होली पर स्वास्थ्य की देखभाल, सेहत के साथ त्योहार की बात

होली पर खासतौर पर मावे से बने व्यंजनों को बनाने और खाने का खूब प्रचलन है। पर जिस तरह से नकली मावे का कारोबार बढ़ रहा है, उसमें मावे के इस्तेमाल से बने व्यंजनों को लेकर खास सतर्कता की जरूरत है।

Holi festival of colours and delicious foodहोली की मस्ती करें, लेकिन सेहत के प्रति सचेत भी रहें। (फोटो- जनसत्ता)

कोविड-19 का खतरा अभी बना ही हुआ है। देश के कई हिस्सों में एक बार फिर से संक्रमण के आंकड़े खतरनाक तरीके से बढ़ने शुरू हो गए हैं। ऐसे में होली पर खास सतर्कता बरतने की जरूरत है। वैसे इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से पहले से इस तरह के दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं कि होली पर किसी तरह के सार्वजनिक आयोजन या घरों से निकलने से लोग परहेज करें। साफ है कि खुशी और उल्लास के इस मौके पर पर हमें कई तरह की बातों का खयाल रखना होगा ताकि रंगों का यह त्योहार किसी भी लिहाज से हमारे जीवन और अनुभव को बदरंग न कर जाए। इनमें सबसे जरूरी है सेहत से जुड़ी हिदायतों पर अमल।

खानपान में परहेज
होली पर लोग पारंपरिक रूप से रंग-गुलाल खेलने के साथ कई तरह के व्यंजन घरों पर बनाते हैं या बाजार से खरीद कर लाते हैं। पर इस बार जिस तरह की स्थिति है उसमें हमें खास खयाल रखना होगा। खासतौर पर मधुमेह और दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोग अपनी सेहत का पूरा खयाल रखें ताकि आपकी होली खुशियों के साथ बीते और आप इसका पूरी तरह लुत्फ उठा सकें। मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त लोगों को यह बात विशेष रूप से समझनी होगी कि तेल और चीनी से बनने वाले व्यंजनों से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए खानपान में पूरी सावधानी बरतें। इसी तरह अगर आप दिल संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं, तो मिठाई और ज्यादा तेल-मसाले वाले व्यंजनों को खाने से बचें। ये आपकी सेहत के लिए घातक हो सकते हैं। बेहतर होगा कि इस खुशी के मौके पर हल्के खानपान को ही चुना जाए ताकि त्योहार का रंग फीका न पड़े और आपकी सेहत भी अच्छी रहे।

मिलावटी मावा
खानपान से जुड़ी एक और अहम बात जो होली के मौके पर ध्यान रखने की जरूरत है वह है मिलावटी खाने से परहेज। होली पर खासतौर पर मावे से बने व्यंजनों को बनाने और खाने का खूब प्रचलन है। पर जिस तरह से नकली मावे का कारोबार बढ़ रहा है, उसमें मावे के इस्तेमाल से बने व्यंजनों को लेकर खास सतर्कता की जरूरत है। एक किलो दूध से तकरीबन दो सौ ग्राम मावा ही निकलता है। जाहिर है कि इससे व्यापारियों को ज्यादा फायदा नहीं होता। इसलिए मिलावटी मावा बनाया जाता है। मावे में अक्सर शकरकंदी, सिंघाड़े का आटा, आलू और मैदे की मिलावट की जाती है। नकली मावा असली मावे की तरह ही दिखे इसके लिए इसमें कुछ खास रसायन भी मिलाया जाता है। कुछ दुकानदार दूध के पाउडर में वनस्पति घी मिलाकर मावे को तैयार करते हैं। मावे के ये सारे प्रकार सेहत को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। अच्छा तो यही होगा कि अगर मावे का प्रयोग करना ही हो तो या तो इसे आप अपने घर पर ही बनाएं या फिर इसे किसी भरोसेमंद दुकान से खरीदें।

नकली रंगों से तौबा
होली को इस बार सार्वजनिक के बजाए निजी या पारिवारिक स्तर पर सीमित रूप से मनाने की हिदायत तो दी गई है पर लोग इस मौके पर रंग-अबीर से पूरी तरह से परहेज करेंगे, इसके आसार कम ही हैं। लिहाजा रंगों के इस्तेमाल से जुड़ी कुछ अहम बातों का हमें ध्यान रखना चाहिए। मसलन, रंगों का असर हमारी आंखों तक न पहुंचे, इसलिए रंग खेलते समय अपनी आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें। हल्का सा रंग भी आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। आप चाहें तो होली खेलने से पहले रंगीन चश्मा पहन सकते हैंं। इससे आपकी आंखों का बचाव होगा।

इसके अलावा इस बात का भी पूरा ध्यान रखें कि होली का रंग आपके मुंह और नाक में भी न जाए। ऐसा होने पर सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

प्राकृतिक रंग
यह भी कि अगर आप भी होली खेलने के लिए रंग खरीदने जा रहे हैं तो असली और नकली रंगों के बारे में आपको सजग रहना चाहिए। आमतौर पर मिलावटी रंग या गुलाल डीजल, इंजन आॅयल, कॉपर सल्फेट और सीसे जैसे हानिकारक पदार्थों से बनाए जाते हैं। इनसे होली खेलने पर सिरदर्द और सांस लेने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए होली खेलने के लिए प्राकृतिक तरीकेसे बनाए गए रंग-अबीर का ही इस्तेमाल करें। ये पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं। साथ ही इनके प्रयोग से किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होती है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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