ताज़ा खबर
 

गीत- चूहेजी, दादाजी के दांत

गुडविन मसीह के गीत।

Author Published on: April 9, 2017 6:25 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

चूहेजी

सबके बन गर पक्के घर
चूहेजी हो गए बेघर
छोड़ शहर वो गांव में आए
आकर बहुत वहां पछताए
जिस घर में ली शरण उन्होंने
पक्के थे सब उसके कोने
देखी बिल्ली एक उन्होंने
उसको देख लगे वह रोने
सोचा कहां मैं छिप जाऊं
कैसे खुद की जान बचाऊं
मन-ही-मन बिल्ली मुस्काई
झट चूहे के पास वो आई
बोली मुझसे मत घबराओ
आओ गले मेरे लग जाओ
मिलकर हम तुम मौज करेंगे
अब हम दोनों दोस्त बनेंगे
चूहा बोला उछल-उछल कर
सुन ले बिल्ली कान खोल कर
सोना तू अब पांव पसार कर
तेरा घर मैं चला छोड़ कर
जाता चूहे को यों देख कर
रह गई बिल्ली मन मसोस कर

दादाजी के दांत

दादाजी के दांत निराले
रखते थे डिबिया के अंदर
खाना खाते खूब चबाकर
पानी पीते खूब दबा कर
हंसते दादा दांत लगा कर
सोते दादा दांत हटा कर
खिसियाते दादा से बंदर
आते नहीं वो घर के अंदर
एक दिन सोए दादा छत पर
उनके दांत ले गए बंदर

 

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 कहानी- चंदा की रोटी
2 बहाग – उल्लास का नृत्य
3 कवि प्रसंग- इतिहास की गवाही के बिना
ये पढ़ा क्या...
X