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कहानी: घमंड का नतीजा

इंद्रजीत कौशिक मुद्र से उठने वाली वाष्प से बने उस बादल को हवा में उड़ते हुए बहुत मजा आ रहा था। आकाश में उड़ते हुए उस काले बादल को देख कर जमीन पर रहने वाले लोगों को बड़ा हर्ष हुआ, उन्हें लगा कि अब बरसात होने ही वाली है। बादल भैया, बादल भैया, जल्दी से […]

Author Published on: December 8, 2019 5:36 AM
घमंड का नतीजा

इंद्रजीत कौशिक

मुद्र से उठने वाली वाष्प से बने उस बादल को हवा में उड़ते हुए बहुत मजा आ रहा था। आकाश में उड़ते हुए उस काले बादल को देख कर जमीन पर रहने वाले लोगों को बड़ा हर्ष हुआ, उन्हें लगा कि अब बरसात होने ही वाली है। बादल भैया, बादल भैया, जल्दी से पानी बरसाओ न, देखो गर्मी के मारे हम सब सूखते जा रहे हैं। बगिया के पौधों ने बादल को नीचे से गुहार लगाई। बादल ने मुरझाए हुए फूलों और पौधों को देखा तो वह रूका नहीं बल्कि हंसता हुआ आगे बढ़ गया। यह देख कर पौधे निराश हो गए।

बादल उड़ता हुआ आगे बढ़ा तो एक जगह लोगों का झुंड पानी के लिए तरस रहा था। उनके पास ना तो प्यास बुझाने के लिए पानी बचा था ना नहाने धोने के लिए। बादल को देख कर वे बहुत खुश हुए। उन सबने भी बादल से बरसने का आग्रह किया पर बादल ने उनकी भी न सुनी। इस तरह प्यास से परेशान लोगों को पीछे छोड़ता हुआ बादल आगे बढ़ता गया। दूसरे बादलों ने उस नए बादल को बहुत समझाया कि तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। लोगों की प्यास बुझाने में ही हमारे जीवन की सार्थकता है।

पर बादल ने उनकी सलाह सुनी अनसुनी कर दी। वह उसी तरह अपने घमंड में चूर आगे बढ़ता हुआ एक जगह पहुंचा तो उसने देखा कि एक कुम्हार मिट्टी के घड़े बनाकर सूखने के लिए रख रहा था। बादल को न जाने क्या सूझी कि उसने कच्चे मिट्टी के घड़ो पर पानी बरसा दिया। पानी गिरा तो कच्चे घड़े गल गए। कुम्हार की मेहनत पर पानी फेर कर बादल को बहुत मजा आया।

यह तुमने क्या किया मूर्ख? कुछ गरीब कुम्हार की मेहनत मिट्टी में मिलाकर तुम्हें क्या मिला? तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था भैया। आकाश में उड़ रही उस पतंग ने बादल को डांटा तो बादल को गुस्सा आ गया। उसमें पानी के कुछ छींटे कागज की बनी पतंग पर भी डाल दिए। पानी गिरा तो कागज भीगने से पतंग भी फट गई और वह नीचे जमीन पर जा गिरी। उसका यह हाल देखकर बादल ने घमंड से इतराते हुए ठहाका लगाया और आगे बढ़ गया।

एक-एक करके सभी ने समझाया पर उस बादल ने किसी की एक न सुनी। अब तो उसे लोगों को परेशान करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने में मजा आने लगा था। हवा बहुत देर से बादल की कारस्तानियों को देख रही थी।  मूर्ख बादल, इतना घमंड करना उचित नहीं। तुम्हारे जीवन का लक्ष्य प्यासे लोगों की प्यास बुझा ना है ना की पहले से परेशान लोगों को दुखी करना। अभी भी वक्त है संभल जाओ और किसी खेत में जाकर बरसो ताकि खेत हरा भरा हो सके। आसपास बह रही हवा ने बादल को प्यार से समझाया तो उसने फिर से जोर से ठहाका लगाया।

लगता है तुम ने पतंग की हालत देखकर भी कोई सबक नहीं सीखा जो मुझे समझाने चली हो। मैं तुम्हारा गुलाम नहीं जो तुम्हारे हुक्म का पालना करूं, मेरे रास्ते से हट जाओ वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। बादल ने उल्टे हवा को डांटा।
तुम शायद भूल रहे हो कि तुम मेरी मदद से उड़ रहे हो अगर मैं तुम्हारी सहायता ना करूं तो तुम एक इंच भी आगे पीछे नहीं हो सकते। इसलिए मेरी बात मानने में ही तुम्हारी भलाई है। अब जल्दी से इस प्यार से खेत पर बरस जाओ ताकि इन्हें गर्मी से राहत मिले और तुम्हारा जीवन भी सफल हो।
बहुत उपदेश हो गया, अब तुमने एक शब्द भी कहा तो इसका अंजाम बुरा होगा। गुरुर से भरे बादल ने गुस्से से कहा तो हवा ने उसे सबक सिखाने का निश्चय कर लिया। उसने अपना रुख पास के पहाड़ की तरफ कर लिया तो बादल तेजी से उसकी तरफ उड़ चला। पहाड़ी से टकराने से बचने के लिए बादल ने बहुत हाथ पाव मारे पर हवा के जोर के आगे उसकी एक न चली।
आखिर वही हुआ जिसका डर था। पहाड़ी से टकराते ही बादल का अस्तित्व समाप्त हो गया। घमंड बादल को ले डूबा। बिन पानी के बादल के उन टुकड़ों ने प्रण लिया कि आगे से वह कभी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। घमंड करने का नतीजा बुरा होता है यह बात उसे समझ में आ चुकी थी।

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