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दाना-पानी: चटनी और रायते

रायता और चटनी आपके शरीर में कई पोषक तत्त्वों की पूर्ति करते हैं। पर इन्हें बनाते समय कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए, क्योंकि गलत प्रयोग इन्हें विरुद्ध आहार की श्रेणी में ला सकता है।

Author Published on: August 11, 2019 5:28 AM
मधुमेह रोगी अलसी का बीज दवा की तरह सेवन करते हैं।

मानस मनोहर

चटनी और रायता हर घर में बनते हैं। हर इलाके में इन्हें बनाने के कुछ पारंपरिक तरीके हैं। पर शहरों में ज्यादातर घरों में रायते का मतलब दही मथ कर उसमें बूंदी डाल देना होता है। इसी तरह चटनी के नाम पर धनिया और पुदीने की चटनी आम है। मगर ये दोनों व्यंजन ऐसे हैं, जिनमें प्रयोग की अपार संभावनाएं हैं। रायता और चटनी आपके शरीर में कई पोषक तत्त्वों की पूर्ति करते हैं। पर इन्हें बनाते समय कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए, क्योंकि गलत प्रयोग इन्हें विरुद्ध आहार की श्रेणी में ला सकता है।

अलसी का रायता
अलसी यानी फ्लेक्सी सीड। यह एक तिलहन है। इसका तेल निकाला जाता है। पर चिकित्सा विज्ञान बताता है कि अलसी के बीज खाने से शरीर में जमा बुरा कोलेस्ट्राल खत्म होता है और चर्बी कम होती है। इसलिए आजकल शहरों में मोटापे से परेशान और मधुमेह रोगी अलसी का बीज दवा की तरह सेवन करते हैं। बाजार में अलसी के दाने भुने हुए और कच्चे दोनों रूपों में बहुत आसानी से मिल जाते हैं।

अलसी के दानों का उपयोग अगर रायते में करें, तो उसका स्वाद लाजवाब हो जाता है। यों रायता में राई का उपयोग होता है, पर उसकी जगह अलसी का उपयोग करें, तो यह सेहत की दृष्टि से अधिक गुणकारी होगा। वैसे अलसी भी राई की प्रजाति की तिलहन है। पर इसका स्वाद चरपरा नहीं होता। सौम्य होता है।

अलसी का रायता बनाने के लिए दो चम्मच या करीब पचास ग्राम अलसी लें। अगरी कच्ची है, तो इसे गरम तवे पर रख कर थोड़ा सेंक लें। अगर पहले से भुनी हुई है, तो उसे खरल में डालें या चकले पर रख कर दरदरा कूट लें।

अब इस रायते में डालने के लिए उतनी ही मात्रा में कद््दूकस की हुई लौकी लें जितनी मात्रा में आपने दही ली है। इस लौकी को स्टीमर में भाप देकर या फिर पैन या कुकर में हल्का पानी डाल कर नरम होने तक पका लें। पानी निथार कर इसे ठंडा हो जाने दें।

दही को मथ लें। अगर पहले दही का पानी निथार लें, तो और अच्छा रहेगा, क्योंकि यह रायता गाढ़ा ही अच्छा लगता है। फिर उसमें भुना-पिसा जीरा, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच शक्कर, जरूरत भर का नमक डालें और फिर इसमें कटा हरा धनिया, पुदीने के पत्ते, एकाध बारीक कटी हरी मिर्चें, उबली हुई लौकी और कुटी हुई अलसी डाल कर अच्छी तरह मिला लें। थोड़ी देर के लिए और ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें। इस तरह अलसी अपना स्वाद रायते में छोड़ देगी। यह रायता स्वाद और सेहत से भरपूर है।

नोट : आमतौर पर रायता बनाते समय लोग समझते हैं कि दही में कुछ भी डाल दो, वह रायता हो जाता है। मगर सावधानी रखें कि रायते में कभी किसी प्रकार का फल उपयोग न करें। इसी तरह प्याज और टमाटर कभी रायते में नहीं डालना चाहिए। दही के साथ ये चीजें मिल कर विरुद्ध आहार बन जाती हैं। इनमें से निकलने वाले रसायन दही से मेल नहीं खाते और इस तरह इनसे बना रायता पेट में जाकर अनेक बार खतरनाक बीमारियों को जन्म देता है। इसलिए रायते में कद्दू, लौकी, खीरा, आलू डालना बेहतर होता है। मगर इनसे रायता बनाते समय उबाल जरूर लें। कई लोग खीरा कच्चा ही डाल देते हैं। इस तरह जब भी कोई रायता बनाएं, तो उसमें भरपूर अलसी डालें और उसका स्वाद लें।

नाशपाती की चटनी
शपाती में कैल्शियम, आयरन और फाइवर की मात्रा भरपूर पाई जाती है। इसमें इसका खट्टा-मीठा स्वाद चटनी के लिए बहुत उपयुक्त होता है। आमतौर पर लोग इसे फल के रूप में खाते हैं, पर नाशपाती की चटनी बनाएं, यह बहुत स्वादिष्ट होती है। इसके साथ सफेद तिल का मेल जबर्दस्त होता है। इसलिए नाशपाती की चटनी बनाते समय सफेद तिल का उपयोग जरूर करें। इसके लिए करीब पचास ग्राम या खाने वाले चम्मच से दो चम्मच सफेद तिल लें और गरम तवे पर डाल कर रंग भूरा होने तक सेंक लें। फिर इसे खरल में या चकले पर रख कर दरदरा कूट लें।

अब नाशपाती का छिलका उतार लें या चाहें तो रहने दें। इसे काट कर बीज और बीच का कठोर हिस्सा निकाल दें। इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और मिक्सर में डाल दें। ऊपर से धनिया पत्ता और कुछ पुदीने के पत्ते डालें। स्वाद के अनुसार कुछ हरी मिर्चें डालें। फिर कुटी हुई सफेद तिल डालें। साथ ही आधा चम्मच जीरा और आधा चम्मच सौंफ के दाने डालें। चाहें, तो इसमें दो कलियां लहसुन की भी छील कर डाल सकते हैं। अगर नहीं पसंद तो न डालें। जरूरत भर का नमक डालें और चटनी पीस लें। चटनी को कभी बिल्कुल बारीक नहीं पीसना चाहिए। थोड़ा दरदरी रहे, तो खाने में स्वाद अच्छा आता है।

नोट : नाशपाती में लौह तत्त्व अधिक होने के कारण यह जल्दी अपना रंग बदलने लगती है, इसलिए जब भी इसकी चटनी बनाएं, तो उसी दिन खत्म कर लें। अगर चटनी अधिक बन गई है और दो-एक दिन तक रखनी है, तो इसमें जैतून का तेल यानी आलिव आयल की कुछ बूंदें डालें और मिला दें। अगर आलिव आयल नहीं है, तो उसकी जगह कच्चा सरसों तेल भी उपयोग किया जा सकता है। इससे चटनी थोड़ी टिकाऊ हो जाती है।

नाशपाती की चटनी बनाने के लिए हमेशा देसी नाशपाती ही इस्तेमाल करें। चिकनी, मीठी नाशपाती या बब्बूगोशे का इस्तेमाल न करें, वह बहुत मीठा होता है। इसी तरह नाशपाती की जगह आड़ू और आलूबुखारे आदि से भी चटनी बनाई जा सकती है। चटनी में प्रयोग करते रहना चाहिए। यह विटामिन सी और लौहतत्त्व का जबर्दस्च स्रोत होती है। चटनी को भोजन में जरूर शामिल करना चाहिए।

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