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शख्सियत: प्रतिभा के अद्भुत पारखी बिमल रॉय, जानिए फिल्मी सफर और निर्देशन क्षमता

निधन: बिमल रॉय ‘चैताली’ फिल्म पर काम कर ही रहे थे कि 1966 में 8 जनवरी को मुंबई में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया।

Author July 15, 2018 1:58 AM
जन्म : 12 जुलाई, 1909, निधन : 8 जनवरी, 1966।

बिमल रॉय का जन्म ढाका (पूर्वी बंगाल) के एक जमींदार परिवार में हुआ था। वे मशहूर फिल्म निर्देशक थे। वे विशेष रूप से ‘दो बीघा जमीन’, ‘परिणीता’, ‘बिराज बहू’, ‘मधुमती’, ‘सुजाता’, ‘बंदिनी’ जैसी अपनी यथार्थवादी और समाजवादी फिल्मों के लिए विख्यात हैं। इतालवी नव-यथार्थवादी सिनेमा से प्रेरित होकर, विटोरियो डी सिका की ‘द साइकिल थीफ’ (1948) देखने के बाद उन्होंने ‘दो बीघा जमीन’ बनाई थी। उन्होंने अपने फिल्मी जीवन में कई पुरस्कार जीते, जिनमें ग्यारह फिल्मफेयर पुरस्कार, दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कान फिल्म समारोह का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं। उनकी फिल्म ‘मधुमती’ ने 1958 में नौ फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, जो सैंतीस सालों तक रिकॉर्ड था।

फिल्मी सफर
बिमल रॉय ने अपना फिल्मी सफर न्यू थियेटर स्टूडियो, कोलकाता में कैमरामैन के रूप में शुरू किया। वे 1935 में आई केएल सहगल की फिल्म ‘देवदास’ के सहायक निर्देशक थे। मानवीय अनुभूतियों के गहरे पारखी और सामाजिक-मनोवैज्ञानिक विश्लेषक होने के कारण उनकी फिल्मों में सादगी बनी रही। उनमें कहीं से भी बड़बोलेपन की झलक नहीं मिलती। सिनेमा तकनीक पर उनकी मजबूत पकड़ थी, जिससे उनकी फिल्में दर्शकों को प्रभावित करती हैं। शायद यही वजह है कि जब उनकी फिल्में आर्इं तो प्रतिस्पर्धा में दूसरा निर्देशक नहीं ठहर सका।

निर्देशन क्षमता
बिमल रॉय ने अपनी फिल्मों में सामाजिक समस्याओं को उठाया और उनके समाधान का भी प्रयास किया। ‘बंदिनी’ और ‘सुजाता’ के माध्यम से वे समाज को संदेश देते हैं। देशभक्ति और सामाजिक फिल्मों से अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाले बिमल रॉय की कृतियों के विषय का फलक काफी व्यापक रहा और वे किसी एक छवि में नहीं बंधे। एक ओर वे सामाजिक बुराई का संवेदना के साथ चित्रण कर रहे थे तो दूसरी ओर उनका ध्यान स्त्रियों के सम्मान और उनकी पीड़ा की तरफ भी था। बिमल दा ने हिंदी फिल्मों की नायक केंद्रित कथा की परिपाटी को बदलते हुए नायिकाओं को कहानी के केंद्र में रख कर फिल्में बनार्इं। ऐसी फिल्मों में ‘मधुमती’, ‘बंदिनी’, ‘सुजाता’, ‘परिणीता’, ‘बिराज बहू’ आदि शामिल हैं।

प्रतिभा के अद्भुत पारखी
बिमल रॉय प्रतिभा के अद्भुत पारखी थे। मूल रूप से संगीतकार के रूप में ख्यातिप्राप्त सलिल चौधरी के लेखन की ताकत को उन्होंने पहचाना और ‘दो बीघा जमीन’ में उनका उपयोग किया। ‘दो बीघा जमीन’ ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपना डंका बजा दिया। अगर प्रगतिशील साहित्य की तरह ‘प्रगतिशील सिनेमा’ की बात की जाए, तो बिमल रॉय निस्संदेह इसके पुरोधा माने जाएंगे।

प्रमुख फिल्में: बंदिनी (1963), सुजाता (1959), मधुमती (1958), बिराज बहू (1954), दो बीघा जमीन (1953) और परिणीता (1953)।

पुरस्कार

1964 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – बंदिनी
1961 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – परख
1960 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – सुजाता
1959 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – मधुमती
1955 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – परिणीता
1954 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – बिराज बहू
1953 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – दो बीघा जमीन

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