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धूप में संभालें नैनों की ज्योति

पानी के छींटे आंखों की सेहत के लिए बहुत कारगर उपाय होते हैं। जब भी सुबह सोकर उठें, सबसे पहले देर तक आंखों पर पानी के मारें। छींटे मारते समय यह सावधानी भी बरतनी चाहिए कि आंखें बंद न हों। हमेशा आंखें खुली रख कर ही छींटे मारने चाहिए।

गरमी के मौसम में सेहत को लेकर काफी सावधान रहने की जरूरत होती है। इस मौसम में धूप की चमक तेज होती है, ऊपर से गरमी का प्रभाव। इसका आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। धूप की चमक आंखों के रेटिना को क्षरित कर देती है। इसलिए जब भी घर से बाहर धूप में निकलें, आंखों का खास खयाल रखें। इसका सबसे आसान और सुरक्षित उपाय है धूप के चश्मे पहनना। पर इसके अलावा भी आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ और उपाय करना जरूरी होता है।

इस मौसम में आंखों के संक्रमण का भी खतरा अधिक होता है। जब हम धूप से ठंडी जगह पर पहुंचते हैं, खासकर वातानुकूलित जगहों पर, तो आंखें कुछ सिकुड़ने लगती हैं। इस तरह उनमें खुजली होती है और कई लोग उन्हें रगड़ देते हैं। हाथ में चिपके बैक्टीरिया आंखों का संक्रमण पैदा कर देते हैं। इसलिए कुछ सावधानियां हमेशा बरतनी चाहिए।

पानी के छींटे मारें
पानी के छींटे आंखों की सेहत के लिए बहुत कारगर उपाय होते हैं। जब भी सुबह सोकर उठें, सबसे पहले देर तक आंखों पर पानी के मारें। छींटे मारते समय यह सावधानी भी बरतनी चाहिए कि आंखें बंद न हों। हमेशा आंखें खुली रख कर ही छींटे मारने चाहिए।

इससे आंखों के भीतर जमी गंदगी साफ हो जाती है और आांखों की नमी भी बरकरार रहती। गरमी के मौसम में जब भी धूप से छाये वाली जगहों पर जाएं, आांखों पर पानी के छींटे जरूर मारें। अगर देर तक कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं, तो भी दो-तीन घंटे के अंतर पर आंखों में पानी के छींटे मारें।

इसके अलावा गुलाब जल आंखों के लिए बहुत कारगर है। रात को सोने से पहले अगर आंखें धोने के बाद एक-एक बूंद गुलाब जल डाल लें, तो इससे आंखों की गंदगी तो साफ होती ही है, आंखों को ठंडक भी मिलती है। आजकल तो गुलाब जल का स्प्रे भी आने लगा है। उसे साथ लेकर चलें। जहां आंखें धोने के लिए पानी न मिले, वहां गुलाब जल का स्प्रे इस्तेमाल कर लें।

मलें नहीं आंखें
आंखों को कभी मलना नहीं चाहिए, इससे रेटिना पर बुरा असर पड़ता है। जो लोग बार-बार आंखें मलते हैं, उनकी आंखों की नमी घटने लगती है। इस तरह उनमें खुजली बनी रहती है। इसके अलावा, आंखों से पानी गिरते रहने की समस्या भी पैदा हो सकती है।

आंखों की रोशनी भी जा सकती है। फिर जब आाप आांखों को मलते हैं, तो हाथों में चिपका बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण पैदा कर सकता है। इसीलिए गरमी के मौसम में आंख आने यानी कंजेक्टिवाइटिस की समस्या तेजी से फैलती है। अगर आंखों में संक्रमण हो जाए, तो आंखों को थोड़ी-थोड़ी देर में धोते रहें। डाक्टर की सलाह लेकर दवाएं डालें।

टोपी, छाता, चश्मा
धूप में जब भी बाहर निकलें, सिर जरूर ढंकें। यह प्राचीन परंपरा है कि लोग सिर पर पगड़ी बांध कर ही बाहर निकलते थे। ध्यान दें कि राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश में भी लोग पगड़ी जरूर पहनते हैं। सिर को ढंकना आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए भी जरूरी है।

शहरों में पगड़ी बांध कर निकलना कई लोगों के लिए अटपटा लग सकता है। इसलिए टोपी का इस्तेमाल करें। इसके लिए टोपी ऐसी लें, जो आंखों पर भी धूप आने से रोकती हो। छाते का उपयोग करें, ताकि सिर पर सीधी धूप न पड़े। इसके अलावा धूप का चश्मा अवश्य पहनें, ताकि आंखों में चमक न लगे।

चश्मे का चुनाव
यों धूप के चश्मे का चलन फैशन के रूप में हुआ था, आज भी बहुत सारे लोग इसी रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं। पर जैसे-जैसे आंखों की चिकित्सा के क्षेत्र में उन्नति होती गई, धूप के चश्मे आंखों की सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य माने जाने लगे। जहां भी चमक वाली रोशनी होती हो, वहां धूप के चश्मे अवश्य पहनने चाहिए।

हालांकि बहुत सारे लोग फैशन के लिए धूप का चश्मा खरीदते समय उसके कांच की गुणवत्ता पर कम, उसकी बनावट पर अधिक ध्यान देते हैं। मगर जब भी धूप का चश्मा खरीदें, यह अवश्य ध्यान रखें कि उसके कांच पराबैंगनी किरणों यानी अल्ट्रा वायलेट किरणों को रोकने वाली हों। ऐसे चश्मों पर यूवी लिखा रहता है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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