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कहानी- गलती का अहसास

‘अरे, तू पिद्दी-सा क्या कबड्डी खेलेगा? कहीं जरा-सा हाथ भी लग गया किसी का, तो वहीं गिर जाएगा। तू तो बस किताबों से ही खेल!’ यह कहते हुए वह मैदान की ओर भाग गया। राजेश मन ही मन सोचा कि क्या कोई ऐसी दवा नहीं है जिसे पीते ही वह तुरंत मोटा-तगड़ा हो जाए? काश!
Author November 26, 2017 03:10 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

उस दिन जब खाने की छुट्टी के समय राजेश चुपचाप अपना खाना खा रहा था, तभी मनोज खेल के मैदान से दौड़ता हुआ उसके पास आकर बोला- ‘हम लोग कबड्डी खेलने जा रहे हैं। तुम्हें भी खेलना हो तो चलो।’ ‘नहीं, मैं नहीं चलूंगा। अभी मुझे पढ़ना है।’ राजेश ने कहा। यह सुन कर मनोज जोर से हंसता हुआ बोला- ‘अरे, तू पिद्दी-सा क्या कबड्डी खेलेगा? कहीं जरा-सा हाथ भी लग गया किसी का, तो वहीं गिर जाएगा। तू तो बस किताबों से ही खेल!’ यह कहते हुए वह मैदान की ओर भाग गया। राजेश मन ही मन सोचा कि क्या कोई ऐसी दवा नहीं है जिसे पीते ही वह तुरंत मोटा-तगड़ा हो जाए? काश! अगर ऐसा हो पाता तो मनोज और अन्य लड़कों को ऐसा सबक सिखाता कि वे जिंदगी भर याद रखते।

पिछले महीने एक दिन पापा के साथ पहलवान अंकल उसके घर आए थे। उनका भारी-भरकम शरीर देख कर वह सोचने लगा था कि जो चीज पहलवान अंकल खाते हैं, अगर वही चीजें वह भी खाने लगे तो उनकी तरह मोटा हो जाएगा। डरते-डरते उसने अपने मन की बात पहलवान अंकल को बता दी। सुन कर वे बहुत हंसे थे। उन्होंने कहा- ‘बेटा, कमजोर वह नहीं है, जिसे लोग कमजोर समझते हैं। कमजोर तो वह है जो खुद को कमजोर समझता है। तुम किसी से कमजोर नहीं हो।’ पर वह मन ही मन सोचता रहा कि शायद पहलवान अंकल उसे बताना नहीं चाहते कि वे क्या खाते हैं।
आज फिर मनोज ने उसके दुबलेपन का मजाक उड़ाया था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे? क्या हमेशा मजाक ही उड़ता रहेगा? यही सब सोचते-सोचते उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह सुबकने लगा।  ‘क्या हुआ राजेश? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है न?’ कक्षा में घुसते ही दीपक ने राजेश को देख कर कहा। ‘अरे, तुम तो रो रहे हो? क्या हुआ?’ राजेश की आंसुओं से भीगी आंखें देख कर दीपक ने पूछा। राजेश ने रोते-रोते सारी बात बता दी।
तब दीपक बोला- ‘मेरे पड़ोस में रहने वाली चाची की लड़की नेहा भी बहुत दुबली थी। पिछले महीने उसकी मम्मी एक बुढ़िया के पास उसे ले गई थीं। बुढ़िया ने नेहा की पीठ पर कुछ पीले रंग की दवा लगाई थी। और कान के पास कुछ बुदबुदा कर फूंकें मारी थीं। दवा लगाते ही नेहा चिल्लाई थी। जहां दवा लगाई गई थी, वहां फफोले पड़ गए थे। अब ठीक हो गए हैं और अब वह उतनी दुबली भी नहीं रही। तुम चाहो तो उस बुढ़िया को दिखा दो।’

दीपक की बात सुन कर राजेश के चेहरे पर ऐसी चमक उभर आई मानो उसे वास्तव में कोई रामबाण दवा मिल गई हो। वह बोला- ‘क्या तुम मुझे उस बुढ़िया अम्मा से मिलवा सकते हो?’दूसरे दिन वह छुट्टी के बाद दीपक के साथ बुढ़िया के पास गया। सारी बात सुन कर बुढ़िया ने कुछ देर आंखें बंद करके कहा- ‘आज फूंक डाल कर दवा लगा देती हूं। अगले मंगल को फिर आना।’ यह कह कर उसने राजेश के कान में कुछ बुदबुदा कर तीन बार फूंक मारी और फिर कमीज उठा कर उसकी पीठ में एक पीली दवा लगा दी। दवा लगाते ही राजेश को ऐसा लगा जैसे किसी ने आग का जलता हुआ अंगारा छुआ दिया हो। लेकिन मोटे होने की कल्पना ने उसके इस दर्द को दबा दिया।

शाम को घर पहुंचते ही मम्मी ने पूछा- ‘इतनी देर कहां थे?’ ‘कहीं नहीं मम्मी। मेरे दोस्त दीपक का जन्मदिन था, इसलिए उसके घर चला गया था।’ यह कह कर वह सीधे अपने कमरे में चला गया। रात को उसने ठीक से खाना भी नहीं खाया। मारे जलन के उसकी जान निकली जा रही थी। तभी मम्मी की नजर राजेश की पीठ पर पड़ी। जली हुई पीठ देख कर वह चिल्ला कर बोलीं- ‘यह क्या हुआ राजेश? तुम्हारी पीठ कैसे जल गई?’

तब उसने सारी बात सच-सच बता दी। शाम को जब पापा को यह बात पता लगी, तो वे चिंतित हो उठे। उन्होंने समझाने के लिए एक योजना बनाई। राजेश को अपने पास बुला कर उन्होंने प्यार से पूछा- ‘बेटा, एक बात बताओ। हम लोग खाना क्यों खाते हैं? अपनी भूख को खत्म करने के लिए न! मान लो अगर तुम्हें तीन दिन खाना न मिले तो क्या होगा?’ ‘खाना न खाने से मैं कमजोर हो जाऊंगा। कोई काम भी नहीं कर पाऊंगा।’ राजेश ने कहा।  ‘बिल्कुल ठीक! इसका मतलब यह हुआ कि अगर हम खाना खाते रहते हैं तो हमें कमजोरी नहीं आती। दुबलेपन का अटूट रिश्ता तो पौष्टिक खाने से है।’ कुछ पल रुक कर उन्होंने फिर कहा- ‘कल जो तुम दुबलापन का इलाज कर कर आए थे, वह कुछ और नहीं, केवल अंधविश्वास था। वह पीली दवा और कुछ नहीं, तेजाब था। लेकिन तुम्हारे इस इलाज से तुम्हारा दुबलापन दूर नहीं होगा, बल्कि और बढ़ेगा। जानते हो कैसे? देखो, तुम्हें जलन के कारण कल से दर्द हो रहा है न! इस कारण कल रात तुमने ठीक से खाना भी नहीं खाया। और ठीक से खाना नहीं खाया जाएगा, तो कभी भी मोटा नहीं हुआ जा सकता।’  अब पापा की बातें राजेश की समझ में आ रही थीं। उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। उसने कहा- ‘मुझे माफ कर दीजिए पापा जी! अब मुझे दुबलापन दूर करने की सही दवा पता चल गई है।’ कहते-कहते उसकी आवाज भर आई।
पापा ने उसे गोद में उठा कर चूम लिया। ०

 

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