ताज़ा खबर
 

जोड़ों के दर्द की समस्या, तकलीफ का जोड़-घटाव

एक अनुमान के अनुसार 2025 तक भारत में आस्टियो आर्थराइटिस के केसों की संख्या छह करोड़ तक पहुंच जाएगी। कई लोग पीड़ित होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाएं लेनी शुरू कर देते हैं। यह ऐसी आदत है जो फौरी राहत भले दे पर आगे कठिनाई पैदा होती है।

आर्थराइटिस का सबसे प्रचलित रूप ‘आॅस्टियो आर्थराइटिस’ हर साल भारत में 1.5 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है।

आधुनिक जीवनशैली ने शरीर की कुछ समस्यों और बीमारियों को आम प्रचलन का हिस्सा मान लिया है। एक हद तक ऐसा है भी पर इस कारण सेहत के स्तर पर बरती जाने वाली लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। शरीर के जोड़ों में दर्द ऐसी ही एक परेशानी है। इससे बीमारी से कम या ज्यादा जूझने वालों की समस्या आपवादिक नहीं बल्कि अच्छी खासी है।

जोड़ों में दर्द की बीमारी को आर्थराइटिस कहा जाता है। गलत खानपान और भागदौड़ वाली दिनचर्या के कारण भारत में आर्थराइटिस यानी गठिया रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही हैं। एक सर्वे के मुताबिक देश में 18 करोड़ से अधिक लोग आर्थराइटिस से पीड़ित हैं। इस रोग का देसी नाम गठिया है। इसमें दर्द इतना तेज होता है कि पीड़ित मरीज को न केवल चलने-फिरने बल्कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। इस बीमारी में घुटनों में दर्द होने के साथ दर्द वाले स्थान पर सूजन भी आ जाती है।

आर्थराइटिस का सबसे प्रचलित रूप ‘ऑस्टियो आर्थराइटिस’ हर साल भारत में 1.5 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। एक अनुमान के अनुसार 2025 तक भारत में आस्टियो आर्थराइटिस के मामलों की संख्या छह करोड़ तक पहुंच जाएगी। कई लोग इस समस्या से पीड़ित होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाएं लेनी शुरू कर देते हैं। यह एक ऐसी आदत है जो फौरी राहत हमें भले दे पर इससे आगे इलाज में काफी कठिनाई पैदा होती है।

परेशानियों की जकड़
आयुर्वेद की दृष्टि से आर्थराइटिस या गठिया में प्रधान रूप से वात कुपित होता है। कुछ प्रकार के गठिया जिनमें जकड़न अधिक होती है उनमें कफ का भी प्रकोप होता है। इस रोग के किसी भी रूप में जोड़ों में दर्द होने लगता है और सूजन दिखाई देने लगती है। जोड़ों में सूजन के कारण जोड़ों में दर्द और जकड़न होती है। बीमारी के बढ़ जाने पर चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। इसका प्रभाव प्राय: घुटनों, नितंबों, अंगुलियों और मेरू की हड्डियों पर पड़ता है। उसके बाद कलाइयों, कोहनियों, कंधों व टखनों के जोड़ों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

एक नहीं कई वजह
यह रोग किसी एक कारण से नहीं होता है। वैसे विटामिन-डी की कमी से लोगों की अंगुलियों, घुटने, गर्दन, कोहनी के जोड़ों में दर्द की शिकायत आज आम बात हो गई है। इस तरह की कोई परेशानी आने पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग झोलाछाप डॉक्टरों की गोलियों पर विश्वास करने लगते हैं। कुछ दिन राहत देने के बाद ऐसी गोलियां और चूर्ण काफी नुकसानदेह साबित होते हैं। उनमें ‘स्वाइड’ मिला होता है। यह बहुत दिनों तक लेने से शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

आफत दर आफत
शरीर में गठिया एक बार विकसित हो जाता है तो इससे कई और तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं। इसमें पहले जोड़ों में दर्द शुरू होता है। फिर यह अपने विकराल रूप में आते-आते उठने-बैठने और चलने-फिरने में परेशानी पैदा करने लगता है। शरीर का वजन भी बढ़ने लगता है। मोटापे से जहां हाइपरटेंशन, हृदयाघात, अस्थमा, कोलेस्ट्राल, निसंतानता समेत पचास से ज्यादा तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं, वहीं शरीर में गठिया के बने रहने से रक्तचाप और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज और मुश्किल हो जाता है।

निजात और एहतियात
’इस रोग से बचाव के लिए न सिर्फ वजन कम करना चाहिए बल्कि खाने की मात्रा भी कम कर देनी चाहिए। इस रोग के पीड़ितों के लिए इससे बचाव के लिए एक जरूरी हिदायत यह है कि वे हल्के व सुपाच्य भोजन ग्रहण करें। जिस भोजन को खाने से गैस उत्पन्न हो, उसके सेवन से बचना चाहिए।

-आप जिस गद्दे पर सोते हैं वह न तो बहुत मुलायम हो और न ही बहुत सख्त। यह भी कोशश करें कि आपकी दिनचर्या नियमित रहे। नियमित व्यायाम, घूमना-टहलना और मालिश करें। ठंडी हवा, नमी वाले स्थान व ठंडे पानी के संपर्क में न रहें।
-अगर जोड़ों में दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या आपको लगातार परेशान कर रही है तो डॉक्टर को दिखाएं।
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें)

Next Stories
1 साम्यवादी संघर्ष का पुरोधा ईएमएस नंबूदरीपाद
2 राम नाम का मरम है आना
3 खाएं फरा चखें धुस्का
ये पढ़ा क्या?
X