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दाना-पानी: कुछ देसी रंग, लिट्टी-बाटी और दाल-चोखा

सर्दी के मौसम में देसी व्यंजों का आनंद ही अलग होता है। इस मौसम में हर इलाके के अलग-अलग देसी व्यंजन हैं, जैसे बाजरे और मक्के की रोटी उत्तर भारत में खूब पसंद की जाती है। इसी तरह बाटी-चोखा या लिट्टी-दाल-चोखा उत्तर प्रदेश और बिहार में इस मौसम में बहुत पसंद किया जाता है। लिट्टी और बाटी निस्संदेह बहुत लाजवाब व्यंजन है। अब यह उत्तर भारत के शहरों-महानगरों में भी खूब बिकने लगी है। पर बाहर का क्यों खाना, घर में बनाइए और आनंद लीजिए।

Author January 20, 2019 1:32 AM
बटी या लिट्टी बनाने का पारंपरिक तरीका कंडे यानी उपले की आग पर पकाने का है।

मानस मनोहर

लिट्टी-बाटी
बटी या लिट्टी बनाने का पारंपरिक तरीका कंडे यानी उपले की आग पर पकाने का है। पर शहरों में हर किसी के पास इसकी व्यवस्था नहीं होती, इसलिए कई लोग इस व्यंजन को बनाने के कतराते हैं। पर उसकी चिंता करने की जरूरत नहीं। बाटी या लिट्टी अवन या ग्रिलर में भी बनाई जा सकती है। कुछ लोग इसे कुकर में भी बना लेते हैं। बाटी मुख्यतया दो तरीके से बनती है। एक तरीका है भर कर बनाने का। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार में आमतौर पर चने का सत्तू भर कर बनाया जाता है। राजस्थान में इसके अलावा हरी मटर, आलू बगैरह की पिट्ठी भरी जाती है। इसके अलावा एक तरीका इसमें बिना कुछ भरे बनाने का भी है। बिना भरे बनने वाली बाटी को खाने के लिए गाढ़ी मसालेदार दाल और साथ में चोखा उत्तम रहता है। राजस्थान में इसके साथ चोखे की जगह गट्टे की सब्जी और चूरमा परोसा जाता है।

बाटी के लिए आटा गूंथने में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके लिए आटे में थोड़ा नमक और खाने का सोडा या इनो मिला लें। फिर दो चम्मच देसी घी डालें और पहले एक से दो कप गुनगुना दूध डाल कर गूंथें और फिर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गूंथ लें। इस तरह बाटी नरम और स्वादिष्ट बनती है।
अगर इसमें सत्तू का भरावन भरना है, तो इसका सत्तू बनाना भी थोड़े कौशल की मांग करता है। चने का सत्तू आजकल बाजार में आसानी से मिल जाता है। छह-सात लोगों के लिए करीब दो सौ ग्राम सत्तू पर्याप्त होता है। सत्तू को छान लें। फिर इसमें स्वादानुसार नमक और एक-एक चम्मच कलौंजी तथा अजवाइन डालें। फिर इसमें लहसुन की चार-छह कलियां और मध्यम आकार का प्याज बारीक काट कर डालें। हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक भी बारीक काट कर पर्याप्त मात्रा में डालें। अब करीब एक कलछी सरसों का तेल डालें। ऊपर से दो नीबू निचोड़ कर उसका रस भी मिला लें। अब इन सारी चीजों को दोनों हाथों की हथेलियों से रगड़ते हुए मिलाएं। ध्यान रखें कि सरसों तेल और नीबू का रस सत्तू में पूरी तरह जज्ब हो जाए। इसकी पहचान यह है कि जब सत्तू को मुट्ठी में लेकर दबाएंगे, तो वह लड्डू की तरह बंधेगा।

अब आटे की लोई से कटोरीनुमा बनाएं और उसमें दो चम्मच सत्तू की भरावन डाल कर ठीक से बंद कर दें। इस तरह सारी बाटी तैयार कर लें।
अगर बिना भरावन की बाटी या लिट्टी बनाना चाहते हैं, तो आटे की लोई को कटोरीनुमा आकार देकर सावधानी से किनारों को चिपका कर बंद कर दें, ताकी बाटी बीच से खोखली रहे। अब इन बाटियों को कंडे या फिर बार्बे-क्यू की धुआं रहित आग पर पलटते हुए सेंकें। अगर कंडे की आग या बार्बे-क्यू नहीं है तो अवन या ग्रिलर में इसे रख कर पकाएं। बाटी के पकने की पहचान यह है कि वह सिंकने के बाद फटनी शुरू हो जाती है। जब बाटी पक कर फटने लगे, तो उसे उतार लें और उसे देसी घी में चुपड़ें। अगर आप अवन या ग्रिलर पर नहीं पका सकते, तो एक तरीका कुकर में भी पकाने का है। कुकर में दो चम्मच देसी घी चुपड़ें और सावधानी से बाटियों को डालें। कुकर की सीटी हटा दें और फिर हल्की आंच पर इसे पकाएं। बीच-बीच में ढक्कन खोल कर बाटियों को पलटते रहें। जब बाटियां सिंक कर सुनहरी हो जाएं और फटने लगें तो बाहर निकाल लें। कुछ लोग उबलते पानी में बाटी को पका लेते हैं और फिर उन्हें कड़ाही में घी गरम करके सख्त होने तक तल लेते हैं। बाटी बनाने का यह भी एक तरीका है।

दाल और चोखा
बटी के साथ खाने के लिए दाल चना, मसूर और अरहर या उड़द को मिला कर मसालेदार बनाएं। इसके लिए दाल थोड़ी तीखी हो, तो खाने में अच्छी लगती है, इसलिए अपने ढंग से इसका तड़का तैयार करें। चोखा बनाने के लिए आलुओं को उबाल लें। फिर एक बड़ा बैंगन या चार-पांच लंबे बैगन और तीन चार टमाटर गैस की आंच पर ठीक से भून लें। भूनने के बाद इनका छिलका उतार लें। लहसुन, हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक बारीक-बारीक काट लें। इन सारी चीजों को उबले आलुओं में डालें। ऊपर से एक चम्मच अजवाइन, एक चम्मच कलौंजी, स्वादानुसार नमक और दो-तीन चम्मच सरसों का तेल डाल कर ठीक से मसल लें। चोखा तैयार है। इस तरह बाटी-दाल-चोखा बनाएं और खाएं, सर्दी का लुत्फ उठाएं। बाटी के साथ अगर चाहें तो प्याज-टमाटर की चटनी भी परोसें, स्वाद कुछ और बढ़ जाएगा।

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