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नन्हीं दुनियाः कहानी; फोटो केक

मम्मी-पापा तो हमेशा तिलक लगा कर नकद रुपए और चॉकलेट ही देते थे और दादाजी ड्रेस खरीद चुके थे। इस प्रकार उसे सबका पता चल गया। बस उसकी नटखट बड़ी बहन विनीता ने अभी तक कुछ नहीं बताया था।

नन्हीं दुनियाः कहानी; फोटो केक

शिखर चंद जैन

नय आज सुबह से ही बड़ा खुश था। आज उसका बर्थडे जो था। उसे ढेर सारे उपहार मिलने वाले थे। घर की सजावट होने वाली थी और मम्मी अपने हाथों से कई लजीज व्यंजन बनाने वाली थीं। तैयारियां जोर-शोर से हो रही थीं।

सामान लाने पापा और दादा जी के साथ उसकी बहन विनीता भी बाजार गई हुई थी। विनय नहा-धो कर तैयार हो चुका था और अपने सभी दोस्तों को दोबारा याद दिलाने के लिए फोन कर रहा था, ताकि कोई आना न भूल जाए। साथ ही वह जानना चाहता था कि उसके दोस्तों ने गिफ्ट की क्या तैयारी की है। उसके दोस्त भी बड़े उत्साहित थे। सबने भले ही अपने गिफ्ट का संकेत न दिया हो, पर एक-दूसरे के गिफ्ट के बारे में बता दिया।

सबसे बातचीत करने पर विनय को पता चल गया कि स्नेहा, अंकुर, देवेश और प्राची मिल कर उसे एक खास फिटनेस ट्रैकर स्मार्ट वॉच देने वाले हैं, जो सेहत का ध्यान रखेगी। वह कितने कदम चला, कितनी कैलोरी ली आदि सब कुछ बता देगी। अभिनव उसे एक शानदार सेल्फ हेल्प बुक देने वाला था। गौरव ने उसके लिए पेन सेट खरीदा था और शिवांगी टी-शर्ट देने वाली थी।

मम्मी-पापा तो हमेशा तिलक लगा कर नकद रुपए और चॉकलेट ही देते थे और दादाजी ड्रेस खरीद चुके थे। इस प्रकार उसे सबका पता चल गया। बस उसकी नटखट बड़ी बहन विनीता ने अभी तक कुछ नहीं बताया था।

विनीता बाजार से वापस आ गई थी। विनय ने उससे खूब पूछा, लेकिन उसने साफ इंकार करते हुए कहा कि उसका गिफ्ट सरप्राइज है और वह शाम को ही बताएगी।
खैर, तैयारियों के बीच कब शाम हो गई, पता ही नहीं चला। घर में रौनक हो गई। आसपास के बच्चे और विनायक के बाद सारे दोस्त भी आ चुके थे।

उनके घर में केक काटने की परंपरा नहीं थी। मम्मी-पापा और दादाजी तिलक लगाते। फिर सब ताली बजाते। इसके बाद कुछ गेम खेलते और फिर खाना खाते। इसी तरह बर्थडे मनाया जाता था।

लेकिन विनय की नजर बीचो-बीच टेबल पर सजे बर्थडे केक और चारों तरफ जलते हुए दीपकों पर पड़ी, तो वह चौंक गया। उत्साहित होकर वह केक के नजदीक पहुंचा, तो उसे देख कर दंग रह गया।

केक पर तो उसकी तस्वीर लगी हुई थी। उसने आज पहली बार ऐसा केक देखा था। विनय ने विनीता की ओर देखा, तो वह बोली, ‘यह है मेरा स्पेशल गिफ्ट, फोटो केक। लेकिन पहले सुन लो, दीपक फूंक मार कर बुझाने नहीं है। बस केक काटना है और सबको खिलाना है।’

विनय के दोस्त भी हैरान थे। सबने विनीता को घेर लिया और पूछने लगे कि यह फोटो केक आखिर है क्या, इसे खा भी सकते हैं या फिर सजाने के लिए ही है?

विनीता बोली, ‘अरे बाबा शांत रहो। मैं सबकी बातों का जवाब एक बार में दे दूंगी। फोटो केक कोई नई चीज नहीं है। इसकी शुरुआत एक दशक पहले हो चुकी है। इस पर हम न सिर्फ अपना या किसी प्रियजन का फोटो, बल्कि कोई अच्छी-सी सीनरी भी प्रिंट करवा सकते हैं। बस केक बनाने वाले को फोटो या अपने पसंद का दृश्य देना होगा। केक बेक होने के बाद उस पर फोटो लगा दिया जाता है।’

‘लेकिन दीदी, फोटो कैसे खाएंगे? वह तो कागज का है ना?’ स्नेहा ने पूछा।

‘नहीं नहीं, इसे नॉनटॉक्सिक एडिबल आइसिंग पेपर पर एडिबल इंक यानी फूड कलर से प्रिंट किया गया है। इसे वैसे ही प्रिंटर से निकाला गया है, जिससे हम डॉक्यूमेंट प्रिंट करते हैं। लेकिन इस प्रिंटर को सिर्फ एडिबल फोटोग्राफ प्रिंट करने के लिए ही इस्तेमाल करते हैं और इसमें इंक फूड कलर्स की है।’ विनीता ने समझाया।

‘पर दीदी, फोटो छपा तो कागज पर ही है न? इसे खाएंगे कैसे?’ इस बार अंकुर ने सवाल किया।

विनीता ने बताया, ‘कागज तो है, पर यह चावल, आलू या कॉर्न की स्टार्च से बनाया जाता है, इसलिए इसे खा सकते हैं। हां, आलू और चावल के स्टार्च से बना पेपर मोटा होता है और केक की टॉप पर परत की तरह दिखता है। जबकि कॉर्न स्टार्च से बना पेपर केक में डिजॉल्व हो जाता है यानी घुल जाता है और ऊपर सिर्फ फोटो दिखती है, जैसा इस केक में है। हां, यह पहले बता दूं कि यह केक महंगा होता है, इसलिए हम इसे हमेशा नहीं बनवा सकते। इसलिए तुम लोग अपने घर जिद मत करना। विनय का सोलहवां जन्मदिन था और यह बेहद खास था, इसलिए मैंने मम्मी-पापा की परमिशन पर इसे खासतौर पर बनवाया है।’

विनय अपने जन्मदिन पर दीदी के इस खास तोहफे से बेहद खुश था। उसके दोस्तों ने विनय के साथ तो सेल्फी ली, इस खास केक के साथ भी सेल्फी ली। सबने केक खाया, खूब मस्ती की और लजीज खाना खाकर अपने-अपने घर लौट गए।

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