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सेहत: गर्दन का दर्द

एक शोध के अनुसार बीते कुछ सालों में देश में युवाओं में गर्दन और पीठ दर्द की समस्या बढ़ी है। वहीं एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका में साठ वर्ष से अधिक आयु के पचासी फीसद से अधिक लोग इस बीमारी के शिकार हैं।

Author August 11, 2019 5:37 AM
गर्दन पर अतिरिक्त दबाव देर तक न पड़ने दें।

अक्सर हम गर्दन में होने वाले दर्द को थकान या आम दर्द समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यह दर्द बेहद खतरनाक भी हो सकता है। यह दर्द सर्वाइकल का भी हो सकता है। अगर आप घंटों कंप्यूटर के सामने बैठ कर काम करते हैं या फिर कुछ ऐसा काम, जिसमें गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, तो ये लक्षण सर्वाइकल के हो सकते हैं। सर्वाइकल को गर्दन का आर्थराइटिस भी कहा जाता है। एक शोध के अनुसार बीते कुछ सालों में देश में युवाओं में गर्दन और पीठ दर्द की समस्या बढ़ी है। वहीं एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका में साठ वर्ष से अधिक आयु के पचासी फीसद से अधिक लोग इस बीमारी के शिकार हैं।

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस
सर्वाइकल दर्द सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस या आॅस्टियो आर्थराइटिस के कारण होने वाला दर्द है। इस स्थिति में गर्दन से जुड़ी हड्डियों, डिस्क या जोड़ों में हुए बदलाव के कारण होता है। गर्दन में मौजूद जोड़ पट्टियां समय के साथ कमजोर हो जाती हैं, जो सर्वाइकल दर्द के प्रमुख कारणों में से एक है। यह स्थिति अक्सर बुजुर्गों में पाई जाती है। हालांकि इसके लिए अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं, इसलिए आजकल युवा भी इस बीमारी की चपेट में हैं।
सर्वाइकल का इलाज उसके लक्षणों के आधार पर होता है। इसलिए इसके लक्षणों के लक्षित होने पर चिकित्सक का परामर्श लेना आवश्यक है।

कारण
गर्दन का ज्यादा इस्तेमाल : कुछ लोगों के रोजमर्रा का काम काफी थकाऊ होता है, जो रीढ़ पर दबाव डालता है। इसके अलावा घंटों बैठ कर काम करने से भी गर्दन पर दबाव बढ़ता है, जो धीरे-धीरे सर्वाइकल का दर्द बन जाता है। वहीं चिकित्सक इसकी वजह मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल को भी मानते हैं।

चोट : गर्दन या रीढ़ पर लगी चोट भी सर्वाइकल का कारण हो सकती है।

जोड़ों में दरार : बढ़ती उम्र के कारण रीढ़ की हड्डियों के जोड़ों में दरार आने लगती है, जिसकी वजह से ये डिस्क अपनी जगह से खिसकने लगती हैं। यह रीढ़ की हड््डी और उधर की नसों पर दबाव डालता है। और इसके लक्षण बाहों में दर्द और सुन्नता के रूप में आते हैं।

रीढ़ की हड्डियों में उभार आना : यह सर्वाइकल दर्द हड््डी में अतिवृद्धि के कारण होता है। इसमें रीढ़ की हड््डी और रीढ़ की अन्य हड््डी पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द होता है।
बैठने-चलने-फिरने की गलत मुद्राओं से भी सर्वाइकल होने की संभावना ज्यादा होती है।

लक्षण
’ शुरू-शुरू में गर्र्दन में दर्द और अकड़न महसूस होती है, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए लगातार बनी रहता है।
’ कंधे, बाजुएं और हाथों का सुन्न पड़ जाना।
’ गर्दन और कंधों में दर्द होना।
’ हाथ-पैरों में कमजोरी और झुनझुनी होना।
’ चलने-फिरने या दिनचर्या के काम को करने में परेशानी होना।
’ मांसपेशियों में खिंचाव होना।
’ गर्दन के पीछले हिस्से में दर्द होना।

राहत
व्यायाम, दवाएं और खाने में तिल का इस्तेमाल, हल्दी मिले दूध का सेवन जैसे अन्य घरेलू नुस्खों से इस दर्द में राहत मिल सकती है। गर्दन और कंधे को खींचने वाले व्यायाम से गर्दन के दर्द और अकड़न में राहत मिलती है। रोजाना ऐसे व्यायाम करने से कमजोर मांसपेशियों को मजबूत बनाया जा सकता है। इसके अलावा गरम पानी की थैली या बर्फ की थैली से सिंकाई करने पर भी सर्वाइकल दर्द में आराम मिलता है।

उपाय
’ सर्वाइकल के दर्द में सबसे ज्यादा राहत व्यायाम से होता है। इसलिए व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें। चिकित्सक के बताए मुताबिक रोज थोड़ा व्यायाम करें। इससे गर्दन और कंधे में अकड़न नहीं होती है।
’ इसके दर्द से बचने के लिए सबसे पहले अपने बैठने की मुद्रा में सुधार लाएं। कुर्सी पर बैठते समय अपनी मुद्रा का खास खयाल रखें। अपनी पीठ को कुर्सी से लगा कर रखें, साथ ही पैरों को जमीन पर सीधा रखें।
’ कूबड़ निकाल कर या फिर झुक कर बैठने-चलने की आदत बदल डालें। गाड़ी चलाते समय भी अपनी पीठ को सीधी रखें।
’ दफ्तर में कंप्यूटर पर काम करते समय थोड़ा विराम लें और गर्दन-कंधों को आराम करने दें। समय हो तो गर्दन का व्यायाम कर लें।
’ नर्म और कम ऊंचाई वाले तकिए पर सोएं।
’ कई बार दर्द का कारण शरीर में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी होती है। ऐसे में सुबह के समय सूरज की रोशनी में पंद्रह मिनट से एक घंटे तक बैठने की आदत डालें। कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए दिन में दो बार एक-एक गिलास दूध और कैल्शियम युक्त आहार ग्रहण करें।

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