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कहानी: नया संकल्प

‘मोटू चाचा जिंदाबाद।’ खुश होकर सारे जानवरों ने मोटू की जय जयकार से पूरा जंगल गुंजा दिया।

छोटे जानवर मोटू को टुकुर-टुकुर देख रहे थे।

चलो चलो, जल्दी से खाना खत्म करो, वरना हमारे हाथ कुछ नहीं लगेगा।’ मीकू बंदर बोला तो बाकी जानवर चौंक गए । उनकी समझ में नहीं आया कि मीकू ने ऐसा क्यों कहा।
तभी उनके कानों में जोर की आवाज सुनाई पड़ी- ‘ठहरो, मैं आ रहा हूं। मेरे लिए खाना बचा कर रखना।’ मोटू हाथी दूर से चिल्ला कर बोला।
बेचारे छोटे जानवरों ने जैसे तैसे कौर मुंह में डाले ही थे कि मोटू वहां आ पहुंचा। उसे देखते ही सारे खाना छोड़ कर वहां से भाग छूटे।

‘आज तो खूब दावत उड़ेगी भई अपनी।’ सामने ढेर सारे फल और मिठाई देखकर मोटू की बांछें खिल उठीं। सारा खाना चट करने के बाद वह एक पेड़ की छांव में आराम से पसर गया। दूर झाड़ी के पीछे छिपे हुए वे छोटे जानवर मोटू को टुकुर-टुकुर देख रहे थे। उन्हें गुस्सा तो बहुत आ रहा था, पर मोटे तगड़े मोटू के सामने वे सब लाचार थे।

मोटू एक नंबर का आलसी और कामचोर था। उसे खाने को ढेर सारा चाहिए होता। जैसे ही किसी को खाता हुआ देखता, वह वहां जा धमकता। मोटे तगड़े हाथी को देखकर सब घबरा जाते और मोटू की बन आती। मोटू को मुफ्त का खाने की आदत पड़ चुकी थी।
जंगल के जानवर उसके सामने तो कुछ नहीं कह पाते थे, पर पीछे से उसकी खूब बुराई करते थे। बहुत सारे जानवरों ने उसे समझाने की कोशिश की और कोई काम-धंधा करने की सलाह भी दी, पर मोटू कहां मानने वाला था!
आखिर हार कर जंगल के निवासियों ने महाराज शेर सिंह से मोटू की शिकायत की तो महाराज ने मोटू को जंगल से चले जाने का हुक्म दे दिया। मोटू को वहां से जाना ही पड़ा।

मोटू के जाने से जंगल के निवासियों ने चैन की सांस ली। अब उन्हें अपने मुंह का निवाला छीने जाने का कोई डर नहीं था। पर उनकी खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। एक दिन न जाने कहां से कुछ शिकारियों की टोली जंगल में आ पहुंची। शिकारी अपने साथ बंदूकें और रस्सी लेकर आए थे। वे बड़ी बेरहमी से जंगल के बंदर और हिरण सहित अनेक जानवरों को अपने साथ ले जाने लगे। इतना ही नहीं, उन्होंने कई पेड़ों को भी तहस-नहस कर डाला।
महाराज शेर सिंह किसी काम से बाहर गए हुए थे। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि वे शिकारियों से कैसे निपटें।
उधर मोटू हाथी जंगल से निकाले जाने के बाद सड़क पर उदास मुद्रा में चुपचाप बैठा हुआ था।
भूख के मारे उसके पेट में चूहे कूद रहे थे। आसपास खाने के लिए कुछ नहीं था। हैरान-परेशान मोटू मन ही मन दुखी होता हुआ सोच में डूबा था कि उसे किसी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।

‘बचाओ बचाओ, हमें निकालो। हमारी मदद करो।’ आवाज सुन कर भी मोटू चुपचाप बैठा रहा। फिर अचानक कुछ सोच कर अपनी जगह से उठा। उसने देखा कि फलों से लदा हुआ एक ट्रक सड़क पर पलट गया था। ट्रक का ड्राइवर और खलासी नीचे दबे हुए मदद के लिए पुकार रहे थे। मोटू हाथी ने वक्त जाया किए बिना किसी तरह अपनी सूंड़ और पैरों से ट्रक को सीधा कर दिया।
‘जान बची तो लाखों पाए।’ ट्रक के ड्राइवर और खलासी ने मोटू हाथी को मदद करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वह जितने चाहे फल खा सकता है। मोटू को बड़े जोर की भूख तो लगी हुई थी ही उसने जी भर कर फल खाए।

ट्रक वालों ने अभी इतना कहा ही था कि जंगल से हरियल तोता उड़ता हुआ वहां आ पहुंचा। ‘मोटू चाचा, जल्दी मेरे साथ वापस जंगल में चलो, हम सबको तुम्हारी वहां बहुत जरूरत है।’ हरियल तोते ने संक्षेप में शिकारियों द्वारा मचाए जा रहे उत्पात के बारे में मोटू को बताया तो उसका भी खून खौल उठा।
वह बिना आगा पीछा सोचे जंगल की तरफ दौड़ पड़ा। ‘रुको दोस्त, हम भी तुम्हारे पीछे आ रहे हैं, शायद हम तुम्हारी कुछ मदद कर सकें।’ मोटू के एहसान का बदला चुकाने ट्रक वाले भी अपना ट्रक लेकर पीछे पीछे चल पड़े।
भारी-भरकम मोटू को गुस्से में आता देखकर शिकारियों की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। वे अपनी बंदूक संभालने लगे, तभी मौका पाकर मोटू ने अपनी सूंड में पकड़ कर उन शिकारियों को हवा में उछाल दिया। रही-सही कसर ट्रक वालों ने अपनी लाठियों से उनकी धुलाई करके पूरी कर दी। शिकारी जान बचा कर जंगल से भाग छूटे।

‘मोटू चाचा जिंदाबाद।’ खुश होकर सारे जानवरों ने मोटू की जय जयकार से पूरा जंगल गुंजा दिया।
‘अच्छा तो साथियो, अब मैं चलता हूं। महाराज ने मुझे जंगल से बाहर निकाल रखा है। अगर मैं यहां दिखा, तो वे नाराज होंगे।’ इतना कह कर मोटू वापस जाने लगा कि पीछे से एक आवाज आई- ‘ठहरो, तुम कहीं नहीं जाओगे। हमें सब पता चल गया है।’ महाराज शेर सिंह की दहाड़ सुन कर मोटू के कदम रुक गए।
‘महाराज, मैंने भी मेहनत करने का संकल्प लेकर खुद को पूरी तरह बदल दिया है। अपने परिश्रम की कमाई खाने का सुख क्या होता है, यह मैंने जान लिया है।’ कहते हुए मोटू उन्हें ट्रक का पूरा किस्सा महाराज को सुना दिया।

सारे जानवरों में खुशी की लहर दौड़ गई। मोटू अब आलसी और कामचोर नहीं रहा था। अपनी भूलों के लिए मोटू ने जंगल के निवासियों से माफी भी मांगी। उसमें आए बदलाव को देख कर सारे खुश थे।
‘चलो, मोटू के सुधर जाने की खुशी का जश्न हम फल खाकर मनाते हैं।’ कहते हुए ट्रक वालों ने फलों से भरा पूरा ट्रक जानवरों के हवाले कर दिया।
सबने मिल कर इस दावत का आनंद उठाया।

इंद्रजीत कौशिक

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