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बदलते मौसम में सेहत की फिक्र, घटी सावधानी बढ़ी परेशानी

सेहत के लिहाज से यह समय सावधानी बरतने का है। इन दिनों में वैसे भी सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, आंखों में जलन, अपच और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इस बार तो ऊपर से कोविड-19 की दूसरीलहर का संकट भी सिर पर है। ऐसे में सेहत को लेकर कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि बदलते मौसम के बीच कहीं आप बीमार न पड़ जाएं।

Jansatta Ravivari Healthबदलते मौसम में खुद के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। (फोटो- जनसत्ता)

मौसम एक बार फिर तेजी से करवट ले रहा है। अप्रैल का महीना शुरू हो गया है। देश के कुछ हिस्सों में तो अभी से पारा इतना ऊपर चढ़ गया है कि लोगों का बुरा हाल है। जहां ऐसा नहीं भी है वहां हल्की गर्मी तो महसूस होने ही लगी है। इस दौरान बीच-बीच में बारिश होने की वजह से ठंड का अहसास अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। सेहत के लिहाज से यह समय सावधानी बरतने का है। इन दिनों में वैसे भी सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, आंखों में जलन, अपच और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इस बार तो ऊपर से कोविड-19 की दूसरीलहर का संकट भी सिर पर है। ऐसे में सेहत को लेकर कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि बदलते मौसम के बीच कहीं आप बीमार न पड़ जाएं।

पंखा को कहें ना
गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग पंखा चलाना शुरू कर देते हैं। पर ऐसा करना सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है। खासतौर पर वैसे इलाकों में जहां अब भी सुबह-शाम उतनी गर्मी नहीं पड़ रही है, वहां रात-दिन पंखे का इस्तेमाल अभी से शुरू करना ठीक नहीं है। चिकित्सकों की मानें तो मौसम के बदलाव के इन दिनों में असवाधानी बरतने से शरीर पर सर्द-गर्म का असर पड़ सकता है और इस कारण बुखार, सिरदर्द या बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए खासतौर पर दोपहर में जब भी बाहर से आएं तो गर्मी महसूस होने पर भी तुरंत पंखा न चलाएं बल्कि कुछ देर आराम से बैठें। तापमान अपने आप सामान्य लगने लगेगा।

स्वच्छता बेहद जरूरी
सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियों से बचने का सबसे आसान तरीका है स्वच्छता का खास ध्यान। आजकल कोविड-19 के कारण वैसे भी बार-बार हाथ धोने की हिदायत दी जा रही है। इस हिदायत पर अमल खासतौर पर जरूरी है क्योंकि हमारे हाथ अक्सर गंदे रहते हैं। ज्यादातर लोग अपने हाथों को सामने रखकर खांसते या छींकते हैं या फिर दिनभर अपनी नाक को हाथों से ही पोंछते रहते हैं। लिहाजा हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह से धोना बेहद जरूरी है। कम से कम 20 सेकंड तक हथेली, उंगली, उंगली के पोर, हाथों के पीछे का हिस्सा और नाखून के आसपास के हिस्से को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां आप साबुन-पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते तो सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

प्रतिरोधक क्षमता
कई लोगों को साल में कई बार सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। चिकित्सकीय शोध में पाया गया है कि अक्सर ऐसे लोगों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। बदलते मौसम के दौरान ऐसे लोगों के बीमार होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे लोगों को अपनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके लिए आप चाहें तो ग्रीन टी या ब्लैक टी पी सकते हैं, लेकिन दिन में केवल एक या दो कप ही पिएं। ज्यादा पीने पर सेहत बिगड़ भी सकती है। कच्चा लहसुन, दही, ओट्स, विटामिन डी और सी युक्त पदार्थ जैसे नींबू और आंवले का भी सेवन कर सकते हैं।

इसके अलावा एक इंच ताजी गिलोय स्टिक को दो कप पानी में इतना उबालें कि आधा कप पानी बचे। इस पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर रोज सुबह खाली पेट पिएं। गिलोय कुदरती रूप से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। इसी तरह हल्दी, तुलसी और अदरक में मौजूद सबसे ज्यादा ताकतवर एंटीबायोटिक हैं। इनके सेवन से आपकीप्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो जाएगी। संतरा, मौसमी आदि रसीले फलों में भरपूर मात्रा में मिनरल्स और विटमिन-सी होता है। फल एंटीआक्सीडेंट होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन सबका सेवन किसी भी रूप में नियमित रूप से करें।

जरूरी सलाह
– सुबह उठकर एक गिलास ताजा पानी पिएं। यह न सिर्फ शरीर को डीटॉक्स करता है, बल्कि पाचन क्रिया भी दुरुस्त करता है।
– बदलते मौसम में भोजन और शारीरिक चुस्ती पर खास ध्यान दें। नियमित व्यायाम और रोजाना आधा घंटे टहलना बहुत जरूरी है।
– खुली हवा में सिर और माथा ढंक कर निकलें।
– सुबह भरपेट नाश्ता करें, ताकि संक्रमण की आशंका कम हो।
– पानी की कमी से बचें। हल्का गुनगुना पानी पिया करें। भोजन में सूप, हरी सब्जी और मौसमी फल को शामिल करें। ल्ल
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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