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शख्सियत: एनी बेसेंट

1913 से 1919 तक भारतीय राजनीतिक जीवन की अग्रणी विभूतियों में थीं। सितंबर 1916 में उन्होंने होमरूल लीग (स्वाराज्य संघ) की स्थापना की और स्वराज्य के आदर्श को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रचार किया।

Author Published on: October 6, 2019 5:48 AM
एनी बेसेंट

एनी बेसेंट का जन्म लंदन शहर में हुआ था। उनके ऊपर अपने माता-पिता के धार्मिक विचारों का गहरा प्रभाव था। पिता की मृत्यु के बाद धनाभाव के कारण इनकी माता उन्हें हैरो ले गईं। वहां मिस मेरियट के संरक्षण में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। फिर सत्रह वर्ष की आयु में अपनी मां के पास वापस आ गर्इं।

युवावस्था में इनका परिचय एक युवा पादरी रेवरेंड फ्रैंक से हुआ और 1867 में उन्हीं से एनी का विवाह भी हो गया। पति के विचारों से असमानता के कारण दाम्पत्य जीवन सुखमय नहीं रहा। ईश्वर, बाइबिल और ईसाई धर्म पर से उनकी आस्था डिग गई। फिर विख्यात पत्रकार विलियन स्टीड के संपर्क में आर्इं और वे लेखन तथा प्रकाशन के कार्य में रुचि लेने लगीं। अपना अधिकांश समय मजदूरों, अकाल पीड़ितों तथा झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को सुविधा दिलाने में व्यतीत किया। कई वर्षों तक इंग्लैंड की शक्तिशाली महिला ट्रेड यूनियन की सेक्रेटरी रहीं। उनका विचार था कि बिना स्वतंत्र विचारों के सत्य की खोज संभव नहीं है।

भारत प्रेम
1878 में उन्होंने पहली बार भारतवर्ष के बारे में अपने विचार प्रकट किए। उनके लेख तथा विचारों ने भारतीयों के मन में उनके प्रति स्नेह उत्पन्न कर दिया। 1883 में वे समाजवादी विचारधारा की ओर आकर्षित हुर्इं। उन्होंने ‘सोसलिस्ट डिफेन्स संगठन’ नामक संस्था बनाई। इस संस्था में उनकी सेवाओं ने उन्हें काफी सम्मान दिलाया। इस संस्था ने उन मजदूरों को दंड मिलने से सुरक्षा प्रदान की, जो लंदन की सड़कों पर निकलने वाले जुलूस में हिस्सा लेते थे।

1889 में एनी बेसेंट थियोसोफी के विचारों से प्रभावित हुर्इं। उनके अंदर एक शक्तिशाली अद्वितीय और विलक्षण भाषण देने की कला निहित थी। इसलिए बहुत शीघ्र उन्होंने अपने लिए थियोसोफिकल सोसायटी की एक प्रमुख वक्ता के रूप में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया। उन्होंने भारत को थियोसोफी की गतिविधियों का केंद्र बनाया।

वे 1893 में भारत आर्इं और उनका अधिकांश समय वाराणसी में बीता। वे 1907 में थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्ष निर्वाचित हुर्इं। उन्होंने पाश्चात्य भौतिकवादी सभ्यता की कड़ी आलोचना करते हुए प्राचीन हिंदू सभ्यता को श्रेष्ठ सिद्ध किया। धार्मिक, शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय पुनर्जागरण का कार्य शुरू किया। भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए उन्होंने ‘होमरूल आंदोलन’ का नेतृत्व किया।

1913 से 1919 तक वे भारतीय राजनीतिक जीवन की अग्रणी विभूतियों में थीं। सितंबर 1916 में उन्होंने होमरूल लीग (स्वाराज्य संघ) की स्थापना की और स्वराज्य के आदर्श को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रचार किया।

प्रमुख कृतियां
प्रतिभा-सम्पन्न लेखिका और स्वतंत्र विचारक होने के नाते एनी बेसेंट ने थियोसॉफी (ब्रह्मविद्या) पर करीब 220 पुस्तकें और लेख लिखे। ‘अजैक्स’ उपनाम से भी वे लिखती थीं। एनी बेसेंट ने भगवद्गीता का अंग्रेजी अनुवाद किया तथा अन्य कृतियों के लिए प्रस्तावनाएं भी लिखीं। भारतीय संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक सुधारों पर करीब अड़तालीस पुस्तकों और पैम्प्लेटों की रचना की। ‘डेथ ऐंड आफ्टर’, ‘इन द आउटर कोर्ट’, ‘कर्म’, ‘द सेल्फ ऐंड इट्स शीथ्स’, ‘द पाथ आॅफ डिसाइपिल्श’ ‘फॉर ग्रेट रिलीजन्स’, ‘थॉट पावर : इट्स कंट्रोल एंड कल्चर’, ‘इंडिया एंड ए एम्पायर’, ‘ब्रह्म विद्या’ अदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

निधन : 20 सितंबर, 1933 को उनका निधन हो गया।

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