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बाल कहानी- रसगुल्ले

अब बस, एक ही चीज बाकी थी, रसगुल्ले। वे रसगुल्ले बनाने की तैयारी करने लगीं। तभी उनके मन में आया, ‘कितना मजा आए, अगर इस बार स्पंजी रसगुल्ले बना कर देखूं! अभी कुछ रोज पहले ही तो पड़ोसन मीता से सीखा है। देखती हूं, कैसे बनते हैं!... निक्का के दोस्त खुश हो जाएंगे।’
Author November 19, 2017 06:07 am
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

प्रकाश मनु

इस बार निक्का क्लास में फर्स्ट आया, तो उसके दोस्तों ने घेर लिया, ‘पार्टी… निक्का, पार्टी!’
निक्का ने कुछ बात बना कर पिंड छुड़ाना चाहा। पर उसके दोस्त भी कम न थे। ‘हां भई, अब तो तुम्हें पार्टी देनी ही होगी।’ गुड्डन हंस कर बोला।
‘हां, और उसमें तुम्हारी मम्मी के हाथ के बने दही-बड़े भी होने चाहिए!’ नीता चहकी। उसे याद था, पिछली बार निक्का की बर्थडे पार्टी में उसकी मम्मी ने अपने हाथ के बनाए दही-बड़े खिलाए थे और वे इतने स्वादिष्ट थे कि खाते-खाते उसकी जोर की हंसी छूट गई थी, खी-खी-खी…!!
‘हां-हां दही-बड़े। निक्का की मम्मी के हाथ के बने दही-बड़े!…खाएंगे जी खाएंगे, मिल कर खाएंगे। पार्टी का लुत्फ उठाएंगे।’
सबने हंसते हुए नारा लगाया तो निक्का हंस पड़ा। खुश होकर बोला, ‘अच्छा, ठीक है। इस इतवार को तुम लोग घर आना। मैं तुम्हें अच्छी-सी पार्टी दूंगा। दही-बड़े तो होंगे ही, साथ में मम्मी के हाथ के बने रसगुल्ले भी। मेरी मम्मी रसगुल्ले इतने अच्छे बनाती हैं कि तुम लोग याद करोगे!’
निक्का के दोस्तों में सत्ते उसके घर के बिल्कुल पास रहता था। उसने कहा, ‘याद रखना निक्का। कहीं ऐसा न हो कि हम मिलने आएं और तुम बाहर से ही बाय-बाय कर दो।’
‘ना जी ना, दावत होगी। खूब बढ़िया वाली दावत। मैं मम्मी से कहूंगा, वे खूब चटपटे दही-बड़े बनाएं। साथ ही रसगुल्ले भी खिलाएं।’ निक्का जोश में आकर बोला।
घर आकर निक्का ने मम्मी से कहा तो वे मुस्कुराते हुए बोलीं, ‘ठीक है, मैं तेरे दोस्तों के लिए कुछ बढ़िया चीजें बनाऊंगी, और तू कहता है तो दही-बड़े भी बना लूंगी। जरा स्पेशल आइटम हो जाएगा।’
‘पर मम्मी… रसगुल्ले! इसके साथ-साथ रसगुल्ले जरूर बनाना। मैंने दोस्तों को प्रॉमिस किया है कि मम्मी के हाथ के बने रसगुल्ले भी उन्हें जरूर खिलाऊंगा।’ निक्का ने इठलाकर कहा।
‘ओहो जी, मम्मी से पूछा भी नहीं और प्रॉमिस कर दिया!’ मम्मी हंसने लगीं।
‘इसलिए कि आप तो मेरी प्यारी मम्मी हैं न। कभी मुझे न नहीं कहतीं।’ कहते-कहते निक्का मम्मी के गले में झूल गया।
‘अच्छा बाबा, अब तू सब कुछ मुझ पर छोड़ दे और आराम से जाकर खेल…!’ मम्मी ने कहा तो निक्का को यकीन हो गया कि पार्टी सचमुच वैसी ही जोरदार होगी, जैसी उसके दोस्तों ने उम्मीद की होगी।

इतवार को मम्मी ने सुबह उठते ही तैयारियां शुरू कर दीं। पनीर, बैगन और आलू-प्याज के खस्ता पकौड़े। उड़द की कचौड़ियां… बूंदी का रायता और आलू-कोफ्ते की सब्जी। साथ ही खूब बढ़िया, चटपटे दही-बड़े।
अब बस, एक ही चीज बाकी थी, रसगुल्ले। वे रसगुल्ले बनाने की तैयारी करने लगीं। तभी उनके मन में आया, ‘कितना मजा आए, अगर इस बार स्पंजी रसगुल्ले बना कर देखूं! अभी कुछ रोज पहले ही तो पड़ोसन मीता से सीखा है। देखती हूं, कैसे बनते हैं!… निक्का के दोस्त खुश हो जाएंगे।’
उन्होंने बड़ी मेहनत से स्पंजी रसगुल्ले बनाए। लेकिन थोड़ी गड़बड़ हो गई। रसगुल्ले खाने में तो स्वादिष्ट थे, पर देखने में उतने गोल-गोल, सुंदर नहीं थे।
देख कर निक्का को बड़ी शर्म आई। बोला, ‘मम्मी, आपने स्पंजी रसगुल्ले बनाए, पर बड़े टेढ़े-मेढ़े। कुछ तो टूट कर बिखर भी गए हैं। मेरे दोस्त मजाक उड़ाएंगे, आप इन्हें सर्व न करना!’
‘ठीक है’ मम्मी धीरे से बोलीं। उनका मन बुझ गया। पर निक्का से उन्होंने कुछ नहीं कहा।
शाम को निक्का के दोस्त आए, तो खूब हंगामा हुआ। उन्होंने नाच-गाकर रंग जमा दिया। कुछ ने मजेदार चुटकुले भी सुनाए। फिर सबको भूख लगी तो निक्का की मम्मी झट से नाश्ता ले आर्इं। गरमागरम जलेबी, खस्ता कचौड़ियां, सब्जी, रायता। ढेर सारे पकौड़े और इमली की चटनी। साथ ही बढ़िया, चटपटे दही-बड़े। निक्का के कहने पर उन्होंने बाजार से ढोकला, बर्गर और चाउमिन भी मंगा लिए थे! देख कर सबके मुंह में पानी आ गया। सबने खूब डट कर खाया। फिर ऊपर से आइसक्रीम खाने का तो मजा ही कुछ और था। किसी ने दो-दो, तीन-तीन आइसक्रीम खार्इं।
पर निक्का के दोस्तों को अब भी किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। जाने कैसे आशु के मुंह से निकल ही गया, ‘अरे निक्का, तुम तो मम्मी के हाथ के बने रसगुल्ले खिलाने को कह रहे थे। आज कैसे मेन्यू बदल गया?’
‘रसगुल्लों की बात तो बिल्कुल याद ही नहीं रही!’ निक्का ने झेंप कर इधर-उधर देखते हुए कहा।
पर बात निक्का की दीदी पम्मो के कानों में भी पड़ी। जाने क्या हुआ कि वे फिक्क से हंस पड़ीं, ही-ही-ही…!
सब चौंके। निकिता ने पूछ लिया, ‘पम्मो दीदी, कोई खास बात है…?’
‘हां है, एक राज की बात!’ कह कर पम्मो दीदी फिर उसी तरह जोर से हंसते हुए बोलीं, ‘देखो जी, सच्ची बात यह है कि मम्मी ने बनाए तो हैं रसगुल्ले, पर इस बार स्पंजी रसगुल्ले बनाने के चक्कर में कुछ गड़बड़ हो गई। निक्का को लगा कि ये देखने में अच्छे नहीं हैं। तो पता नहीं, मेरे दोस्तों को कैसे लगें? इसलिए इसने सर्व नहीं किए!’
‘आंटी ने बनाए हैं, फिर भी सर्व नहीं किए। क्यों भाई? फिर तो हम जरूर खाएंगे!’ निक्का के सारे दोस्तों ने एक साथ कहा।
पम्मो दीदी दौड़ी-दौड़ी गर्इं, रसगुल्लों वाला डोंगा उठा लाई। सबने खूब स्पंजी रसगुल्ले खाए और खाने के बाद सबके होंठों पर एक ही बात थी, ‘रसगुल्ले बहुत खाए, पर ऐसे नहीं!’
‘अच्छा इसलिए छिपा के रखे थे बच्चू, ताकि हमारे बाद अकेले खा सको!’ सत्ते हंस कर बोला।
‘बड़े चालाक हो भई निक्का, तुम तो! हम तो समझते थे एकदम भोले-भाले…!’ नील ने भी मजाक किया। सुन कर निक्का शरमा गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि दोस्तों को क्या जवाब दे?

‘ठीक है, बच्चू, अगली बार तुम पार्टी देना, तो हम देखेंगे! हम पहले से ही शर्त रख देंगे कि तभी हम उस पार्टी में शामिल होंगे, जब तुम मम्मी के हाथ के बने रसगुल्ले…!’ सत्ते ने मानो चेतावनी-सी दे दी।
निक्का के दोस्त जाते-जाते उसकी मम्मी को ‘थैंक्स’ कहना नहीं भूले। बाद में निक्का ने भी झेंपते हुए कहा, ‘मम्मी थैंक्स..!’ उसे बड़ी शर्म आ रही थी कि मम्मी का उसने कितना दिल दुखाया।
पर मम्मी ने निक्का की बात का बुरा नहीं माना था। उन्होंने निक्का को प्यार से गोद में उठा कर चूम लिया। ०

 

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