ताज़ा खबर
 

शख्सियत: गीता दत्त

मेरा सुंदर सपना बीत गया, मैं प्रेम में सब कुछ हार गई, बेदर्द जमाना जीत गया... यह गीत गीता दत्त ने फिल्म ‘दो भाई’ में गाया था, जिसे उन्होंने अपने मुक्त कंठ से दूसरी बार तब गाया था, जब वे पति की बेवफाई से परेशान होकर मथुरा के एक मंदिर में गर्इं। यह समय गीता के लिए तिल-तिल मरने वाला था। एक ऐसी महान पार्श्व गायिका, जिन्होंने जितनी सफलता अपने जीवन में पाई उतनी ही पीड़ा भी सही। बंगाल के फरीदपुर में जन्मीं गीता का जीवन संघर्ष में बीता। उनके गीतों की खनक आज भी हमारे कानों में गूंजती है।

Author November 25, 2018 3:39 AM
गीता दत्त (Express Archive)

जन्म : 23 नवंबर, 1930
निधन : 20 जुलाई, 1972

मेरा सुंदर सपना बीत गया, मैं प्रेम में सब कुछ हार गई, बेदर्द जमाना जीत गया… यह गीत गीता दत्त ने फिल्म ‘दो भाई’ में गाया था, जिसे उन्होंने अपने मुक्त कंठ से दूसरी बार तब गाया था, जब वे पति की बेवफाई से परेशान होकर मथुरा के एक मंदिर में गर्इं। यह समय गीता के लिए तिल-तिल मरने वाला था। एक ऐसी महान पार्श्व गायिका, जिन्होंने जितनी सफलता अपने जीवन में पाई उतनी ही पीड़ा भी सही। बंगाल के फरीदपुर में जन्मीं गीता का जीवन संघर्ष में बीता। उनके गीतों की खनक आज भी हमारे कानों में गूंजती है।

व्यक्तिगत जीवन
गीता राय चौधरी यानी गीता दत्त का जन्म भरे-पूरे जमींदार परिवार में हुआ था। चालीस के दशक की शुरुआत में गीता का परिवार अपनी सारी संपत्ति छोड़ कर असम और कलकत्ता में चला गया, फिर 1942 में उनका परिवार सपनों की नगरी मुंबई आ बसा। गीता उस समय बारह साल की थीं और बंगाली हाई स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं।

ऐसे हुआ प्यार
‘बाजी’ की शूटिंग चल रही थी। इस फिल्म का निर्देशन कर रहे थे गुरु दत्त। इस फिल्म का एक गीत गाने के लिए गीता आर्इं थीं। बीस-इक्कीस साल की खूबसूरत युवती गीता उस समय अपनी सफलता के शिखर पर थीं। दोनों की पारिवारिक पृष्ठभूमि अलग-अलग थी। गुरु दत्त उतने समृद्ध नहीं थे, जितनी गीता थीं। फिर भी दोनों को प्यार हो गया। दोनों ने 26 मई, 1953 को शादी कर ली। उनके तीन बच्चे- तरुण, अरुण और नीना हुए।

संगीत की शिक्षा
के. हनुमान प्रसाद से संगीत की शिक्षा लेने के बाद गीता को 1946 में फिल्म भक्त प्रहलाद में पहली बार गाने का मौका मिला। उस फिल्म में हनुमान प्रसाद संगीत निर्देशक थे। उस समय गीता सोलह साल की थीं। तब उन्हें दो गीतों की दो पंक्तियां गाने के लिए दी गर्इं थीं। 1947 में उन्होंने हनुमान प्रसाद के लिए दूसरी बार गाना गया।

जिंदगी में कलह
गुरु दत्त और गीता दत्त की शादी के बाद जब तीन बच्चे हुए फिर दोनों में कलह बढ़ने लगी। इस कलह का कारण सभी लोग अलग-अलग बताते हैं। 1957 में ‘गौरी’ फिल्म की शुरुआत होने वाली थी। यह फिल्म गुरु दत्त गीता दत्त के लिए बना रहे थे, क्योंकि गीता की संगीत के अलावा अभिनय में भी रुचि थी। पर कुछ समय बाद ही इस फिल्म की शूटिंग को रोकना पड़ा। गुरु दत्त 1958 में ‘कागज के फूल’ फिल्म बना रहे थे। इस फिल्म के बाद गुरु दत्त के संबंध वहीदा रहमान के साथ बनने लगे। इस फिल्म में गीता ने सारे गीत गाए थे। वहीदा से बढ़ती नजदीकियां गीता को परेशान करने लगीं। पति की यह बेवफाई गीता से सही नहीं गई। उन्होंने शराब और नींद की गोलियां लेनी शुरू कर दी। घर में रोज झगड़ा होने लगा। गीता अवसाद में रहने लगीं। गुरु दत्त ने 1964 में खुदकुशी कर ली।

पति की मृत्यु के बाद
गुरु दत्त की खुदकुशी के बाद गीता की जिंदगी और कठिन हो गई। वे गम में पहले से ज्यादा शराब पीने लगीं। ऐसे में घर की हालत खराब होने लगी। गीता ने कम फीस में काम करना भी शुरू कर दिया और स्टेज शो भी करने लगीं। उन्होंने बंगाली फिल्म बधु बरन में प्रमुख भूमिका निभाई। 1971 में आई ‘अनुभव’ के लिए उन्होंने गीत गाए। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए लगभग बारह सौ गीत गाए। कई गीत कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी गाए थे।

निधन: लिवर की बीमारी की वजह से गीता का निधन 1972 में मुंबई में हो गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X