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कानों की देखभाल यह दर्द बहुत बेदर्द है

आजकल लोगों में फोन में गाने, समाचार आदि सुनने का चलन बढ़ रहा है। इसके लिए अक्सर लोग ईयरफोन का उपयोग करते हैं। मगर कम ही लोग ईयरफोन की सफाई का ध्यान रखते हैं। इस मौसम में ईयरफोन भी कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस का वाहक हो सकता है।

कानों की देखभाल यह दर्द बहुत बेदर्द है

बरसात में खासकर आंख, नाक, गले में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। चूंकि इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस हवा में भी तैरते रहते हैं, शरीर के इन अंगों पर उनका आक्रमण सबसे अधिक होता है। इसके अलावा इस मौसम में वातावरण में हर समय नमी बनी रहती है, जिसकी वजह से फंगस यानी फंफूद पैदा हो जाती है।

कानों के संक्रमण में फंगस एक बड़ा कारण होता है। कानों के भीतर मैल जमा हो जाती है, जिसकी वजह से खुजली होनी शुरू हो जाती है और कई बार तेज दर्द भी होने लगता है। जब कानों में तेज खुजली होती है, तो कई लोग किसी तिनके, लकड़ी, पेन-पेंसिल, चाभी वगैरह से खुजला लेते हैं। इस तरह संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। बाहरी वस्तु में चिपके हुए बैक्टीरिया कानों को प्रभावित करते हैं।

कान शरीर का बहुत संवेदनशील अंग है। अगर इसमें संक्रमण हो जाए, किसी तरह की परेशानी पैदा हो जाए और समय रहते इलाज न कराया जाए, तो व्यक्ति की श्रवण शक्ति प्रभावित होती है। धीरे-धीरे सुनने की क्षमता घटने लगती है। इसलिए कानों के संक्रमण को किसी भी रूप में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कारण

नमी वाले मौसम में फंगस के बीजाणु तेजी से बढ़ते हैं, जिससे बरसात के मौसम में फंगल संक्रमण बहुत आम हो जाता है। यह फंगल इन्फेक्शन त्वचा और आंखों के अलावा, कानों को भी प्रभावित करता है। बरसात में कानों में इस तरह का संक्रमण होना आम है।

जब वातावरण में उमस बढ़ जाती है, तो फंगल इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया का प्रजनन भी बढ़ जाता है। इससे कानों में खुजली और दर्द होने लगता है। इसके अलावा कान में खुजली करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चीजों की वजह से भी कान के संक्रमण का खतरा हो सकता है। बरसात के मौसम में पैदा होने वाला ओटोमाइकोसिस नामक फंगल संक्रमण कान में परेशानी पैदा करता है।

इसके अलावा अगर सर्दी जुकाम हो गया है, तब भी कान प्रभावित हो सकता है। क्योंकि सर्दी-जुकाम पैदा करने वाले बैक्टीरिया या वायरस कानों पर भी असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा जैसे बैक्टीरिया कान के जीवाणु संक्रमण का मुख्य कारण हैं। बारिश के मौसम में इसमें तेजी से वृद्धि होती है।

कई बार गंदे पानी में चलने से भी ये बैक्टीरिया हमारे शरीर में चिपक कर अपना असर दिखाना शुरू कर देते हैं। अक्सर बच्चे बरसात में खेलते-कूदते वक्त ध्यान नहीं देते और गंदे पानी में पैर डाल देते हैं। इस तरह इस मौसम में बच्चे कान के संक्रमण से अधिक प्रभावित होते हैं।

लक्षण

कानों में संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में सूजन, जलन, खुजली, बंद कान, कान में दर्द, कान से बदबूदार पानी रिसना, कभी-कभी चक्कर आना, सिरदर्द, सुनाई कम पड़ना, बुखार आदि हैं। जब भी इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तुरंत सावधान हो जाना चाहिए और किसी विशेष की सलाह लेनी चाहिए।

सावधानी

बरसात के मौसम में अपने कानों को साफ और सूखा रखना चाहिए। नहाते समय ध्यान रखें कि पानी कान में न जाने पाए। नहाने के बाद हमेशा कानों को अच्छी तरह पोंछ कर साफ और सूखा कर लेना चाहिए। इसके लिए सूखे और साफ सूती कपड़े का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ईयरबड्स और काटन स्वैब से दूर रहें, क्योंकि नम मौसम में काटन स्वैब बैक्टीरिया को फंसा सकते हैं और ये आपके कान में संक्रमण फैला सकते हैं।

चूंकि गले का संक्रमण भी हमारे कान में संक्रमण तेजी से फैला सकता है, इसलिए आपको ठंडे भोजन और पेय से बच कर अपने गले की उचित देखभाल करनी चाहिए।

आजकल लोगों में फोन में गाने, समाचार आदि सुनने का चलन बढ़ रहा है। इसके लिए अक्सर लोग ईयरफोन का उपयोग करते हैं। मगर कम ही लोग ईयरफोन की सफाई का ध्यान रखते हैं। इस मौसम में ईयरफोन भी कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस का वाहक हो सकता है।

इसलिए कानों के संक्रमण से बचने के लिए ईयरफोन को साफ रखना बेहद जरूरी है। इसे संक्रमणमुक्त करने के लिए सेनेटाइजर आदि का का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जब भी कानों में परेशानी पैदा हो, एक बार विशेषज्ञ से जरूर मिल लेना चाहिए। कई लोग राह चलते कानों का मैल साफ करने वालों की मदद लेते हैं। उनका मानना है कि कान का मैल साफ हो जाए, तो कान की समस्या दूर हो जाएगी। मगर यह जोखिम भरा काम हो सकता है।

बहुत सारे लोग देसी उपचार का सहारा लेते हैं और तेल आदि में कुछ वनस्पतियों आदि का रस मिला कर डालते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए, क्योंकि कान में कुछ भी डालना जोखिम भरा काम हो सकता है। (यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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