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दाना-पानी: गोभी यखनी और गोभी परांठा

यह मैदानी इलाकों में फूलगोभी का मौसम है। सर्दी में इसकी मसालेदार सब्जी, परांठे, पकौड़े आदि सभी को पसंद आते हैं। इसकी सब्जी लोग अपने-अपने ढंग से बनाते हैं। कुछ लोग इसकी सूखी सब्जी खाना पसंद करते हैं, तो कुछ रसेदार। कुछ आलू, मटर, गाजर वगैरह के साथ बनाते हैं, तो कुछ केवल गोभी खाना पसंद करते हैं। इस बार गोभी के कुछ व्यंजन बनाते हैं।

Author December 2, 2018 4:48 AM
यखनी दरअसल, कश्मीर में दही से बनने वाली तरी को कहते हैं।

मानस मनोहर

फूलगोभी एक लोकपिय सब्जी है। इसका उत्पत्ति स्थान साइप्रस या इटली का भूमध्य सागरीय क्षेत्र माना जाता है। भारत में इसका आगमन मुगलकाल में हुआ माना जाता है। फूलगोभी में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए, सी तथा निकोटीनिक एसिड जैसे पोषक तत्त्व होते हैं। इसे सर्दी के मौसम में खाना ही गुणकारी है। गरमी और बरसात में इसे खाने से बचना चाहिए।

गोभी यखनी
यखनी दरअसल, कश्मीर में दही से बनने वाली तरी को कहते हैं। कश्मीर में फूलगोभी का रोगनजोश भी बनता है। इसमें रतनजोत और कश्मीरी लालमिर्च का अधिक इस्तेमाल होता है। गोभी यखनी खाने में पारंपरिक सब्जी से अलग और अधिक स्वादिष्ट होती है। इसे पकाना भी ज्यादा झंझट का काम नहीं है।
गोभी यखनी बनाने के लिए पहले गोभी को पतले कपड़े में टांग कर उसका पूरा पानी निथार लें। उसके बाद गोभी के छोटे-छोटे टुकड़े काटें और एक भगोने में भरपूर पानी लेकर उसमें एक चम्मच नमक डालें और गोभी को उबालें। जब गोभी आधा पक जाए, तो आंच बंद कर दें। गोभी को छान लें और तुरंत उसे ठंडे पानी में डाल दें। चाहें तो नल के नीचे रख कर भी उसे ठंडा कर सकते हैं।

अब इसमें डालने के लिए मसाले तैयार करें। यखनी में सौंफ की मात्रा अधिक रखते हैं, इसलिए एक से डेढ़ चम्मच साबुत सौंफ ले लें। इसके अलावा जीरा, काली मिर्च, अजवायन, लाल मिर्च, साबुत धनिया, लौंग, छोटी और बड़ी इलाइची, दालचीनी आधा-आधा चम्मच लें और इन सबको एक साथ मिला कर दरदरा पीस लें। इस मसाले में आधा चम्मच नमक मिलाएं और इन सबको उबली और ठंडी हो चुकी गोभी में डाल कर ठीक से मिला दें। गोभी को आधे घंटे के लिए मैरिनेट होने के लिए छोड़ दें।एक कड़ाही में तीन से चार चम्मच सरसों का तेल गरम करें। उसमें तेजपत्ता, छोटा टुकड़ा दालचीनी, साबुत धनिया, एक बड़ी इलाइची, सौंफ, जीरा, चार-पांच साबुत काली मिर्चें और हींग का तड़का तैयार करें। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें मैरिनेट की हुई गोभी डालें, आंच को धीमी कर दें और सब्जी को चला कर कड़ाही पर ढक्कन लगा दें।

अब निथरी हुई दही को ठीक से फेंट लें और सब्जी में मिला दें। जब तक सब्जी में खदबदाहट न होने लगे चलाते रहें, नहीं तो दही फट कर दानेदार और कड़ा हो जाएगा। अब इसमें आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और नमक डालें। नमक डालते समय सावधानी बरतें, क्योंकि पहले ही दो बार नमक का उपयोग कर चुके हैं। फिर एक से डेढ़ कप यानी इतनी मात्रा में पानी डालें कि गोभी का आधा हिस्सा उसमें डूब जाए। अगर आप इसमें रतनजोत या केसर डालना चाहते हैं, तो उसे इसी समय डालें। रतनजोत को तेल में भिगो कर रखना पड़ता है और केसर को ठंडे दूध में। अगर ये दोनों चीजें न भी डालें, तो स्वाद में बहुत फर्क नहीं पड़ेगा। कड़ाही पर ढक्कन लगा दें। धीमी आंच पर पकने दें। जब गोभी पूरी तरह पक जाए तो आंच बंद कर दें।
भी यखनी तैयार है। इसे रोटी, परांठे, नान के साथ खाएं, अलग स्वाद आएगा।

गोभी परांठा
भी परांठा बनाना बहुत आसान होता है। इसे भरते और बेलते समय सावधानी बरतें, तो यह फटता नहीं और खाने का आनंद बढ़ जाता है। गोभी परांठा बनाने के लिए गोभी को धोकर ठीक से साफ करें, फिर कद्दूकस कर लें। उसमें हरी मिर्च, हरा धनिया और अदरक बारीक काट कर डालें। फिर एक चम्मच साबुत धनिया, जीरा और अजावयन कूट कर डालें। लाल मिर्च पाउडर एक चम्मच, एक चम्मच गरम या सब्जी मसाला भी डालें और जरूरत भर का नमक डाल कर मिलाएं।अब मध्यम प्रकृति यानी न ज्यादा नरम और न ज्यादा कड़ा- आटा गूंथ लें। रोटी से दोगुना मात्रा में लोई काटें और उन्हें हथेली पर रख कर कटोरी का आकार दें। ध्यान रखें कि नीचे का हिस्सा थोड़ा मोटा रहे। अब इसमें जितना गोभी की पिट्ठी भर सकते हैं, अंगूठे से दबाते हुए भरें और लोई के ऊपर के हिस्से को मिला कर ठीक से बंद कर दें।

परांठा बेलते समय सावधानी बरतनी होती है, नहीं तो वह फट जाएगा। इसके लिए भरी हुई लोई को सूखे आटे में ठीक से लपेटें और फिर चकले पर रख कर हल्के हाथों से दबाते हुए जितना फैला सकते हैं, फैला लें। फिर बेलन से फैलाएं। ध्यान रहे कि किनारों की तरफ ज्यादा दबाव न डालें नहीं तो पिट्ठी बाहर निकल जाएगी और पकाते समय परांठे फूलेगा नहीं। अब गरम तवे पर डालें और मद्धिम आंच पर घी लगा कर जैसे परांठे पकाते हैं, पकाएं और हरी या लहसुन-टमाटर की चटनी और अचार के साथ गरमागरम परोसें।

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