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मुद्दा: और भी काम हैं किटी के सिवा

ये किटी पार्टी समूह ‘सोशलाइज’ करने का अच्छा अवसर उपलब्ध कराते हैं, लेकिन अवसरों का इस्तेमाल पार्टी से हट कर या उसके साथ भी किया जा सकता है जैसे, किसकी क्या रुचियां हैं जानने और अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने में।

Author December 9, 2018 12:41 AM
एक तरफ ‘कपल किटी’ का रिवाज भी है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आज के समय में कुछ लोगों के पास बिलकुल समय नहीं है और कुछ के पास इतना समय है कि उसे काटने की समस्या है। सवाल है कि हम अपने समय को गुणवत्तापूर्ण तरीके से कैसे बिताएं ताकि कुछ सीखने के साथ-साथ एक बेहतर इंसान बन सकें। आजकल समय बिताने का मतलब सिर्फ मौज-मस्ती करना, दोस्तों के साथ घूमना-फिरना, बाहर खाना या फिल्म देखना रह गया है। ये सब चीजें तनाव मिटाने या दुख-दर्द साझा करने में तो मदद कर सकती हैं, लेकिन एक व्यक्ति के तौर पर कुछ आगे बढ़ने में मदद नहीं करतीं।

बहुत-सी पढ़ी-लिखी और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार की महिलाएं समय काटने के लिए किटी पार्टी से जुड़ जाती हैं। यह किटी पार्टी माह में एक या दो बार होती है। कई महिलाएं कई किटी पार्टियों की सदस्य होती हैं। इस तरह महीने में पांच से छह बार उनका बाहर निकलना हो जाता है। अधिकतर किटी पार्टियां किसी होटल में या किसी के घर पर आयोजित की जाती हैं। आमतौर पर किटी पार्टी में तंबोला और किटी पार्टी गेम खेले जाते हैं, जो बैठे-बैठे खेले जाने वाले खेल होते हैं। फिर हाई-टी या खाने के साथ किटी पार्टी समाप्त होती है। आजकल थीम आधारित किटी पार्टियां भी होने लगी हैं, जिसमें किसी रंग या आने वाले त्योहार के अनुसार कपड़े पहनने की गुजारिश की जाती है। फिर सबसे अच्छे दिखने वाले सदस्य को कोई उपहार दिया जाता है। सोशल मीडिया ने इसे और प्रचारित किया है, जिसमें हर किटी के फोटो फेसबुक या वाट्स ऐप्प पर भेजे जाते हैं और उसमें भी अच्छा दिखने की होड़ होती है। आमंत्रण से लेकर फोटो तक सब सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं। पहले तो किटी में तीस-चालीस उम्र पार की महिलाएं ही हुआ करती थीं, लेकिन अब कॉलेज जाने वाली और बेहद कम उम्र की लड़कियां भी होटल में किटी पार्टी करती मिल जाएंगी। एक तरफ ‘कपल किटी’ का रिवाज भी है, जिसमें पति-पत्नी दोनों शामिल होते हैं, तो कई किटी समूह एक ही जाति/ समाज के सदस्यों के बने होते हैं।

सवाल है कि इन सबसे फायदा क्या होता है? कुछ टाइम पास और मौज-मस्ती के अलावा क्या होता है? अगर किटी का उद्देश्य एक-दूसरे को बेहतर रूप से जानना या एक दूसरे की समस्याओं का समाधान करना होता, तो वह इन ऊपरी दिखावों से पूरा नहीं हो सकता, जिसमें सिर्फ कपड़ों और खाने पर ही ध्यान होता है। दूसरा, यह किटी समाज में महिलाओं की भूमिकाबद्ध छवि को नहीं तोड़ती है, जिसमें उनको खाने-पीने, सजने-संवरने और इसी तरह की चीजों का शौकीन माना जाता है और महिलाएं उसी छवि और समाज से बंधी होने के बावजूद वैसा ही आचरण भी करती हैं। एक ही जेंडर का समूह होने से बातें भी सामान्यतया एक-सी हो जाती हैं। यह भी देखने में आया है कि कई साल तक किटी से जुड़े रहने के बाद भी किटी के सदस्य एक-दूसरे को अच्छे से जानते तक नहीं हैं। कई बार महिलाओं को एक-दूसरे के पहले नाम तक नहीं पता होते। हालांकि अपवाद भी हैं, जिसमें महिलाओं के समूह मिल कर समाज के लिए कुछ अच्छा काम कर रहे हैं, जैसे विगत दिनों सुनने में आया कि किसी महिला समूह ने झुग्गी बस्ती में बच्चों के लिए पुस्तकालय खोला है। पर यह संख्या उंगलियों पर गिनने वाली ही है। कहने का तात्पर्य यह नहीं कि किटी पार्टी हो ही नहीं, लेकिन कैसे ‘एक पंथ दो काज’ हो सकते हैं, ताकि उसमें सभी को कुछ सीखने के भी मौके मिलें?

ये किटी पार्टी समूह ‘सोशलाइज’ करने का अच्छा अवसर उपलब्ध कराते हैं, लेकिन अवसरों का इस्तेमाल पार्टी से हट कर या उसके साथ भी किया जा सकता है जैसे, किसकी क्या रुचियां हैं जानने और अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने में। मसलन, अगर किसी को स्केचिंग या पेंटिंग पसंद है, तो अगली किटी में वह सबका स्केच बनाएगी या बनाना सिखाएगी या इसी तरह का कोई और शौक। महीने में एक बार अपने शहर के किसी ऐतिहासिक स्थल पर जाएं और उसके इतिहास को जानें। अगर किसी को बैंक का काम करना या इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करना आता है तो वह सबको सिखा सकती है। प्रश्नोत्तरी आयोजित करना कि एक सदस्य के रूप में हम एक-दूसरे को या एक-दूसरे के परिवार को कितना बेहतर जानते हैं? किहीं समसामयिक मुद्दों पर चर्चा या पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा, जो घर-परिवार से जुड़े हों जैसे- अगरबत्ती, फिनाइल क्लीनर या डियोडेरेंट का सेहत पर प्रभाव। ऐसे ही और मुद्दों को खोजना, उन पर जानकारी जुटाना और चर्चा करना। इसके अलावा, महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। अगर एक महीने बाद मिल रहे हैं तो एक महीने में हर सदस्य एक किताब पढ़ेगा और अगली बार उस पर कुछ चर्चा की जाएगी। चर्चा या सत्र संचालन की जिम्मेदारी किसी एक को दी जा सकती है।

अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने और इसके लिए लोगों को जागरूक करने में किटी के सदस्यों की मदद लें- जैसा कि कॉलोनी किटी वाले समूह कर सकते हैं। शहर में चल रहे विभिन्न अभियानों की जानकारी रखें और अपने किटी के सदस्यों के साथ सक्रियता से उनमें भाग लें- जैसे मैराथन, कार रैली, कोई नाटक या प्रदर्शनी आदि। आप अपने समूह के साथ कचरा बीनने वाले बच्चों या स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पढ़ाने का काम भी कर सकते हैं। सिर्फ अपने समाज या जाति की किटी के अलावा ऐसे समूह के सदस्य बनें, जिनमें हर तरह के लोग हों। इससे आपका दायरा बढ़ेगा और हर तरह के लोगों से मिलने-जुलने का मौका मिलेगा। आप खुद भी ऐसी ढेर सारी गतिविधियां सोच सकते हैं, इससे आपकी किटी पार्टी की बोरियत भी खत्म होगी और आप हर बार कुछ नया सीखेंगे, आपकी सोच को विस्तार मिलेगा। क्योंकि अक्सर कई बार हमें पता ही नहीं होता कि देश और समाज में क्या चल रहा है, ऐसे मुद्दे आपको अन्य विषयों की तरफ सोचने का नजरिया देंगे और समाज से जुड़ कर कुछ कर पाने का संतोष भी होगा। घर से बाहर निकल कर विभिन्न अनुभव हासिल करना न सिर्फ आपके व्यक्तित्व में चार चांद नहीं लगाता, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में आपको समाज में सम्मान भी दिलाता है। आप तरह-तरह के लोगों से मिलते हैं, उनके विचार जानते अपने विचार साझा करते, विभिन्न परिस्थितियों का सामना करते हैं और उनसे निपटना सीखते हैं। हर किसी में रचनात्मक ऊर्जा होती है और युवावस्था में तो और भी ज्यादा, तो क्यों न इस ऊर्जा का इस्तेमाल अपने आसपास की दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने और एक बेहतर इंसान बनने में किया जाए। अगर आज के दिन आपने कुछ नहीं सीखा तो वह दिन आपके हाथ से निकल गया।

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