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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

Author Published on: June 9, 2019 1:22 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

सूर्यकुमार पांडेय

कविता: नन्ही गौरैया

बहुत दिनों के बाद
दिखाई दी मुझको गौरैया।

पहले पेड़ बहुत थे
रहती जिन पर बना ठिकाना
घर में सुबह शाम होता था
इसका आना-जाना

कभी-कभी घर के भीतर भी
थी घोंसले बनाती
उसमें अपने अंडे रखती
फिर फुर्र-से उड़ जाती

पूरे दिन रहता था
बाहर जाना, वापस आना
और घोंसले में दाने को
रखना और उठाना

अंडों से बाहर आते जब
उसके बच्चे प्यारे
दिन भर चीं-चीं चूं-चूं
करते थे सारे के सारे

गौरैया बच्चों को
दाने मुंह मे डाल चुगाती
कभी घोंसले में रहती थी
और कभी उड़ जाती

आज दिखाई दी है तो
मैं सोच रहा हूं भैया
कहां घोंसला बना सकेगी
यह नन्ही गौरैया!

शब्द-भेद: कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

कड़ाई / कड़ाही/ कढ़ाई
किसी काम के मामले में सख्ती बरतने को कड़ाई कहते हैं, जबकि कड़ाही एक प्रकार का बरतन होता है, जिसमें सब्जी, पूड़ी वगैरह बनाई जाती है। इसी तरह रंगीन धागों से कपड़े वगैरह पर चित्र आदि उकेरने की कला या उस काम को कढ़ाई कहते हैं।

प्राय / प्राय:
समान, बराबर, लगभग के लिए प्राय शब्द का प्रयोग होता है, जैसे लुप्तप्राय, इसी तरह प्राय किसी शब्द के पहले लग कर बराबर का अर्थ दोता है, जैसे प्रायद्वीप। जबकि प्राय: का अर्थ होता है अकसर, करीब-करीब।

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