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दाना-पानी- हरी मटर की हरियाली

हरी मटर में प्रोटीन के तत्त्व और उच्च फाइबर पाया जाता है जो शरीर में मौजूद शुगर की मात्रा को संतुलित करता और डायबिटीज के खतरों से भी बचाता है।

Author November 26, 2017 02:27 am
Health Tips: सर्दी में फायदेमंद है हरी मटर का सेवन करना

मानस मनोहर

हरी मटर में अनेक गुण हैं। इसमें विटामिन ‘के’ भरपूर मात्रा में होता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। यह आॅस्टियोपोरोसिस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है। मटर में लो कैलोरी और लो फैट और हाई फाइबर होता है, जो वजन को बढ़ने से रोकता है।  मटर शरीर में मौजूद आयरन, जिंक, मैगनीज और तांबा शरीर को बीमारियों से बचाता है। मटर में एंटीआॅक्सीडेंट होता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। ताजा हरे मटर के दानों को पीस कर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन बंद हो जाती है। हरी मटर में शरीर से ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने का गुण होता है और इसके सेवन से ब्लड में कोलेस्ट्रॉल संतुलित होता है। शरीर से कई बीमारियां भी इसके खाने से कम होती हैं। एक अध्ययन में पता चला है कि मटर में मौजूद काउमेस्ट्रोल कैंसर से लड़ने में मददगार होता है। साथ ही हरी मटर का प्रतिदिन सेवन करने से पेट के कैंसर का खतरा कम हो सकता है। इसमें मौजूद फालोक एसिड पेट में भ्रूण की समस्याओं को दूर करता है, साथ ही गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषण देता है।

इसके सेवन से दिल की बीमरियां कम होती हैं। इसमें एंटी-इनफ्लैमेटरी कंपाउंड होते हैं और एंटी-आॅक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होता है। इन दोनों के मेल से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है। हरी मटर में प्रोटीन के तत्त्व और उच्च फाइबर पाया जाता है जो शरीर में मौजूद शुगर की मात्रा को संतुलित करता और डायबिटीज के खतरों से भी बचाता है।

हरी मटर के व्यंजन

आमतौर पर ज्यादातर लोग हरी मटर को पनीर, आलू, गोभी, गाजर के साथ मिला कर सब्जी के रूप में खाते हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मटर के दानों को घुघनी के रूप में खाने का आम चलन है। हल्के तेल में जीरे और हरी मिर्च का तड़का लगाया और हरी मटर के दानों को छौंक कर पका लिया, घुघनी तैयार। कुछ लोग इसके साथ चिड़वा यानी पोहा को सूखा भून या हल्के तेल के साथ तल कर मटर की घुघनी के साथ मिला कर खाते हैं। यह बहुत स्वादिष्ट नाश्ता होता है।

मगर हरी मटर के परांठे का स्वाद निराला होता है। हरी मटर के परांठे बनाने के लिए बहुत कुछ नहीं करना पड़ता। कड़ाही में एक-डेढ़ चम्मच तेल या घी गरम करें। उसमें जीरा और राई का तड़का लगाएं और मटर के दानों को छौंक दें। मटर पक जाए तो उसे हाथों से या बेलन की मदद से मसल लें। उसमें नमक, थोड़ी-सी लाल मिर्च का पाउडर, बारीक कटा हुआ धनिया पत्ता, अदरक और हरी मिर्च मिला लें। अगर चाहें तो आधा चम्मच धनिया पाउडर भी मिला सकते हैं। इन सारी चीजों को मसल कर पिट्ठी तैयार कर लें। अब जैसे आलू या दाल के परांठे बनाते हैं, उसी तरह आटे की लोइयां बना कर भरते जाएं और बेल कर परांठे की तरह सेंक लें।  इसे हरी चटनी, दही और अचार के साथ या आपको जैसे खाना पसंद हो खाएं।

हरी मटर की दाल

हरी मटर की, घुघनी और परांठे तो अक्सर घरों में खाए जाते हैं, पर इसकी दाल का स्वाद ही अलग होता है। सर्दी में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में हरी मटर की मसालेदार दाल खूब खाई जाती है।
इस दाल को बनाना बहुत आसान है। जिन लोगों को सिर्फ मिक्सर ग्राइंडर की आदत है, उनके लिए थोड़ी दिक्कत हो सकती है, पर परेशान होने की जरूरत नहीं। इसके लिए इमामदस्ते या बड़े आकार की खरल की मदद ली जा सकती है। वैसे ग्रामीण इलाकों में महिलाएं सिलबट्टे पर या ओखली में मोटा-मोटा कूट कर इसकी दाल बनाती हैं।

बनाने की विधि

मटर के कच्चे दानों को खरल या सिलबट्टे पर मोटा-मोटा कूट लें। फिर उसे कुकर में एक सीटी आने तक पका लें। उसे ठंडा होने दें।
एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें जीरा, अजवाइन, हींग, लहसुन और बारीक कटी हरी मिर्च का तड़का लगाएं। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें उबली हुई मटर डाल दें। ऊपर से नमक, सब्जी मसाला और थोड़ा-सा लाल मिर्च पाउडर डाल कर दस से पंद्रह मिनट पकने दें। दाल को ज्यादा पतली न बनाएं।  इसकी दूसरी विधि है कि अगर आप बगैर टमाटर-प्याज के सब्जी पसंद नहीं करते, तो तड़के के साथ पहले बारीक कटे टमाटर-प्याज को घी छोड़ने तक पकने दें, फिर उसमें मसाले मिलाएं और कुटी हुई हरी मटर को सीधा उसमें डाल कर थोड़ी देर भून लें, फिर थोड़ा-सा पानी डाल कर कड़ाही पर ढक्कन लगा कर मद्धिम आंच पर करीब पंद्रह मिनट पकाएं।
हरी मटर की मसालेदार दाल तैयार है।
इसे परोसने से पहले इसमें हरी धनिया के पत्ते और बारीक कटे अदरक के लच्छे डाल कर सजाएं। चाहें तो ऊपर से दो चम्मच देसी घी और डाल सकते हैं।
हरी मटर की दाल को रोटी और चावल दोनों के साथ खाया जा सकता है।

 

 

 

 

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