऐसे ही व्यंजन।

Author Published on: April 5, 2020 12:19 AM
पौष्टिक खिचड़ी और चोखा पर जनसत्ता रविवारी विशेष स्टोरी।

मानस मनोहर
पौष्टिक खिचड़ी
बहुत सारे लोग खिचड़ी के नाम पर नाक-भौं सिकोड़ना शुरू कर देते हैं। मगर यह जानना जरूरी है कि खिचड़ी सेहत की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण आहार है। भारतीय भोजन चक्र में हफ्ते में एक दिन रात को खिचड़ी जरूर खाने की परंपरा रही है। आज भी गांव-देहातों में बहुत सारे घरों में शनिवार की रात को खिचड़ी खाने का रिवाज है। खिचड़ी सुपाच्य होती है, इसलिए पूरे हफ्ते गरिष्ठ भोजन करने से पाचनतंत्र को जो मेहनत करनी पड़ती है, इसे खाने से उसे कुछ आराम मिलता है।

चिकित्सा की सभी पद्धतियां कहती हैं कि भोजन करते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जो कुछ खा रहे हैं उसे अच्छी तरह पच जाना चाहिए, नहीं तो अनपचा भोजन अंतों में जमा होकर सड़ता और विष पैदा करता है। फिर जिस मौसम में पाचनतंत्र मंद हो, उसमें गरिष्ठ भोजन करेंगे, तो उसके न पचने और सड़ कर विष बनने का खतरा अधिक रहता है। इसीलिए इस मौसम में नवरात्र के दौरान नौ दिन उपवास करने को कहा गया है। अगर उपवास नहीं कर रहे हैं, तो हल्का और सुपाच्य भोजन लिया जा सकता है। ऐसे में खिचड़ी उपयुक्त आहार है।
इसके अलावा जब किसी प्रकार के विषाणु या जीवाणु के संक्रमण का खतरा हो, तब सबसे जरूरी चीज है पेट को साफ और हल्का रखना। पाचनतंत्र ठीक रहता है, तो संक्रमण को झेलने की शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए बीमार आदमी को अंग्रेजी अस्पताल वाले भी खिचड़ी खिलाते हैं। इसलिए खिचड़ी से परहेज क्यों? कोरोना विषाणु के इस खतरे में खिचड़ी खाएं और स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।

कई लोगों को लगता है कि खिचड़ी खाने से उन्हें उचित पोषण नहीं मिल पाएगा। यह एक गलत धारणा है। खिचड़ी से शरीर को उचित ऊर्जा मिल जाती है, इसलिए चाहें तो रोज रात के भोजन में खिचड़ी का सकते हैं। हां, जिन लोगों को शहरी खानपान की लत लग चुकी है, उन्हें खिचड़ी बेस्वाद लग सकती है, इसलिए उनकी स्वाद तंत्रिका को ध्यान में रखते हुए खिचड़ी में कुछ प्रयोग किए जा सकते हैं, जिससे उनका पोषण संबंधी भ्रम भी दूर हो जाएगा। यो खिचड़ी बनाना कोई जटिल काम महीं है। कुकर के इस जमाने में तो बिल्कुल नहीं। चार लोगों के खिचड़ी बनाने के लिए एक सामान्य आकार की कटोरी भर चावल लें और इतनी ही मात्रा में मूंग की दाल ले लें।

मूंग दाल छिलके या बिना छिलके वाली कोई भी ले सकते हैं। इन दोनों को अच्छी तरह धो लें और आठ से दस कटोरी पानी डालें। फिर पोषण और स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें लौकी, चुकंदर, बीन्स, चौलाई में से जो सब्जी अपको पसंद हो, उसे काट कर डाल सकते हैं। चाहें, तो सभी सब्जियां साथ काट कर एक से दो कटोरी भर डाल सकते हैं। पालक न डालें। फिर आठ-दस दाने काली मिर्च के अवश्य डालें। कोरोना से लड़ने में काली मिर्च बहुत कारगर मसाला है। अब इसमें दो चुटकी हींग, एक छोटा चम्मच हल्दी और स्वाद के मुताबिक नमक डाल कर कुकर में दो से तीन सीटी आने तक पकाएं। भाप शांत हो जाए तो कुकर को खोलें और उसमें अदरक और हरा धनिया बारीक काट कर मिलाएं और परोसें। खाने से पहले आधा नीबू का रस निचोड़ें और खाएं।

चोखा
जब खिचड़ी बनाई है, तो उसके साथ चोखा भी बना लें, दोनों का मेल बहुत अच्छा होता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश में चोखा खूब खाया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें न तो किसी तरह का छौंक लगाने की जरूरत होती है और न तलने, मसाले वगैरह डालने की। नवरात्र के दिनों में बहुत सारे घरों में छौंक-तड़का नहीं लगता, उसमें चोखा सब्जी का उत्तम विकल्प होता है। इसे यों भी खाएं, यह स्वाद और सेहत की दृष्टि से बहुत उत्तम आहार है।

चोखा बनाने के लिए उबले हुए आलू, बैगन और टमाटर की जरूरत होती है। इसमें धनिया, कच्चा लहसुन और अदरक भरपूर मात्रा में डाला जाता है। चार लोगों के खाने के लिए चार सामान्य आकार के आलू, एक बड़ा गोल बैगन और चार सामान्य आकार के टमाटर पर्याप्त होंगे।

आलुओं को उबाल कर छिलका उतार लें। बैगन में छेद करके गैस की धीमी लौ पर पलट-पलट कर तब तक पकाएं जब तक वह अच्छी तरह सिकुड़ न जाए। इसी तरह टमाटरों को भी गैस की धीमी लौ पर सिकुड़ने तक पलट-पलट कर पका लें। इन्हें उतार कर एक प्लेट में रखें और ऊपर से एक बड़े कटोरे से ढंक दें। इस तरह भाप से इनके छिलके अलग हो जाएंगे और उतारना आसान हो जाएगा। तब तक इसमें डालने के लिए सात-आठ लहसुन की बड़ी कलियों और करीब दो से तीन इंच अदरक को छील कर बारीक काट लें। चार-पांच हरी मिर्चें और खूब सारा हरा धनिया पत्ता भी साफ करके काट लें। इन सारी चीजों को छिले हुए आलुओं के साथ रख लें।

अब टमाटर और बैगन का छिलका उतार कर आलुओं में डालें। जरूरत भर का नमक डालें। साथ में एक छोटा चम्मच अजवाइन, आधा चम्मच कलौंजी भी डालें। पारंपरिक चोखे में सरसों का कच्चा तेल डाला जाता है। अगर आपको इसकी झांस पसंद नहीं, तो आलिव आयल डाल लें। इसकी मात्रा दो से तीन खाने के चम्मच बराबर रख सकते हैं। अब सारी चीजों को हाथ से मसलते हुए अच्छी तरह मिलाएं, जैसे भर्ते को मसल कर एक सार कर लेते हैं, उसी तरह। चोखा तैयार है। खिचड़ी के साथ इसका मेल बहुत अच्छा रहता है। यों चावल-दाल के साथ भी खा सकते हैं। ल्ल

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