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अभिनय की मिसाल नरगिस दत्त

नरगिस पहली अभिनेत्री थीं, जिन्हें पद्मश्री दिया गया। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाने वालों में भी वह प्रथम अभिनेत्री थीं। मुंबई में बांद्रा में उनके नाम पर सड़क है। हर साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म को नरगिस दत्त अवार्ड दिया जाता है। नरगिस दत्त 1980 में राज्यसभा की सदस्य भी रहीं।

हिंदी सिनेमा में जिन अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय के बल पर दर्शकों और निर्माता-निर्देशकों की इस धारणा को खंडित किया कि फिल्में केवल अभिनेता के बल पर चलती हैं, नरगिस उनमें अग्रणी हैं। फिल्म ‘मदर इंडिया’ में अपने अभिनय के बल पर उन्होंने साबित कर दिया कि फिल्में अभिनेत्री के बल पर भी सफल हो सकती हैं। इसके पहले अभिनेत्री को फिल्मों में अभिनेता से कमतर समझा जाता था। मगर नरगिस ने इस स्थान में परिवर्तन कर दिया।

नरगिस का असली नाम फातिमा अब्दुल रशीद था। नरगिस के पिता उत्तमचंद मूलचंद रावलपिंडी के समृद्ध हिंदू थे और माता जद्दनबाई हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका थीं। नरगिस की मां भारतीय सिनेमा से सक्रियता से जुड़ी हुई थीं। वे अपने समय में एक सफल गायिका, नर्तकी, निर्देशिका, संगीतकार और अभिनेत्री के रूप में प्रसिद्धि पा चुकी थीं।

नरगिस को उनकी मां ने ही फिल्मों में प्रवेश दिलाया था। उन्होंने छह साल की उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उनकी पहली फिल्म थी ‘तलाश-ए-हक’, जो 1935 में रिलीज हुई थी। इसी फिल्म से उनका नाम बेबी नरगिस पड़ा था। चौदह वर्ष की उम्र में निर्देशक महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ में मोतीलाल की हीरोइन के तौर पर उनका चयन हुआ था।

उसके बाद उनका फिल्मी सफर तीन दशकों तक निर्बाध चलता रहा। उनकी कई फिल्में बहुत लोकप्रिय रहीं, जिनमें, ‘मदर इंडिया’, ‘श्री 420’, ‘बरसात’ आदि शामिल हैं। इन फिल्मों के अलावा उन्होंने अंदाज, अनहोनी, जोगन, आवारा, रात और दिन, अदालत, घर संसार, लाजवंती, परदेशी, चोरी चोरी, जागते रहो, अंगारे, आह, धुन, पापी, शिकस्त, अंबर, आशियाना, बेवफा, शीशा, दीदार, हलचल, प्यार की बातें, सागर, आधी रात, बाबुल फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया था।

साठ के दशक में वे बीमार रहने लगी थीं, जिसके चलते वे फिल्मों में बहुत कम काम कर पाईं। इसी कालखंड की उनकी फिल्म थी ‘रात और दिन’ (1967), जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल फिल्म फेयर अवार्ड प्राप्त हुआ था। ‘मदर इंडिया’ आस्कर के लिए नामित हुई थी।

‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान अभिनेता सुनील दत्त ने उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने सहज स्वीकार कर लिया था। हालांकि उस फिल्म में सुनील दत्त ने नरगिस के बेटे का किरदार निभाया था। 11 मार्च, 1958 को नरगिस ने सुनील दत्त से विवाह कर लिया और फिल्म उद्योग को अलविदा कह दिया। 3 मई, 1981 को इक्यावन वर्ष की उम्र में पेन्क्रियाटिक कैंसर से नरगिस का देहांत हो गया। उनकी याद में नरगिस दत्त मेमोरियल कैंसर फाउंडेशन की स्थापना हुई।

नरगिस ने अभिनेत्री से ज्यादा एक समाज सेविका के रूप में काम किया था। उन्होंने नेत्रहीन और विशेष बच्चों के लिए काम किया था। वे भारत की पहली स्पास्टिक्स सोसाइटी की संरक्षिका बनी थीं। उन्होंने अजंता कला सांस्कृतिक दल बनाया, जिसमें तब के नामी कलाकार-गायक सरहदों पर जाकर तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाते थे, उनका मनोरंजन करते थे। बांग्लादेश बनने के बाद 1971 में उनका दल पहला था, जिसने वहां कार्य किया था।

नरगिस पहली अभिनेत्री थीं, जिन्हें पद्मश्री दिया गया। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाने वालों में भी वह प्रथम अभिनेत्री थीं। मुंबई में बांद्रा में उनके नाम पर सड़क है। हर साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म को नरगिस दत्त अवार्ड दिया जाता है। नरगिस दत्त 1980 में राज्यसभा की सदस्य भी रहीं।

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