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कविताएं- शहर की कैफियत, आज का दिन, सुगठित शक्ति, समर्पण

प्रतिभा चौहान   शहर की कैफियत मैं लिए रही खाली पन्नों की डायरी शेष लिखा जाना था कुछ बचपन दोबारा लिखना था बंटवारा करना था सुखों दुखों का और चमकानी थी शहर की कैफियत किले के पत्थरों की काई खुरचनी थी लिखे जाने थे कुर्बान लोगों के नाम आहिस्ता आहिस्ता बुनने थे प्रेम के स्वेटर […]

Author April 30, 2017 5:50 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

प्रतिभा चौहान  

शहर की कैफियत

मैं लिए रही खाली पन्नों की डायरी
शेष लिखा जाना था कुछ
बचपन दोबारा लिखना था
बंटवारा करना था सुखों दुखों का
और चमकानी थी शहर की कैफियत
किले के पत्थरों की काई खुरचनी थी
लिखे जाने थे कुर्बान लोगों के नाम
आहिस्ता आहिस्ता बुनने थे प्रेम के स्वेटर
कितने नमूने थे चिपकाने पन्नों पर
निर्यात किए गए भूखों की वापसी का
रास्ता बनाना है
शाख से बिछड़ने का दर्द होगा ही
पर नएपन के स्वागत में कुछ कुर्बानियां जायज हैं
आईना बनाना है
जिसमें जीवन गीत लिखे जाने हैं
लिखे जाने हैं प्रेम संदेश।

आज का दिन

शताब्दियों ने लिखी है आज
अपने वर्तमान की आखिरी पंक्ति

आज का दिन व्यर्थ नहीं होगा
चुप नहीं रहेगी पेड़ पर चिड़िया
न खामोश रहेंगी
पेड़ों की टहनियां

न प्यासी गर्म हवा संगीत को पीएगी
न धरती की छाती ही फटेगी
अंतहीन शुष्कता में

न मुरझाएंगे हलों के चेहरे
नहीं कुचली जाएंगी बालियां बर्फ की मोटी बूंदों से

बेहाल खुली चोंचों को
मिलेगी समय से राहत

नहीं करेगी तांडव नग्नता
आकाश गंगा की तरह

पीली सरसों से पीले होंगे बिटिया के हाथ
अबकी जेठ- घर भर
आएगा तिलिस्मी चादर ओढ़े
न अब उड़ेगा, न उड़ा ले जाएगा
चेहरों के रंग
आंखों के सपने
दिलों की आस

भर देगा आंखों में चमक
आंखों से होता हुआ आंतों तक जाएगा

बुझाएगा पेट की आग यह बादल
आज के वर्तमान में।

सुगठित शक्ति

अंत:स्थल से उपजी
भावनाओं की नदी मेरे कैनवास का सबसे सुंदर
चित्र बन गई
अतीत की कोठरी से उपजे कुछ संवाद
बस गए वर्तमान की पूर्व पंक्ति में
कोई आकाश में लहराई है
चुनर अभिव्यक्ति की
श्रेष्ठता का अनुभव
मस्तिष्क का गुबार
हम सब जिज्ञासु
शांति- सुरक्षा कवच
भ्रम- बड़ी उलझन
प्रेम- अंतिम हल
राष्ट्र निर्माण में
सुगठित शक्ति लगी है शांति और प्रेम की।

समर्पण

मैं दरिया हूं
निश्चित है कि समुंदर में मिलूंगी

और तुम मेरे समुंदर हो
निश्चित है कि
मुझे अपने आगोश में लोगे

कुछ इस तरह मुझे अपने वजूद को
तुममें मिटाने की ख्वाहिश है।

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