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कोरोना संक्रमण से बचाव रोग प्रतिरोध के लिए योग

कोरोना महामारी के दौरान सांस लेने में तकलीफ की समस्या सबसे ज्यादा देखने में आ रही है। लिहाजा इसमें प्राणायाम करने से काफी लाभ मिलेगा।

कोरोना से बचाव में योग और प्राणायाम का बहुत महत्व और उपयोगिता है।

कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच देशभर में जिस तरह लोगों की जानें जा रही हैं और हर तरफ एक भय का माहौल है, उसने सबको अपनी सेहत के प्रति अतिरिक्त रूप से सोचने और जागरूक रहने को प्रेरित किया है। इसका सबसे अच्छा नतीजा देखने में यह आ रहा है कि लोग अपने खानपान सहित रोजाना की जीवनशैली को संयमित और व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा करते हुए उनके मन में एक स्वाभाविक आकर्षण योग-प्राणायाम और आयुर्वेद के प्रति भी बढ़ा है। इन प्रयासों के बेहतर नतीजे भी सामने आ रहे हैं। इससे कई लोगों ने खासतौर पर सांस और पाचन से जुड़ी समस्याओं से निजात पाने में सफलता भी हासिल की है। बेहतर हो कि योग और प्राणायाम के अभ्यास से पहले इस बारे में थोड़ी जानकारी हासिल कर ली जाए ताकि इनका हमें ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले।

कोरोना महामारी के संकट के बीच महिलाओं को आॅनलाइन योग प्रशिक्षण देने में जुटीं योग शिक्षिका शालिनी झा बताती हैं कि मौजूदा हालात में योगासनों में हमें खासतौर पर सूक्ष्म व्यायाम, संधि संचालन, ताड़ासन, भुजंगासन, धनुरासन, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, शशांकासन आदि को अपने नियमित अभ्यास का हिस्सा बनाना चाहिए। ऐसे समय में अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योगनिद्रा का अभ्यास भी बहुत लाभदायक है। साथ ही ज्ञानमुद्रा, जलमुद्रा एवं प्राणमुद्रा का अभ्यास आपकी मानसिक शांति के साथ शरीर में पानी की कमी दूर करने और ऊर्जा बढ़ाने में काफी लाभदायक सिद्ध होगा।

कुछ खास प्राणायाम
कोरोना महामारी के दौरान सांस लेने में तकलीफ की समस्या सबसे ज्यादा देखने में आ रही है। लिहाजा इसमें प्राणायाम करने से काफी लाभ मिलेगा। शालिनी बताती हैं कि प्राणायाम के जरिए श्वसन तंत्र मजबूत होता है और कोरोना संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। इसीलिए कोरोनाकाल में कुछ चुनिंदा प्राणायाम करने का अभ्यास करने की सलाह आयुर्वेद के जानकार भी दे रहे हैं। सांस लेने में आसानी से लेकर शरीर की रोग-निरोधक क्षमता बेहतर करने के लिए खासतौर पर अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, कपालभाति और सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।

-अनुलोम-विलोम से आपको सामान्य रूप से होने वाली सर्दी- खांसी और जुकाम से बचाव में मदद मिलती है। दरअसल, प्रणायाम को करने से श्वसन क्रिया बेहतर हो जाती है। इसके लिए आराम से एक जगह पर बैठ जाएं। आंखों को बंद करें और प्राणायाम शुरू करें। दाहिनी नाक से सांस लें, बाईं नाक बंद रखें और फिर बाईं नाक से सांस छोड़ें, दाहिनी नाक बंद रखें। यही क्रम आगे भी बनाए रखें। यह अभ्यास कम से कम 15 मिनट तक जरूर करें।

-भस्त्रिका प्राणायाम भी कोरोना संक्रमण से बचाने में काफी मददगार है। इसे करने से शरीर की कोशिकाएं स्वस्थ बनी रहती हैं और श्वसन क्रिया से जुड़ी बीमारी से बचाव में मदद मिलती है। इस प्रााणायाम के लिए आराम से एक जगह पर ध्यान मुद्रा में बैठें। आंखों को बंद करें और अपनी पीठ सीधी रखें। पहले धीरे-धीरे गहरी सांस लें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। सांस लेते वक्तसकारात्मक ऊर्जा पर ध्यान दें। इसी तरह सांस छोड़ते समय बीमारी को दूर करने की सोचें। इस तरह प्राणायाम का अभ्यास आपको स्वस्थ और सकारात्मक रहने में काफी मदद करेगा।

-मौजूदा स्थिति में भ्रामरी प्राणायाम भी नियमित करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए आराम से शांत जगह पर बैठें। अंगूठे और उंगलियों से कान और आंखें बंद करें। नाक से सांस लें और मुंह बंद रखें। मधुमक्खी की तरह गुनगुनाते हुए सांस छोड़ें। 15 मिनट तक का यह नियमित अभ्यास दिन में 5-7 बार करना चाहिए।

-कपालभाति एक प्रचलित प्राणायाम है। इस प्राणायाम को करने की प्रक्रिया में सांस लेते और छोड़ते हैं। रोजाना कम से कम पांच मिनट तक इस प्रणायाम को करने से आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी और आप किसी भी तरह के संक्रमण से बचे रहेंगे। इसके लिए आराम से एक जगह पर ध्यानमुद्रा में बैठें। आंखों को बंद करें, पीठ सीधी रखें। दोनों नाक से गहरी-गहरी सांस लें। पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को आप सामान्य, मध्यम और तीव्र गति से कर सकते हैं।

-सूर्य नमस्कार नियमित तौर पर करने से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है। इससे शरीर में रक्त का संचरण सुचारू रूप से होता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे नियमित तौर पर करने श्वसन से लेकर पाचन तक शरीर को हर लिहाज से चुस्त-दुरुस्त करने में कारगर मदद मिलती है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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