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कहानी- चंदा की रोटी

बहुत पुरानी बात है। चंदा नाम की एक लड़की अपने पिता के साथ रहती थी। उसकी मां उसे जन्म देते ही स्वर्ग सिधार गई थी।

Author April 9, 2017 6:31 AM
डबल रोटी ।

रेनू सैनी

बहुत पुरानी बात है। चंदा नाम की एक लड़की अपने पिता के साथ रहती थी। उसकी मां उसे जन्म देते ही स्वर्ग सिधार गई थी। उसके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया था। सौतेली मां रमा चंदा को बहुत परेशान करती थी। नन्हीं सी ग्यारह साल की रमा घर का सारा काम करती। गायों को चारा खिलाती, खेत पर जाती और घर के सारे काम करती । यहां तक कि रमा चंदा से सब्जी व रोटी भी बनवाती थी। उन दिनों रोटी की शक्ल टेढ़ी-मेढ़ी होती थी। किसी को गोल या जीरो के बारे में ज्ञान नहीं था। पिता राम सारा दिन खेतों में काम करते। दिन ढले घर लौटते। खाना खाते ही सो जाते । अगले दिन बड़े सवेरे कुछ खा-पीकर खेतों पर चल देते। उन्हें खेतों में चंदा ही रोटी-पानी देने जाती। वह कुछ देर खेतों में बिताती। उसे खेतों की हरी-भरी, लहलहाती फसलें बहुत सुंदर लगती। वह सरसों के फूलों को निहारती। पीले-पीले सरसों के फूल, गुलाब के फूल उसे बहुत सुंदर लगते। खेतों से थोड़ा आगे निकलकर एक जंगल था। उस जंगल में तरह-तरह के पेड़-पौधे, जीव-जंतु रहते थे। दिन में अकेली चंदा घूमते-घूमते कई बार उस जंगल की ओर आ जाती। वहां पर हिरन, चिड़ियां, खरगोश और मोर उसके मित्र बन गए थे। एक खरगोश उसे देखते ही उसकी गोद में आ बैठता। चंदा उस सफेद खरगोश को अपनी गोद में लेती और उसे सहलाती। वह उसे चंदू कह कर बुलाती थी। एक दिन जब वह घर जाने लगी तो चंदू ने उसकी गोद से उतरने का नाम ही न लिया। वह उसे छोड़ कर आगे बढ़ती तो चंदू अपने नन्हे-नन्हे पैरों से दौड़ कर चंदा से आगे निकल आता और उसका रास्ता रोक कर खड़ा हो जाता। आखिर नन्हीं मासूम चंदा चंदू से हार गई और उसे अपने हाथों में ले कर आगे बढ़ चली। वह खेत पर पहुंची। खेत पर पिता घर जाने की तैयारी कर रहे थे। चंदा को देखते ही वह बोले-कहां, रह गई थी तू और यह हाथों में किसलिए चली आ रही है? चंदा मुस्करा कर बोली-बापू, यह मेरा मित्र है चंदू। आज यह मेरे साथ ही चला आया। अब मैं इसे अपने पास ही रखूंगी। इसे कभी अपने से दूर न जाने दूंगी। रामू बोला-पर बिटिया, तुझे पता है न कि तेरी मां बहुत कठोर है। वह इसे न रखेगी। चंदा बोली-बापू, किसी तरह आप मां को राजी कर लेना। चंदू किसी को परेशान नहीं करेगा।

घर में चंदा के हाथ में चंदू को देखते ही रमा चिल्लाई। रामू बोला-अरे, चंदा को कुछ मत कहो। इसे मैं लेकर आया हूं। यह घर गंदा नहीं करेगा। रमा बड़बड़ाती रही और चंदा, चंदू को लेकर आंगन में चली गई।रात को चंदा आंगन में चंदू के साथ ही खेलती रही। घर के काम से निपटने के बाद वह चंदू को छत पर लेकर चली गई। उस दिन पूर्णिमा थी। चांद खिला हुआ था। चंदा चंदू को गोद में लिए गोल-गोल दूधिया चांद को निहारती रही। अचानक उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह चंदा की ओर देखते हुए बोली-सारे बच्चे तुम्हें मामा कहते हैं । तुम सबके मामा हो। तुम भी चंदा और मैं भी चंदा, फिर वह खरगोश की ओर देखते हुए बोली-और यह भी चंदू यानी कि चंदा। चंदा मामा, तुम मुझे अपने पास क्यों नहीं बुला लेते। मैं चंदू के साथ तुम्हारे घर आऊंगी और वहीं पर रहूंगी। यह सब बोलते-बोलते पता नहीं उसे कब नींद आ गई। सवेरे उसकी आंख खुली तो देखा रमा उसे झिंझोड़ते हुए कह रही थी-आज घर में मेहमान आएंगे। उनके लिए गरम-गरर्म रोटियां बनाना। नन्हीं चंदा आंखें मलते हुए उठी। नहा-धोकर उसने चंदू को देखा। वह कोने में पड़ी घास खा रहा था। चंदा उसे देखकर खुश हो गई। वह रसोई में काम करने लगी। रमा ने सब्जी बनाई और चंदा से रोटी बनाने को कहा। चंदा रोटी बनाने लगी। उसने टेढ़ी-मेढ़ी रोटी बनाई। अचानक उसकी आंखों में गोल-गोल चंदा घूम गया। वह चंदा से ढेर सारी बातें करती थीं। वह स्वयं से बोली-आज मैं रोटी भी अपने चंदा मामा की तरह गोल ही बनाऊंगी। बस इसके बाद वह रोटी को चंदा मामा का आकार देने के लिए जी-तोड़ मेहनत करती रही। आखिर कुछ देर बाद उसकी एक रोटी गोल बन गई। बस फिर क्या था जैसे एक रोटी गोल बनी वैसे ही सारी रोटियां गोल बनती गर्इं। रमा रोटियां लेने आई तो गोल-गोल सुंदर सफेद रोटियों को देखकर वह भी दंग रह गई। वह बोली-चंदा, ये रोटी किसने बनाई? चंदा बोली-मां मैंने ही बनाई है।

रमा को यकीन नहीं आया। उसने दोबारा से अपने सामने एक गोल रोटी बनाने को कहा। चंदा ने फिर से एक गोल रोटी बना दी। यह देखकर रमा हैरत से रोटियां लेकर मेहमानों को खाना परोसने लगी। आज तक गोल रोटी किसी ने भी नहीं देखी थी। जब सभी लोगों ने चंदा के हाथों की बनी रोटियां खार्इं तो उसकी खूब तारीफ की। मेहमानों ने गोल रोटी के बारे में पूछा तो रमा बोली कि ये रोटियां उसकी बेटी चंदा ने बनाई हैं। मेहमानों ने चंदा से पूछा कि तुमने ये रोटी बनानी कहां से सीखी? चंदा बोली-ृमैंने गोल रोटी चंदा मामा से बनानी सीखी है। वह गोल, उसी तरह रोटी भी गोल। चंदा मामा और मैं अक्सर रात में ढेर सारी बातें करते हैं। उसकी ऐसी बातें सुनकर सभी बोले-सचमुच, चंदा मामा, इसे बहुत प्यार करता है। तभी तो उसने इस लड़की को ऐसी शक्ति दी है कि ये उसी के आकार की रोटियां बना सकती है। उनकी बातें सुनकर रमा को अपनी गलती का अहसास हो गया। वह उसे गले लगाते हुए बोली-चंदा, आज से केवल चंदा ही तेरे मामा नहीं हैं। मैं भी तेरी मां हूं। अब से मैं तुझे मां की तरह ही प्यार करूंगी। यह सुनकर चंदा खुशी से उछल पड़ी और बोली-मां, मेरे चंदू को भी प्यार करना। अपना नाम सुनते ही चंदू चंदा की गोद में उछल कर आ गया और रमा हंसते हुए बोली-हां इसे भी बहुत प्यार करूंगी। इसके बाद नन्ही चंदा रात को चंदा मामा से बातें करती, चंदू के साथ खेलती और अपने माता-पिता के साथ आराम से रहने लगी। कहते हैं कि चंदा मामा को चंदा इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने उसे अपने घर में रहने के लिए बुला लिया। आज भी चांद के साथ नन्ही चंदा गोद में अपने साथ चंदू खरगोश को लिए हुए दिखती है। इसके बाद से ही पृथ्वी पर लोगों के घरों में गोल रोटियां बनने लगीं। ०

 

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