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दाना-पानी: चने की घुघनी और दलिया छाछ

सुबह का नाश्ता बहुत जरूरी है। कहते हैं कि सुबह पेट भर कर नाश्ता करना चाहिए। दोपहर को बेशक न खाएं, पर नाश्ता कभी न छोड़ें। इसलिए बहुत से लोग सुबह खूब तैलीय और गंभीर नाश्ता करते हैं, जिसमें ब्रेड-आमलेट, परांठे वगैरह शामिल होते हैं। पर अनेक अध्ययन और आयुर्वेद बताते हैं कि सुबह का नाश्ता जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है यह जानना भी कि नाश्ते में क्या खाना चाहिए। 

Author July 15, 2018 2:03 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

मानस मनोहर

तैलीय और भारी नाश्ता हमेशा पेट के लिए नुकसानदेह होता है। इसलिए सुबह पेट भर कर खाएं जरूर, पर आमलेट, दूध, ब्रेड, परांठे वगैरह से जितना बच सकें, उतना ही बेहतर है। नाश्ते के लिए भाप में पकी हुई और कम तैलीय चीजें खाना सेहतमंद है। भोजन समय पर करना काफी नहीं है, स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित भोजन का चुनाव भी बहुत जरूरी है। इसलिए कुछ ऐसे देसी व्यंजन नाश्ते में लें, जो भरपूर ऊर्जा भी देंगे, स्वादिष्ट भी होंगे और सेहत की दृष्टि से भी उत्तम होंगे।

चने की घुघनी
चना देश के हर हिस्से में खाया जाता है। गांवों में लोग रात को चना भिगो देते हैं और सुबह उसे बिना नमक-मिर्च डाले कच्चा चबा-चबा कर खाते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक यह उत्तम नाश्ता है। मगर जिन्हें शहरी खानपान की आदत पड़ चुकी है, वे इसे कच्चा नहीं खा पाते। इसलिए इसका एक तरीका है घुघनी बनाना। घुघनी पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल में खूब खाई जाती है। घुघनी बनाना बहुत आसान है। इसमें समय भी अधिक नहीं लगता, इसलिए जिन्हें सुबह जल्दी काम पर निकलना होता है, उनके लिए चने की घुघनी बनाना बहुत आसान है।

विधि: चने को रात में भिगो दें। सुबह पानी निथार कर ठीक से धो लें। अगर चाहें तो कपड़े में बांध कर इसे अंकुरित भी कर सकते हैं। न भी करें, तो फर्क नहीं पड़ेगा। अब मोटा-मोटा काट कर प्याज को चने में ही डाल दें। एक कड़ाही में आधा चम्मच तेल गरम करें। जीरे का तड़का लगाएं। तड़का तैयार हो जाए, तो प्याज समेत चना उसमें डाल दें। हल्का-सा पानी डालें। पानी इतना ही रखें, जिससे वह पूरी तरह सूख जाए। हालांकि कुछ लोग रसेदार घुघनी भी बनाते हैं, पर वह रोटी आदि के साथ खाने के लिए ठीक रहती है। नाश्ते के तौर पर घुघनी बनाने के लिए पानी हल्का ही रखें। ऊपर से नमक और धनिया पाउडर या सब्जी मसाला डालें और कड़ाही को ढक दें। चने उबल कर नरम हो जाएं तो आंच बंद कर दें।
अब इसमें ऊपर से धनिया पत्ता, हरी मिर्च और अदरक बारीक काट कर सजाएं और खाने को परोसें। इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए ऊपर से बेसन की भुजिया भी डाल सकते हैं।
यह नाश्ता पौष्टिक, सुपाच्य है और आपको दिन भर तरोताजा रखेगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर। प्रतीकात्मक तस्वीर।

दलिया छाछ
आमतौर पर लोग दलिया को दूध में उबाल कर या फिर खिचड़ी की तरह नमकीन बना कर खाते हैं। कुछ लोग इसे सब्जियों के साथ भी सूखा बना कर खाते हैं। मगर इसे छाछ के साथ बनाएं और खाएं, यह सुबह का उत्तम नाश्ता है। यह राजस्थान का लोकप्रिय नाश्ता है। दलिया छाछ बनाने के लिए बाजरे या जौ का दलिया उत्तम रहता है। इसके अलावा आप चाहें तो गेहूं, रागी वगैरह का दलिया भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एक ऐसा नाश्ता है, जिसे तुरंत बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे रात को बना कर फ्रिज में रख दें। अगले दिन खाएं।
इस नाश्ते में उपयोग होने वाली दोनों चीजें स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत उत्तम हैं। दलिया में अनाज का छिलका भी मौजूद रहता है, इस तरह इसमें आटे की अपेक्षा अधिक गुणकारी माना जाता है। यह पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। इसी तरह छाछ को आयुर्वेद में अमृत माना गया है। पेट के लिए अत्यंत गुणकारी पदार्थ। इस तरह जब आप रात भर पेट खाली रहने के बाद सुबह नाश्ता करते हैं तो उसमें दलिया छाछ बहुत फायदेमंद साबित होता है। रात भर कुछ न खाने की वजह से पेट में कुछ ऐसे रसायन बनते हैं, जो अंडा, परांठा वगैरह खाने पर गैस बनाते हैं, जो अल्सर जैसी बीमारियों को जन्म देता है। इसलिए सुबह उबली हुई या भाप में पकी हुई चीजें भर पेट खाएं, स्वाद और सेहत की दृष्टि से उत्तम रहेगा।

विधि: दलिया छाछ बनाने के लिए दलिया को आधे घंटे के लिए पानी में भिगो दें। फिर उसे कड़ाही या भगोने में पानी और नमक डाल कर उबाल लें। इसे उबालने के लिए पानी कम रखें, इतना ही रखें कि उसे दलिया सोख ले। जब दलिया पक कर नरम हो जाए तो आंच बंद कर दें। दलिया को ठंडा होने दें। अब एक बर्तन मे एक चम्मच घी गरम करें और उसमें जीरा, हींग और लाल मिर्च का तड़का लगाएं। तड़का तैयार हो जाए तो उसे दलिया में मिला दें। दलिया पूरी तरह ठंडा हो जाए, तो उसमें छाछ डालें और ठीक से मिला कर रात भर के लिए फ्रिज में रख दें। अगर दो दिन बाद भी इसका इस्तेमाल करेंगे, तो इसके स्वाद और गुण में कोई बदलाव नहीं आएगा। बल्कि दो-तीन दिन का बासी छाछ पेट के लिए और गुणकारी माना जाता है। ध्यान रहे कि छाछ का ही इस्तेमाल करें, दही फेंट कर पतला रायता न बना कर उपयोग करें। आजकल दूध बेचने वाली तमाम कंपनियां पैकेट में छाछ भी बेचती हैं, उसी का उपयोग करें। दलिया छाछ अगर आपको खाना है तो उसे गाढ़ा भी रख सकते हैं और अगर पीना चाहते हैं तो छाछ की मात्रा अधिक रखें और दलिया को पतला बना लें। इसे खाने के लिए परोसते समय चाहें तो ऊपर से भुना जीरा पाउडर, धनिया या पुदीने का पत्ता, हरी मिर्च और प्याज बारीक काट कर मिला सकते हैं। दलिया छाछ उन लोगों के लिए न सिर्फ उपयुक्त नाश्ता, बल्कि उत्तम औषधि है, जिनका पाचन ठीक नहीं रहता।

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