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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

Author March 11, 2018 3:27 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

कविता

रावेंद्र कुमार रवि

जब सरसों का खेत मिला
मामाजी ने
बिठा कार में,
हमको आज घुमाया!

चलती खिड़की से देखे सब
‘सीन’ बहुत मनभाते!
ऐसा लगता पेड़ कर रहे
टाटा पीछे जाते!
गजक, रेबड़ी, मूंगफली का
हमको स्वाद चखाया!

जब सरसों का खेत मिला तब
फोटो खींचे खूब!
बहुत जोर से चिल्लाई जब
दबी पैर से दूब!
पैर हटा कर बहुत प्यार से
झट उसको सहलाया!

सारस के जोड़े ने हमको
बहुत दूर से देखा!
बहुत दूर पर पड़ी दिखाई
एक नदी की रेखा!
एक खेत में खड़े मोर ने
हमको नाच दिखाया!

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

अनुकरण / अनुसरण
देखादेखी किए जाने वाले कार्य या नकल को अनुकरण कहते हैं। महापुरुषों के क्रियाकलापों को जीवन में उतारना अनुकरण है। जबकि किसी के पीछे चलना, किसी के कहे मुताबिक काम करना अनुसरण कहलाता है।

गमन / गबन
जाना, प्रस्थान करना, रवाना होना आदि को गमन कहते हैं। गमन का अर्थ है जाना। अगर इसमें आ उपसर्ग लग जाए तो वह आगमन यानी आना बन जाता है। मगर धन वगैरह की हेराफेरी करने को गबन कहते हैं।

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