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उच्च रक्तचाप से होने वाली समस्या, मामूली नहीं तनाव की बात

विद्यार्थियों, कारोबारी जगत से जुड़े लोगों से लेकर चिकित्सकों तक में बीते एक वर्ष में उच्च रक्तचाप या तनाव की समस्या काफी बढ़ गई है। साफ है कि इस दौरान महामारी के कारण जीवन की सहजता जिस तरह लगातार भय से भरी असहजता में बदली है, उसका लोगों के मानसिक स्तर पर काफी असर हुआ है।

आज की भागमभाग वाली जीवन शैली में तनाव अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ज्यादा तनाव उच्च रक्तचाप को बढ़ाता है, जो बहुत ही घातक है।

आधुनिक जीवन की जटिलता और फौरीपने के कारण लोगों पर कई तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ता जा रहा है। इस कारण सेहत की भी कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो रही हैं। तनाव का होना और मानसिक रूप से असहज महसूस होना ऐसी ही एक समस्या है। कोरोना संकट के दौरान इस समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। विद्यार्थियों, कारोबारी जगत से जुड़े लोगों से लेकर चिकित्सकों तक में बीते एक वर्ष में उच्च रक्तचाप या तनाव की समस्या काफी बढ़ गई है। साफ है कि इस दौरान महामारी के कारण जीवन की सहजता जिस तरह लगातार भय से भरी असहजता में बदली है, उसका लोगों के मानसिक स्तर पर काफी असर हुआ है। कई बार लोग तनाव की सबसे बड़ी वजह और लक्षण उच्च रक्तचाप को गंभीरता से नहीं लेते और इसके उपचार को लेकर भी खासे लापरवाह रहते हैं। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है और यह जानलेवा तक हो सकती है। अच्छी बात यह है कि इस बाबत समय से ध्यान देने और जरूरी एहतियात बरतने से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

रक्त का प्रवाह
रक्त प्रवाह के बारे में आगे की बातचीत से पहले जरूरी है कि हम शरीर में रक्त प्रवाह की प्रक्रिया के बारे में थोड़ा जान-समझ लें। सामान्य रक्त प्रवाह आपके शरीर के सभी हिस्सों (जिसमें आपके दिल, मस्तिष्क और गुर्दे जैसे महत्त्वपूर्ण अंग शामिल हैं) में पोषक तत्त्व और आॅक्सीजन पहुंचाता है। आपका धड़कता हुआ दिल दोनों रक्त वाहिकाओं (बड़े और छोटे) के विशाल संजाल के माध्यम से रक्त को आगे प्रवाहित करने में मदद करता है। रक्त वाहिकाएं, बदले में लगातार समायोजित होती रहती हैं। वे रक्तचाप को नियंत्रित रखने और रक्त प्रवाह की स्वस्थ दर बनाए रखने के लिए संकुचित या चौड़ी हो जाती हैं।

दिल की मुश्किल
रक्तचाप का हर दिन ऊपर और नीचे होना सामान्य बात है। रक्तचाप समय, व्यायाम और आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन के साथ तनाव और दूसरे अन्य कारकों से प्रभावित होता है। समस्या तब बढ़नी शुरू हो जाती है, जब आपका रक्तचाप बहुत अधिक समय तक उच्च स्तर पर बना रहता है। उच्च रक्तचाप आपके दिल के काम को बहुत मुश्किल कर सकता है। रक्त प्रवाह की तीव्र या उच्च शक्ति रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे वे कमजोर, कठोर या संकुचित हो सकती हैं। समय के साथ उच्च रक्तचाप दिल, गुर्दे, मस्तिष्क और आंखों सहित आपके शरीर के कई महत्त्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

सतर्कता जरूरी
उच्च रक्तचाप दुनियाभर में मौत और विकलांगता की एक प्रमुख वजह है। उच्च रक्तचाप से दिल का दौरा, हृदयाघात या गुर्दे की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यहां यह बात हमें खासतौर पर समझ लेनी चाहिए कि उच्च रक्तचाप की समस्या किसी को भी हो सकती है। यहां तक कि बच्चों में भी उच्च रक्तचाप की समस्या संभव है। अलबत्ता विभिन्न अध्ययनों से यह बात जरूर साफ है कि उच्च रक्तचाप का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता जाता है। लिहाजा इस बारे में पहले से सतर्क और जागरूक रहना ही हमारी सेहत के लिए हितकर है। अधिक वजन या उच्च रक्तचाप का पारिवारिक इतिहास होना भी आपके लिए रक्तचाप का जोखिम बढ़ा सकता है।

जानकारी और हिदायत
-डॉ. लॉरेंस फाइन जो उच्च रक्तचाप के उपचार और रोकथाम पर अनुसंधान की निगरानी करते हैं, कहते हैं कि 140/90 से ऊपर के औसत रक्तचाप को ‘हाइपरटेंशन’ के रूप में परिभाषित किया जाता है। वैसे आमतौर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि सबसे सुरक्षित रक्तचाप या सामान्य रक्तचाप 120/80 या उससे कम होता है, जिसका अर्थ है ‘सिस्टोलिक’ रक्तचाप 120 या उससे कम और ‘डायस्टोलिक’ दबाव 80 या उससे कम।
-उच्च रक्तचाप को आहार, वजन घटाने और नियमित शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से रोका जा सकता है। आमतौर पर इसके उपचार में कुछ दवाओं के साथ जीवनशैली में स्वस्थ बदलाव की सलाह दी जाती है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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