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कहानी: अच्छी आदत

आज स्कूल की छुट्टी होने पर मीतू बहुत खुश थी। उसे किसी भी विषय में होमवर्क नहीं मिला था। ‘आज जी भर के टीवी देखूंगी।’ मन ही मन दोपहर में आने वाले धारावाहिकों के नाम याद करती मीतू घर में घुसी और एक तरफ बस्ता फेंक कर फटाफट जूते-मोजे और यूनिफार्म उतारी। हाथ-मुंह धोकर किसी तरह खाना निगला और टीवी के सामने जम कर बैठ गई। ‘पता नहीं क्या बात है, आज टीवी में कोई भी अच्छा कार्यक्रम क्यों नहीं आ रहा।’

Author March 18, 2018 2:34 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

आशा शर्मा

आठ साल की चुलबुली मीतू घर और स्कूल में सबकी लाडली थी। वह न केवल पढ़ने में होशियार थी, बल्कि खेलकूद में भी सबसे आगे रहती थी। बस उसमें एक ही कमी थी, उसे टीवी देखने का बहुत शौक था। एक बार टीवी देखने बैठ जाए, तो फिर उसे वक्त का जरा भी होश नहीं रहता। फिर तो खाना-पीना, पढ़ना-खेलना सब धरा का धरा रह जाता। मां की डांट खाकर एक बार तो उसे अपना वक्त बर्बाद होने का दुख होता, लेकिन अगले ही दिन फिर वही ढाक के तीन पात!  आज स्कूल की छुट्टी होने पर मीतू बहुत खुश थी। उसे किसी भी विषय में होमवर्क नहीं मिला था। ‘आज जी भर के टीवी देखूंगी।’ मन ही मन दोपहर में आने वाले धारावाहिकों के नाम याद करती मीतू घर में घुसी और एक तरफ बस्ता फेंक कर फटाफट जूते-मोजे और यूनिफार्म उतारी। हाथ-मुंह धोकर किसी तरह खाना निगला और टीवी के सामने जम कर बैठ गई। ‘पता नहीं क्या बात है, आज टीवी में कोई भी अच्छा कार्यक्रम क्यों नहीं आ रहा।’ काफी देर तक रिमोट के बटन दबाते-दबाते मीतू निराश होने लगी थी। तभी नेलपॉलिश के एक विज्ञापन पर उसकी नजर ठहर गई। वह ध्यान से देखने लगी। मॉडल के लंबे तराशे हुए नाखून। उन पर लगी लाल-गुलाबी नेलपॉलिश उन्हें बेहद आकर्षक बना रही थी। मीतू ने अपने नाखूनों की तरफ देखा -‘कितने छोटे-छोटे हैं। शेप तो है ही नहीं। टीचर का वश चले तो जड़ से ही उखाड़ दे।…‘सोच कर मीतू कुछ निराश-सी हो गई।

‘काश! मेरे भी नाखून इस मॉडल जैसे होते, तो हाथ कितने सुंदर दिखते।… सारी सहेलियां जल कर कोयला हो जातीं। ‘यह कल्पना करते ही मीतू के चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई।’
‘मैं भी अपने नाखून बढ़ाऊंगी।’ मीतू ने तय कर लिया, मगर कैसे? टीचर तो रोज नाखून चेक करती हैं। अगर जरा भी बढ़े या गंदे हों, तो तुरंत काटने का आदेश जारी कर देती हैं। तो क्या करूं कि टीचर की उन पर नजर ही न पड़े। ‘मीतू सोचती रही।’ मगर यह तो उसने तय कर लिया था कि नाखून तो वह बढ़ा कर रहेगी। एक सप्ताह तक तो टीचर का ध्यान मीतू के नाखूनों की तरफ नहीं गया। फिर धीरे-धीरे जब नाखून बड़े होने लगे तो टीचर ने उसे टोकना शुरू किया, मगर ‘मम्मी को टाइम नहीं मिला’ का बहाना बना कर मीतू ने एक सप्ताह और अपने नाखूनों को बचा लिया। अब नाखून बड़े होने लगे थे। मीतू उन्हें देख-देख कर खुश हो रही थी। एक दिन अपने छोटे भाई को गोद में लेते समय मीतू के नाखून से उसकी बांह पर खरोंच लग गई। भाई के कोमल हाथ पर खून छलक उठा। उसकी चीख सुन कर मां दौड़ी-दौड़ी आई मगर तब तक मीतू वहां से खिसक चुकी थी। मीतू को भाई की चोट का दुख तो था, मगर इतनी मेहनत से बढ़ाए गए नाखून वह अब भी काटने को राजी नहीं थी। एक-दो बार नहाते समय मीतू ने खुद अपने शरीर पर भी खरोंच लगा ली। एक दिन तो अपना सिर खुजाते-खुजाते चमड़ी भी साथ ही उतार लाई। दर्द के मारे रुलाई फूट पड़ी, मगर फिर भी उसे कोई अफसोस नहीं था। ‘बस! नाखून थोड़े से और बढ़ जाएं। फिर गहरे लाल रंग की नेलपॉलिश लगाऊंगी।…’ अपने नाखूनों को प्यार से निहारती मीतू सोच रही थी। ‘मीतू! अब बहुत हो चुका। आज तुम्हारे नाखून मुझे ही काटने पड़ेंगे। देखो कितने बड़े हो गए हैं। और कितनी गंदगी भरी है इनमें।’ गुस्से में भरी टीचर नेलकटर लेकर मीतू की तरफ बढ़ी।

‘अरे! तुम्हें तो बुखार है।’ मीतू का हाथ पकड़ते ही टीचर ने कहा। प्रिंसिपल मैडम ने उसे डॉक्टर को दिखाया और आवश्यक दवाएं देकर घर भेज दिया। बुखार की दवाएं लेने के बाद भी मीतू का बुखार लगातार बना हुआ था। उसके पापा ने अपने दोस्त डॉक्टर गुप्ता को घर बुला कर मीतू का दोबारा चेकअप करने को कहा। डॉक्टर गुप्ता ने मीतू के बढ़े और गंदे नाखून देखते ही कहा- ‘बीमारी की जड़ तो यहां छिपी है।’ ‘नाखूनों से होती हुई गंदगी खाने के साथ हमारे पेट में जाती है और इसके साथ ही कई हानिकारक कीटाणु भी। इनसे पेट में इन्फेक्शन हो जाता है और बुखार के साथ-साथ कई अन्य बिमारियों का कारण भी बनता है।’ डॉक्टर गुप्ता ने मीतू और उसके पापा को समझाया। ‘मगर अंकल! टीवी में तो सभी मॉडल्स के नाखून कितने बड़े होते हैं। वे क्यों बीमार नहीं होते?’ मीतू अब भी अपने नाखून काटने को तैयार नहीं थी।

‘बेटा! मॉडल्स के लिए तो ये आजीविका का साधन हैं। ये उनके व्यवसाय का हिस्सा है। अच्छा बताओ! क्या तुमने कभी अपनी मां के नाखून बढ़े हुए देखे हैं? और मुझे देखो! मेरे नाखून भी कटे हुए हैं। नाखून साफ रखना एक स्वस्थ आदत है। तुम अभी बच्ची हो। जब समझदार हो जाओ और नाखून साफ रखना सीख जाओ, तब नाखून बढ़ा लेना। मगर सिर्फ शौक पूरा करने के लिए। अभी इन्हें काट लो ताकि जल्दी ठीक हो सको।’ कहते हुए डॉक्टर गुप्ता ने नेलकटर मंगवाया। मीतू ने देखा उसके नाखून वाकई बहुत मैले थे। उसने खुशी-खुशी अपने नाखून कटवा लिए। अगले दो दिन बाद मीतू स्वस्थ होकर स्कूल जाने लगी थी। स्कूल पहुंचते ही मीतू ने अपनी टीचर की तरफ हाथ बढ़ा दिए और मुस्कुरा कर बोली- ‘मैडम! बीमारी जड़ से खत्म हो गई।’ टीचर ने भी अच्छी आदत अपनाने के लिए उसकी पीठ थपथपाई।

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