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नन्ही दुनिया: ऐसे हुई बिजली की बचत

आलू के गरमा गरम स्वादिष्ट परांठे खाकर जब वे तीनों कैरम खेलने दूसरे कमरे में जाने लगे, तो शिखर ने पंखे का स्विच बंद नहीं किया, शेखू ने उसे याद दिलाया, तो वह बोला छोड़ न यार मम्मी कर देगी।

Author Published on: November 3, 2019 6:12 AM
महीने में तीन सौ रुपए और साल में तीन हजार छह सौ रुपए की बचत हो सकती है ।

संतोष उत्सुक

शेखू के स्कूल में छुट्टियां चल रही थीं। उसका सहपाठी शिखर उससे बार-बार कहता रहता था कि वह उसके घर जरूर आए। शिखर का घर शेखू के घर से आधा घंटे की दूरी पर नहर के उस पार था। वहां सुबह जाकर शाम को वापस आया जा सकता था। शेखू ने अपने पापा से, अपनी छोटी बहन अन्नू के साथ शिखर के घर जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा रविवार को जा आना। रविवार को उन्होंने अपनी-अपनी साइकिलें निकाली, कपड़े से साफ की और शिखर के घर के लिए निकल पड़े। उन्होंने नाश्ता शिखर के यहां ही करना था। शेखू की मम्मी ने पिछली शाम बेसन के लड्डू बनाए थे जो शिखर को बहुत पसंद थे । शिखर भी पहले से ही तैयार था, उसने अपनी मम्मी से आलू प्याज के परांठे बनाने के लिए तैयारी रखने को कहा था। नहर के किनारे साइकिल चलाकर शेखू और अन्नू को बहुत मजा आया । शिखर के घर पहुंचे तो वह बाहर ही उनका इंतजार कर रहा था।

आलू के गरमा गरम स्वादिष्ट परांठे खाकर जब वे तीनों कैरम खेलने दूसरे कमरे में जाने लगे, तो शिखर ने पंखे का स्विच बंद नहीं किया, शेखू ने उसे याद दिलाया, तो वह बोला छोड़ न यार मम्मी कर देगी। लेकिन आंटी तो किचन में हैं और व्यस्त हैं, शेखू बोला। अब शिखर ने स्विच बंद किया। काफी देर कैरम खेलने के बाद वे म्यूजिक सुनने लगे। किचन से शिखर की मम्मी की आवाज आई, खाने का समय हो गया, आओ बच्चों खाना लगा दिया है। कमरे से बाहर निकले तो इस बार फिर शिखर ने फिर स्विच बंद नहीं किया । शेखू हैरान, बोला तुमने फिर पंखे का स्विच आॅफ नहीं किया शिखर। वह लापरवाही से बोला, मैं तो रात को ट्यूब भी बंद नहीं करता। क्या तुम्हारे यहां बिजली मुफ्त में मिलती है, शेखू ने पूछा, पता है गांवों में लोगों को बिजली नहीं मिलती, मिलती है तो कुछ देर के लिए। आजकल गर्मी के मौसम में कितनी परेशानी होती है और कुछ लोग बिजली बर्बाद करते हैं। इस बीच शिखर की मम्मी उनके पास आकर बैठ गई । शिखर बोला, हमें क्या लेना किसी को मिले न मिले, मुझे तो पंखा और लाइट बंद न करने की आदत है। शेखू ने कहा गलत आदत है तुम्हारी, तुम्हें पता है बिजली बचाना ही बिजली बनाना है, हमें हर चीज का प्रयोग समझदारी से करना चाहिए ताकि बचत हो। शिखर की मम्मी ने कहा, बिलकुल ठीक, पंखे या टयूब की जरूरत न हो तो बंद रखें, जिस जगह बैठते हैं वहीं की बिजली जलानी चाहिए।

मान लो हम रोज दस रुपए की बिजली बचाते हैं तो एक महीने में तीन सौ रुपए और साल में तीन हजार छह सौ रुपए की बचत हो सकती है । इस पैसे से हम दूसरा जरूरी सामान खरीद सकते हैं। अन्नू ने कहा, शिखर भैया हमारी बचाई बिजली दूसरों के काम आ सकती है। यदि आप हमेशा याद रखो कि स्विच आफ करना है तो आपको आदत पड़ जाएगी । अब शिखर के दिमाग में बात टिकने लगी थी। उसे समझ आने लगा था कि उसकी थोड़ी सी सजगता से उनकी बचत और दूसरों का फायदा हो सकता है। उसने निश्चय कर लिया कि अब वह हमेशा ध्यान रखेगा। शाम को जब शेखू और अन्नू वापिस घर जा रहे थे तो शेखू ने कमरे से बाहर आते समय पंखे का स्विच बंद करने के लिए हाथ उठाया तो शिखर ने आगे बढ़ कर कहा, सौरी, स्विच मैं बंद करूंगा आज भी और हमेशा। उसकी मम्मी ने कहा, शाबास शिखर। शिखर ने कहा, शुक्रिया शेखू और अन्नू, तुम दोनों की वजह से आज मैंने बिजली की बचत करना सीख लिया।

 

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