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दाना-पानी: मौसमी देसी जायका

अक्तूबर के बाद का मौसम मैदानी भागों में भरपूर साग-सब्जियों का होता है। मगर हमें शहरी और विदेशी मिजाज के भोजन की इस कदर आदत पड़ चुकी है कि इस बात को भूल चुके हैं।

Author Published on: November 3, 2019 6:01 AM
मूली की तरकारी

मानस मनोहर

भोजन में हमेशा मौसमी साग-सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए। जहां तक हो सके, मौसमी अन्न का भी उपयोग करें। आयुर्वेद के अनुसार वही भोज्य हमारे शरीर के अनुकूल होता है, जो जहां हम रहते हैं वह वहीं उगाया गया हो और उसी मौसम में खाया जाए, जिस मौसम में उसे उगाया गया है। अक्तूबर के बाद का मौसम मैदानी भागों में भरपूर साग-सब्जियों का होता है। मगर हमें शहरी और विदेशी मिजाज के भोजन की इस कदर आदत पड़ चुकी है कि इस बात को भूल चुके हैं। इस बार देसी तरीके से बनने वाली कुछ साग-सब्जियों के बारे में बात करते हैं।

मूली की तरकारी
मूली को बहुत सारे लोग आमतौर पर सलाद के रूप में खाना पसंद करते हैं। कुछ लोग इसके पत्तों का साग बनाते हैं। कुछ लोग इसके परांठे खाना पसंद करते हैं, तो कुछ दही के साथ मिला कर इसकी चटनी भी बनाते हैं। कुछ लोग राई के साथ इसका अचार भी बनाते हैं। मगर ऐसे भी अनेक लोग हैं, जिन्हें मूली खाना बिल्कुल पसंद नहीं। वे मानते हैं कि मूली से बदबू आती है। जबकि आयुर्वेद में मूली के अनेक गुण बताए गए हैं। अगर किसी को पीलिया यानी जॉइंडिश हो गया है, तो उसे मूली का रस पीने को कहा जाता है या अपने भोजन में अधिक से अधिक मूली का उपयोग करने को कहा जाता है। इसका रस पीलिया के कीटाणुओं को नष्ट कर देता है। जिन्हें पाचन संबंधी समस्या रहती है, अगर वे मूली की तरकारी खाएं, तो उन्हें बहुत लाभ मिलता है। मूली में फाइवर यानी रेशे बहुत होते हैं, जो पेट को साफ रखने में मदद करते हैं। इसलिए मूली की देसी तरीके से तरकारी बनाएं और इस मौसम में उसका लुत्फ उठाएं। कभी-कभी देसी भोजन भी करना चाहिए।

मूली की तरकारी बनाना बहुत आसान है। इसमें न तो बहुत सारे मसालों की जरूरत पड़ती है, न बहुत तैयारी करनी पड़ती है। फटाफट काटा और झटपट बना लिया। जिन लोगों को तेल और मसालों से परहेज है, उनके लिए यह उत्तम तरकारी है। तरकारी बनाने के लिए मूली का छिलका उतार लीजिए। उसे साफ कर मनचाहे आकार में काट लें- गोल, लंबा जैसा चाहें। पत्तों को अलग कर लीजिए। उसका साग बना सकते हैं। अगर चाहें, तो कुछ पत्ते भी उसमें काट कर डाल सकते हैं। यों पत्तों का अलग से साग बना कर खाएं, नहीं तो सब्जी में अतिरिक्त चरपरापन आने की संभावना रहती है और जो लोग यह तरकारी नहीं खाते, उन्हें पसंद नहीं आएगी।

अब एक कुकर में एक चम्मच सरसों तेल गरम करें। उसमें आधा चम्मच राई और इतना ही जीरे और अजवाइन का तड़का दें। अगर पसंद हो तो एक-दो साबुत लाल मिर्च भी तड़के में डाल सकते हैं। फिर उसमें कटी हुई मूली छौंक दें। इसमें जरूरत भर का नमक, थोड़ा हल्दी पाउडर और एक चम्मच सब्जी मसाला डालें और इन सबको चला कर ठीक से मिला लें। अगर इसे रसेदार बनाना चाहते हैं, तो आधा कटोरी पानी डालें। वैसे मूली गरम होने के बाद पानी छोड़ती है और वह अपने ही पानी से पक जाएगी। इसलिए अगर इसे ज्यादा रस वाली खाना नहीं पसंद करते तो पानी न डालें। अब कुकर का ढक्कन लगा दें। मध्यम आंच पर एक से दो सीटी के बाद बंद कर दें। जब सारी भाप निकल जाए, तो कुकर को खोल कर सब्जी निकालें और रोटी या परांठे के साथ गरमा-गरम खाएं।

गांठ गोभी की सब्जी
मूली की तरह गांठ गोभी भी रेशेदार सब्जी होती है। इसकी गांठ और पत्ते दोनों की सब्जी बनती है। मूली की तरह इसमें चरपरापन नहीं होता। थोड़ी मिठास होती है। चाहें तो इसमें हरी मटर, गाजर वगैरह डाल कर भी सब्जी बनाई जा सकती है। इसकी रसेदार और सूखी दोनों तरह से सब्जी बनती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभकारी होती है। चूंकि इसकी गांठ और पत्तों में रेशे भरपूर होते हैं, इसलिए यह पेट के लिए बहुत गुणकारी सब्जी है। जिन्हें पाचन संबंधी समस्या रहती हो, उन्हें हफ्ते में कम से कम एक बार यह सब्जी अवश्य खानी चाहिए। कोई समस्या न हो, तो भी खाएं।

सब्जी बनाने के लिए पहले गांठ गोभी के पत्तों को अलग कर लें। इनमें जो पत्ते अधिक कड़े हों या पीले पड़ रहे हों उन्हें फेंक दें। नरम पत्तों को ले लें। फिर गोभी की गांठ का छिलका उतार लें। छिलका उतारते समय ध्यान रखें कि भीतर का कोमल हिस्सा ही रहे, क्योंकि इसके छिलके में कठोर रेशे होते हैं, जो खाते समय दांतों में फंसते हैं और इससे सब्जी को पकने में भी देर लगती है। छिलका उतारने के बाद गांठ को मनचाहे आकार में काट लें। इसी के साथ पत्तों को भी अच्छी तरह धोकर काट लें। अगर इसके साथ गाजर और मटर मिलाना चाहें, तो मिला सकते हैं, नहीं तो यह सब्जी अपने आप में पर्याप्त है।

अब कड़ाही में एक चम्मच सरसों का तेल गरम करें। उसमें राई, जीरा, अजवाइन और साबुत लाल मिर्च का तड़का दें। उसमें सब्जी को छौंक दें। थोड़ा-सा हल्दी पाउडर, जरूरत भर का नमक और आधा चम्मच सब्जी मसाला या सिर्फ धनिया और जीरा पाउडर डालें और आधा कटोरी पानी डाल कर कड़ाही पर ढक्कन लगा दें। मध्यम आंच पर पकने दें। जब गांठ गोभी के टुकड़े पक कर नरम हो जाएं, तो आंच बंद कर दें। सब्जी तैयार है। इसके ऊपर कुछ काली मिर्च के दाने कूट कर डालें और मिला लें। गांठ गोभी की सूखी सब्जी भी बना सकते हैं। जब भी सूखी सब्जी बनानी हो, तो पानी का उपयोग न करें। आंच मद्धिम रख कर पकाएं, ताकि सब्जी जलने न पाए। बीच-बीच में चलाते रहें। गांठ गोभी के टुकड़े पक कर नरम हो जाएं, तो आंच बंद कर दें। इसे चावल, रोटी, परांठे किसी के भी साथ खा सकते हैं।

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