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सेहत: सर्दी में बुजुर्गों की देखभाल

यों तो सर्दियां किसी के लिए पसीने से निजात दिलाती हैं, तो किसी के लिए गरम बिस्तर, गरमागरम चाय या गुनगुनी धूप का आनंद उठाने का सुख देती हैं। मगर बुजुर्गों के लिए सर्दियां कई तरह की परेशानियां लेकर आती हैं।

Author November 25, 2018 3:59 AM
प्रतीकात्मक फोटो

यों तो सर्दियां किसी के लिए पसीने से निजात दिलाती हैं, तो किसी के लिए गरम बिस्तर, गरमागरम चाय या गुनगुनी धूप का आनंद उठाने का सुख देती हैं। मगर बुजुर्गों के लिए सर्दियां कई तरह की परेशानियां लेकर आती हैं। बुजुर्ग इस मौसम में बाकी ऋतुओं के मुकाबले अधिक बीमार पड़ते हैं। इस वजह से घर के सदस्यों को उनकी पहले से ज्यादा देखभाल करनी पड़ती है। दूसरी ओर दिल्ली समेत अनेक महानगरों में वायु प्रदूषण बढ़ने से यहां के बुजुर्गों को अपना विशेष खयाल रखना पड़ता है। वातावरण में बढ़ती धुंध के कारण उन्हें सांस लेनें में तो दिक्कत होती है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता और त्वचा संबंधी रोग भी बढ़ रहे हैं। अधिक सर्दी की वजह से हमारा रक्त गाढ़ा होने से नाड़ियों में संकुचन बढ़ने लगता है। संकुचन की वजह से हृदय को शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस वजह से रक्त में दबाव बढ़ता है और हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी में उम्रदराज लोगों को हार्ट अटैक की आशंका सबसे अधिक होती है। इसके अलावा इस मौसम में हाइपोथर्मिया का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। जब शरीर का तापमान सामान्य से कम होने लगता है, तब हाइपोथर्मिया की परेशानी होती है। यह परेशानी बुजुर्गों को अधिक होती है। तो इस सर्दी में आप स्वस्थ रहें, उसके लिए कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है।

सूरज निकलने से पहले बाहर न निकलें
अधिकतर विशेषज्ञ इस मौसम में बुजुर्गों को सलाह देते हैं कि उन्हें घूमने-टहलने के लिए तड़के सुबह घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस वक्त ठंड और प्रदूषण अधिक होता है।

प्रदूषण से बचें
लगातार खबरें आ रही हैं कि देश में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, जिससे हवा जहरीली हो रही है। प्रदूषण के कण नीचे आ रहे हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इसलिए जब भी आप बाहर निकलें, तो मास्क पहन कर निकलें। सेहत के साथ कोई लापरवाही न करें।

त्वचा का रखें खयाल
बुजुर्ग, बच्चे या वयस्कों को सर्दियों में अपनी त्वचा का विशेष खयाल रखना चाहिए। दरअसल, यही वह मौसम है जब शरीर से पसीना आना बंद हो जाता है। इससे त्वचा में खिंचाव बढ़ जाता है। और हमारी त्वचा फटनी शुरू हो जाती है। साबुन का कम से कम इस्तेमाल करें।

लकवा और हृदयघात के मरीज रहें सावधान
सर्दी में जिन मरीजों को लकवा या हृदयघात हो चुका है, वे अधिक सावधान रहें। क्योंकि इस मौसम में बीमारियां अधिक तेजी से फैलती हैं और बुजुर्ग इसकी चपेट में जल्दी आते हैं। इसलिए अगर बाहर कोहरा है, तो बुजुर्गों को बाहर नहीं निकलना चाहिए। रक्त का प्रवाह असंतुलित होने से हृदय की तकलीफ बढ़ सकती है, इसलिए जब मौसम अधिक ठंडा हो, तो घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

खानपान का रखें ख्याल
इस मौसम में बुजर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसलिए उन्हें अपने खानपान का विशेष खयाल रखना चाहिए। हल्का खाना खाएं। अक्सर सर्दी में घरों में मांस और घी का इस्तेमाल बढ़ जाता है और इतना भारी खाना बुजुर्गों को जल्दी पचता नहीं है। इसलिए बुजुर्गों को हमेशा संतुलित और हल्का खाना खिलाएं। हरी सब्जियां खूब खिलाएं। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जिनसे उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़े।

शरीर को गतिशील रखें
ऐसा नहीं कि आप बुजुर्ग हैं तो कुछ भी नहीं करेंगे। बल्कि इस मौसम में तो बुजुर्गों को हमेशा कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। बूढ़ा शरीर होना चाहिए मन नहीं। शरीर को हमेशा गतिशील रखें। इससे आप खुद भी ऊजार्वान महसूस करेंगे।

जोड़ों का दर्द
बुजुर्गों में कैल्शयम की कमी की वजह से जोड़ों में दर्द होने लगता है। इससे बचने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं, जिनसे शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी की जा सके। साथ ही अगर इस मौसम में हड््डी संबंधी रोग अधिक बढ़ रहे हैं, तो हड््डी रोग विशेषज्ञ को तुरंत दिखाएं। क्योंकि बुजुर्गों को इन रोगों में कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

पहनावे पर दें ध्यान
उम्रदराज लोगों को इस मौसम में पूरी बाजू के गरम कपड़े पहनने चाहिए। कानों को ढक कर रखें। पैरों में गरम जुराबें पहनें। अगर ठंड अधिक है, तो दस्ताने भी पहन कर रखें।

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