ताज़ा खबर
 

दाना-पानी- हरी मन-भरी

इस मौसम में बाजार में हरे चने मिलने शुरू हो जाते हैं। दुकानों में छिले हुए हरे चने के दाने भी उपलब्ध होते हैं।

Author January 14, 2018 6:17 AM
छोलिया बरफी

मानस मनोहर

छोलिया बरफी

इस मौसम में बाजार में हरे चने मिलने शुरू हो जाते हैं। दुकानों में छिले हुए हरे चने के दाने भी उपलब्ध होते हैं। इन्हें दिल्ली, हरियाणा और पंजाब आदि इलाकों में छोलिया भी कहा जाता है। चने के गुणों से तो आप परिचित हैं ही। यह वायु विकार मिटाता है। रेशों से भरपूर होता है। यों गांवों में हरे चने को भून कर होरहा बनाया जाता है और उसे लहसुन, हरे धनिए की चटनी के साथ खाया जाता है। इसे आलू के साथ मिला कर तरकारी भी बनाई जाती है। पर इससे हलवा और बरफी भी बहुत स्वादिष्ट बनती है।
छोलिया का हलवा या बरफी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए पाव भर हरे चने के दाने लें। उन्हें धोकर साफ कर लें और मिक्सी में बिना पानी के दरदरा पीस लें। इसके अलावा करीब दो सौ ग्राम देसी घी लें। इतनी ही चीनी पीस लें और करीब सौ ग्राम सूखे मेवे काट कर रख लें। दो-चीन हरी इलाइची के दानों को कूट लें।
अब एक कड़ाही में घी गरम करें। घी गरम हो जाए तो उसमें पिसे हुए हरे चने का पेस्ट डालें और हल्की आंच पर दस से पंद्रह मिनट तक भूनें। पूरा पानी सूख जाए तो उसमें इलाइची पाउडर और मेवे डाल कर दो-तीन मिनट तक और भूनें। फिर उसमें पिसी हुई चीनी मिला कर तीन-चार मिनट तक भूनें।
अगर इसे हलवे के तौर पर खाना है, तो ज्यादा न सुखाएं। नरम रहने दें। गरमा-गरम हलवा तैयार है। ऊपर से कुछ और कटे हुए मेवे डाल कर परोसें।
अगर इसकी बरफी बनानी है तो मिश्रण को ठीक से भूनते हुए सुखा लें। जब मिश्रण कड़ा होने लगे तो उसे एक थाली में दबाते हुए मोटी परत बनाएं और ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद उसे बरफी के आकार में काट लें।
नोट:
इस हलवे या बरफी को और जायकेदार बनाने के लिए चाहें तो कुछ और चीजें मिला सकते हैं। जब चने का मिश्रण भुन जाए तो उसमें करीब पचास ग्राम पिसा नारियल और इतनी ही मात्रा में मिल्कमेड या फिर मावा डाल सकते हैं। इन्हें चीनी डालने से पहले चने के साथ भून लें। फिर चीनी डाल कर मिश्रण को सूखने तक पकाएं। इस तरह हलवा या बरफी और जायकेदार बन जाएगी। यों ये चीजें न भी डालें, तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

आज मकर संक्रांति है। आज के दिन चावल, तिल, गुड़, चने और मूंगफली से बने मीठे व्यंजन खाने की परंपरा है। शाम को पकौड़े और मसालेदार खिचड़ी खाई जाती है। आयुर्वेद के मुताबिक कड़ाके की सर्दी वाले इस दिन जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, ऐसे व्यंजन शरीर के अनेक विकारों को दूर करते हैं। शरीर में जमा विषैले तत्त्वों का शमन करते हैं। तो आइए बनाते हैं आज के दिन मौसमी फसलों से कुछ हरा-भरा मनभावन मीठा और कुछ मसालेदार।

मसालेदार चटपटी तहरी

खिचड़ी बनाने का पारंपरिक तरीका है कि दाल और चावल को एक साथ मिला कर पका लिया जाता है। पर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में इसे सब्जियों के साथ पकाया जाता है, जिसे तहरी कहा जाता है। यह पुलाव और खिचड़ी के बीच की चीज है।
तहरी बनाने के लिए चावल को धोकर थोड़ी देर के लिए भिगो दें। इतनी देर में बाकी तैयारी कर लें।
तहरी बनाने के लिए दाल के बजाय हरी सब्जियों का उपयोग करें। इसके लिए हरी मटर या हरे चने के दाने लें। इसके अलावा हरे प्याज के पत्ते बारीक काट लें। पत्ता गोभी, फूल गोभी, गाजर, बीन्स को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। ध्यान रखें कि सब्जियों की मात्रा चावल के बराबर हो। तड़के के लिए लहसुन की कुछ कलियां, दो हरी मिर्चें और अदरक को बारीक काट लें।
अब कुकर में देसी घी गरम करें और उसमें एक चम्मच जीरा और राई का तड़का लगाएं। अगर चाहें तो इसमें कढ़ी पत्ता भी डाल लें। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें कटा हुआ लहसुन, हरी मिर्च और अदरक डाल कर चलाएं। ऊपर से हींग पाउडर और जरूरत भर का हल्दी पाउडर डाल कर चलाते हुए भूनें। फिर उसमें काली मिर्च, गरम मसाला, तेजपत्ता और दालचीनी डालें। स्वाद के मुताबिक लाल मिर्च पाउडर और नमक मिला लें। ध्यान रहे कि लहसुन सुनहरा होने लगे तो आंच धीमी कर दें और उसमें कटी हुई सब्जियों को डाल कर थोड़ी देर भूनें।
इन सबको मिलाने के बाद इसमें भिगोया हुआ चावल डाल दें। उसमें पानी उतना ही डालें जितना चावल पकाते समय डालते हैं। इस तरह सब्जियां और चावल पुलाव की तरह खिला-खिला बनेगा। अगर आप इसे पतली खिचड़ी की तरह खाना चाहते हैं तो पानी चावल से तीन-चार गुना अधिक मात्रा में डालें।
अब कुकर बंद कर दें। अगर तहरी को पुलाव जैसा पकाना है तो उसे दो या तीन सीटी के बाद, जितने में चावल पकता है, आंच को बंद कर दें। अगर पतली खिचड़ी की तरह खाना है, तो एक-दो सीटी अधिक लगा लें। अब तहरी पर कटा हुआ हरा धनिया पत्ता डालें। हरी चटनी और रायते के साथ गरमा-गरम खाएं। ल्ल

 

 

 

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App